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फरीदाबाद, 19 फरवरी 2026

जिला फरीदाबाद में आगामी 14 मार्च 2026 (शनिवार) को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। यह लोक अदालत जिला न्यायालय परिसर, सेक्टर-12, फरीदाबाद में आयोजित होगी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, फरीदाबाद द्वारा आयोजित इस पहल का उद्देश्य आमजन को त्वरित, सुलभ और किफायती न्याय उपलब्ध कराना है, ताकि लंबित मामलों का आपसी सहमति से समाधान हो सके और न्यायालयों पर बढ़ते बोझ को कम किया जा सके।

इस राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं चेयरमैन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण संदीप गर्ग के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। वहीं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव रितु यादव इसके संचालन की जिम्मेदारी निभा रही हैं।

सीजेएम रितु यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि लोक अदालत में सभी प्रकार के आपसी सहमति योग्य मामलों को शामिल किया जाएगा। इनमें दीवानी मामले, मोटर वाहन दुर्घटना दावा मामले, बैंक रिकवरी, पारिवारिक विवाद, वैवाहिक विवाद, श्रम संबंधी विवाद, चेक बाउंस मामले, बिजली-पानी बिल विवाद, आपराधिक मामलों में समझौता योग्य प्रकरण तथा अन्य प्री-लिटिगेशन मामले शामिल हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि लोक अदालत न्याय प्रणाली का एक प्रभावी और वैकल्पिक माध्यम है, जहां पक्षकार आपसी सहमति से विवाद का समाधान निकाल सकते हैं। इसमें न केवल समय की बचत होती है, बल्कि मुकदमेबाजी की लागत भी कम होती है। आमजन को वर्षों तक अदालतों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और विवाद का समाधान सौहार्दपूर्ण वातावरण में हो जाता है।

राष्ट्रीय लोक अदालत में निपटाए गए मामलों का निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होता है। इसके विरुद्ध किसी उच्च न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती। यह विशेषता लोक अदालत को एक प्रभावी और निर्णायक मंच बनाती है, जहां पक्षकार स्वेच्छा से सहमति देकर समाधान स्वीकार करते हैं।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से संबंधित विभागों, बैंकों, बीमा कंपनियों और सरकारी एजेंसियों को भी निर्देशित किया गया है कि वे लंबित मामलों की सूची तैयार कर लोक अदालत में प्रस्तुत करें। इससे अधिक से अधिक मामलों का निपटारा संभव हो सकेगा।

सीजेएम रितु यादव ने आमजन से अपील की है कि जिन भी पक्षकारों के मामले न्यायालयों में लंबित हैं या जिनके विवाद प्री-लिटिगेशन स्तर पर हैं, वे इस अवसर का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से विवाद का समाधान होने पर न केवल समय और धन की बचत होती है, बल्कि दोनों पक्षों के बीच आपसी संबंध भी बेहतर बने रहते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि लोक अदालत में समझौते के आधार पर पारित निर्णय को सिविल कोर्ट की डिक्री के समान मान्यता प्राप्त होती है। इसलिए यह पूरी तरह वैध और कानूनी रूप से प्रभावी होता है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर इस प्रकार की लोक अदालतों का आयोजन किया जाता है, ताकि न्याय प्रणाली को अधिक सुलभ और जनहितैषी बनाया जा सके। विशेष रूप से मोटर दुर्घटना दावा, बैंक ऋण वसूली और पारिवारिक विवाद जैसे मामलों में लोक अदालत एक कारगर मंच साबित होती है।

फरीदाबाद जिला न्यायालय परिसर में आयोजित होने वाली यह राष्ट्रीय लोक अदालत उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण अवसर है, जो अपने मामलों का शीघ्र और शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं। प्रशासन का प्रयास है कि अधिकतम मामलों का निपटारा कर नागरिकों को न्यायिक राहत प्रदान की जाए।

आमजन से अपेक्षा की गई है कि वे 14 मार्च को निर्धारित समय पर उपस्थित होकर अपने मामलों के समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल करें और इस वैकल्पिक न्याय व्यवस्था का लाभ उठाएं।

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