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फरीदाबाद, 19 फरवरी 2026

आरबीआई कर्मचारी बनकर करीब 1 करोड़ 90 लाख 78 हजार 699 रुपये की ठगी करने के सनसनीखेज मामले में फरीदाबाद पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साइबर थाना सेंट्रल की टीम ने खाताधारक और खाता उपलब्ध कराने वाले आरोपियों को पकड़कर एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस उपायुक्त साइबर क्राइम अभिषेक जोरवाल के मार्गदर्शन में की गई इस कार्रवाई को जिले में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आसिफ (21) निवासी ब्राहमणवाला, निरंजनपुर माजरा, जिला देहरादून (उत्तराखंड), काशिफ आजम (24) निवासी मोहल्ला शेखजादगान, नानौता देहात, जिला सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) तथा नदीम अहमद (38) निवासी इंद्रा नगर कॉलोनी, बसंत विहार, देहरादून (हाल निवासी एमडीए अपार्टमेंट, देहरादून) के रूप में हुई है।

पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, सेक्टर-29 निवासी एक व्यक्ति ने साइबर थाना सेंट्रल में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 6 दिसंबर 2025 को उसे एक अज्ञात नंबर से कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने स्वयं को एयरटेल हेडक्वार्टर, गुरुग्राम का कर्मचारी बताया। उसने कहा कि शिकायतकर्ता का वाई-फाई कनेक्शन बंद किया जा रहा है और कुछ तकनीकी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

इसके कुछ समय बाद शिकायतकर्ता के व्हॉट्सएप पर एक अन्य अज्ञात नंबर से कॉल आया। इस बार कॉल करने वाले ने स्वयं को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का कर्मचारी बताया। उसने कहा कि शिकायतकर्ता के खातों में मौजूद एफडी की राशि की जांच की जानी है और आरबीआई पोर्टल के अनुसार बताए गए खातों में धनराशि अस्थायी रूप से जमा करानी होगी, ताकि वैधता की पुष्टि की जा सके।

साइबर ठगों की बातों में आकर शिकायतकर्ता ने आरटीजीएस के माध्यम से अलग-अलग ट्रांजेक्शनों के जरिए कुल 1,90,78,699 रुपये ठगों द्वारा बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब उसे राशि वापस नहीं मिली और संपर्क भी टूट गया, तब उसे ठगी का अहसास हुआ।

मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर थाना सेंट्रल में संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की गई। तकनीकी विश्लेषण, बैंक खातों की जांच और डिजिटल ट्रेल के आधार पर पुलिस टीम आरोपियों तक पहुंची।

पूछताछ में खुलासा हुआ कि तीनों आरोपी एक-दूसरे को जानते थे। आरोपी आसिफ और काशिफ आजम ने नदीम अहमद का बैंक खाता लेकर आगे साइबर ठगों को उपलब्ध कराया था। जांच में पाया गया कि नदीम अहमद के खाते में ठगी की रकम में से 26 लाख 60 हजार रुपये ट्रांसफर हुए थे।

पुलिस के अनुसार, नदीम अहमद प्रॉपर्टी डीलिंग का कार्य करता है, जबकि आसिफ और काशिफ आजम प्लंबर का काम करते हैं। प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि ये लोग बैंक खाते कमीशन के आधार पर उपलब्ध कराते थे, जिन्हें साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

तीनों आरोपियों को माननीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें आगामी पूछताछ के लिए तीन दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्य कौन हैं और ठगी की राशि को किन-किन खातों के माध्यम से आगे ट्रांसफर किया गया।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि आरबीआई या किसी भी बैंक का अधिकारी कभी भी फोन या व्हॉट्सएप के माध्यम से एफडी या खाते की राशि किसी अन्य खाते में ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहता। इस प्रकार के कॉल पूरी तरह फर्जी होते हैं।

फरीदाबाद पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात कॉल या संदेश के झांसे में आकर अपनी बैंकिंग जानकारी साझा न करें और न ही किसी अनजान खाते में धनराशि ट्रांसफर करें। किसी भी संदिग्ध कॉल की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं।

पुलिस का कहना है कि साइबर अपराध के मामलों में तेजी से कार्रवाई की जा रही है और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जा रहा है। यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि सतर्कता और जागरूकता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

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