चंडीगढ़ | 2 फरवरी 2026
हरियाणा की राजनीति में किसान मुआवजा, ग्रामीण विकास और युवाओं की भागीदारी जैसे मुद्दों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने हाल ही में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण विकास और सामाजिक कल्याण से जुड़े विषयों पर व्यापक चर्चा और ठोस कदमों की आवश्यकता है।
यह विचार उन्होंने रेवाड़ी जिले में आयोजित जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के एक कार्यक्रम के दौरान रखे। कार्यक्रम में युवाओं की भूमिका, लोकतांत्रिक भागीदारी और नीतिगत मुद्दों पर संवाद पर विशेष जोर दिया गया।
फसल नुकसान और मुआवजा प्रक्रिया पर उठे सवाल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दुष्यंत चौटाला ने कहा कि बीते समय में भारी वर्षा और जलभराव के कारण कई जिलों में किसानों को फसल नुकसान का सामना करना पड़ा। ऐसे में सरकार द्वारा मुआवजा वितरण की प्रक्रिया का समयबद्ध और निष्पक्ष होना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह मत व्यक्त किया कि कुछ क्षेत्रों में मुआवजा वितरण को लेकर तेजी दिखाई गई, जबकि अन्य स्थानों पर किसानों को लंबे समय तक सत्यापन और प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं से गुजरना पड़ा।
उन्होंने कहा कि किसानों की आजीविका सीधे तौर पर फसलों पर निर्भर होती है, इसलिए किसी भी प्रकार की देरी या असमानता से उनकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ता है। दुष्यंत चौटाला ने यह भी जोड़ा कि मुआवजा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया जाना चाहिए, ताकि सभी प्रभावित किसानों को समान अवसर मिल सके।
ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दे
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर भी अपनी बात रखी। उनके अनुसार, गांवों में सड़कों की स्थिति, सार्वजनिक सुविधाएं, सामुदायिक भवन और शिक्षा से जुड़ी संरचनाएं ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन क्षेत्रों में योजनाओं का क्रियान्वयन धीमा होता है, तो इसका असर लंबे समय तक महसूस किया जाता है।
उन्होंने यह सुझाव दिया कि ग्रामीण विकास योजनाओं की नियमित समीक्षा होनी चाहिए और स्थानीय जरूरतों के अनुसार प्राथमिकताएं तय की जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य स्तर पर बजट आवंटन में ग्रामीण क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पर्याप्त स्थान मिलना चाहिए।
सामाजिक कल्याण योजनाओं पर चर्चा
अपने संबोधन में दुष्यंत चौटाला ने सामाजिक कल्याण योजनाओं, विशेष रूप से पेंशन से जुड़ी व्यवस्थाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वृद्धजन, विधवाएं और अन्य पात्र लाभार्थी समाज का संवेदनशील वर्ग होते हैं, जिनके लिए योजनाओं का निरंतर और सुचारू रूप से लागू होना जरूरी है।
उन्होंने यह राय रखी कि यदि किसी योजना में पात्रता से जुड़े नियमों में बदलाव किया जाता है, तो इसकी जानकारी स्पष्ट रूप से आम जनता तक पहुंचनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार का भ्रम या असमंजस न रहे।
युवाओं की भूमिका और लोकतांत्रिक सहभागिता
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर जागरूक करना बताया गया। इस अवसर पर जेजेपी के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला ने भी युवाओं को संबोधित किया।
दिग्विजय चौटाला ने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे केवल चुनावी राजनीति तक सीमित न रहें, बल्कि सामाजिक मुद्दों, नीतियों और जनहित से जुड़े विषयों पर भी सक्रिय रूप से अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। उनके अनुसार, विचारों की प्रतिस्पर्धा और लोकतांत्रिक संवाद से ही समाज आगे बढ़ता है।
राजनीतिक विमर्श और विभिन्न दलों की भूमिका
कार्यक्रम के दौरान राजनीतिक परिदृश्य पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने यह विचार रखा कि लोकतंत्र में विभिन्न राजनीतिक दलों की भूमिका जनता के सामने वैकल्पिक नीतियां और दृष्टिकोण रखने की होती है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए यह आवश्यक है कि सभी दल मुद्दों पर आधारित राजनीति करें और जनहित से जुड़े विषयों को प्राथमिकता दें।
इस संदर्भ में यह भी कहा गया कि मतदाता जागरूकता और बूथ स्तर पर निगरानी जैसी प्रक्रियाएं लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में सहायक होती हैं। दुष्यंत चौटाला ने उल्लेख किया कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए संगठनात्मक स्तर पर तैयारियां की जानी चाहिए।
किसानों और ग्रामीण युवाओं की अपेक्षाएं
कार्यक्रम में मौजूद लोगों के साथ संवाद के दौरान यह बात सामने आई कि किसान और ग्रामीण युवा दोनों ही स्थिर आय, बेहतर शिक्षा, रोजगार के अवसर और बुनियादी सुविधाओं को लेकर अपेक्षाएं रखते हैं। वक्ताओं ने कहा कि नीतियों का मूल्यांकन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि उनके जमीनी प्रभाव से किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच निरंतर संवाद बना रहना चाहिए, ताकि समस्याओं का समाधान समय रहते किया जा सके।
लोकतांत्रिक संवाद की आवश्यकता
वक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन संवाद और संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से ही इनका समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक विमर्श को बढ़ावा देना सभी राजनीतिक दलों और नागरिकों की साझा जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के अंत में युवाओं से अपील की गई कि वे तथ्यों के आधार पर अपनी राय बनाएं, लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करें और सामाजिक एकता को प्राथमिकता दें।
निष्पक्ष और तथ्यपरक दृष्टिकोण पर जोर
इस पूरे कार्यक्रम में यह बात प्रमुख रूप से सामने आई कि किसान मुआवजा, ग्रामीण विकास, सामाजिक कल्याण और युवाओं की भागीदारी जैसे विषय केवल किसी एक दल या सरकार तक सीमित नहीं हैं। ये ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर दीर्घकालिक और संतुलित नीतियों की आवश्यकता होती है।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि आलोचना और सुझाव दोनों का उद्देश्य व्यवस्था को बेहतर बनाना होना चाहिए। लोकतंत्र में विचारों का आदान-प्रदान तभी सार्थक होता है, जब वह तथ्यात्मक, संतुलित और जनहित पर केंद्रित हो।
कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के समापन पर यह संदेश दिया गया कि आने वाले समय में राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर युवाओं की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए जागरूक नागरिकों की भूमिका को अनिवार्य बताया गया।
इस अवसर पर जेजेपी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे, जिन्होंने युवाओं के साथ संवाद किया और संगठनात्मक गतिविधियों की जानकारी साझा की।

