संवाददाता – Divyanshu Ojha (Journalist)
हरियाणा सरकार की नौकरशाही में लगभग एक वर्ष से लंबित महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों को लेकर आखिरकार बड़ा निर्णय सामने आया है। राज्य सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. सुमिता मिश्रा को नियमित रूप से अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) एवं वित्तायुक्त-राजस्व (एफसीआर) नियुक्त कर दिया है। इसके साथ ही प्रदेश के गृह सचिव पद पर सुधीर राजपाल की तैनाती की गई है। वहीं वित्त एवं योजना विभाग का अतिरिक्त कार्यभार अब मुख्य सचिव के स्थान पर अरुण कुमार गुप्ता को सौंपा गया है।
यह फेरबदल 27 जनवरी को जारी आदेशों के माध्यम से किया गया, जिससे राज्य प्रशासन की लंबे समय से लंबित व्यवस्थागत स्थिति को स्पष्ट दिशा मिली है।
एक वर्ष बाद मिली नियमित एफसीआर तैनाती
हरियाणा सरकार में अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं वित्तायुक्त-राजस्व (एफसीआर) का पद नौकरशाही के सबसे महत्वपूर्ण पदों में से एक माना जाता है। यह पद मुख्य सचिव के बाद राज्य प्रशासन में दूसरा सबसे प्रभावशाली और प्रतिष्ठित पद होता है। सामान्यत: इस पद पर वही आईएएस अधिकारी तैनात किया जाता है जो वरिष्ठता सूची में शीर्ष पर हो या मुख्य सचिव के बैच के समकक्ष हो।
डॉ. सुमिता मिश्रा, 1990 बैच की आईएएस अधिकारी हैं और फरवरी 2025 से प्रदेश की गृह सचिव के रूप में कार्यरत थीं। इसी अवधि में वे एफसीआर और राजस्व सचिव का कार्यभार लिंक ऑफिसर के रूप में संभाल रही थीं। अब लगभग एक वर्ष बाद उन्हें नियमित रूप से एफसीआर और राजस्व सचिव नियुक्त कर दिया गया है।
यह नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, चकबंदी और आगामी जनगणना जैसे अहम विषय इसी विभाग के अधीन आते हैं।
डॉ. सुमिता मिश्रा के पास रहेंगे कई अहम विभाग
नई नियुक्ति के अनुसार डॉ. सुमिता मिश्रा को एफसीआर एवं राजस्व सचिव के साथ-साथ स्वास्थ्य, मेडिकल शिक्षा और आयुष विभागों की अतिरिक्त मुख्य सचिव की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इस प्रकार वे राज्य सरकार के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक विभागों में से कई का नेतृत्व करेंगी।
प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार, एक ही अधिकारी के पास इतने संवेदनशील और बड़े विभागों का दायित्व होना सरकार के भरोसे को दर्शाता है, साथ ही यह संकेत भी देता है कि आने वाले समय में स्वास्थ्य और राजस्व से जुड़े विषयों पर विशेष प्रशासनिक फोकस रहेगा।
नौकरशाही संरचना और वरिष्ठता का संदर्भ
प्रशासनिक मामलों के जानकार और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अधिवक्ता हेमंत कुमार के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा प्रकाशित आईएएस सिविल लिस्ट के मुताबिक हरियाणा कैडर में 1990 बैच के सबसे वरिष्ठ अधिकारी सुधीर राजपाल हैं। उनके बाद डॉ. सुमिता मिश्रा का स्थान आता है, जबकि उसी बैच में इसके बाद अनुराग रस्तोगी हैं, जो वर्तमान में हरियाणा के मुख्य सचिव हैं।
अनुराग रस्तोगी को जून 2025 में सेवा में एक वर्ष का विस्तार मिला था। उनके बाद 1990 बैच में राजा शेखर वुन्दरू का स्थान आता है, जो वर्तमान में मछली पालन और परिवहन विभाग के एसीएस हैं।
क्यों लंबित रही एफसीआर की नियमित तैनाती
हेमंत कुमार के अनुसार, 19 फरवरी 2025 को तत्कालीन एफसीआर और राजस्व सचिव अनुराग रस्तोगी के मुख्य सचिव बनने के बाद से यह पद नियमित रूप से रिक्त था। हालांकि प्रशासनिक कार्य बाधित नहीं हुए क्योंकि सरकार के नियमों के अनुसार लिंक ऑफिसर प्रणाली लागू की गई थी।
इन नियमों के तहत यदि राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के प्रशासनिक सचिव का पद रिक्त होता है, तो गृह विभाग का प्रशासनिक सचिव स्वतः उसका प्रथम लिंक ऑफिसर बन जाता है। इसी व्यवस्था के अंतर्गत डॉ. सुमिता मिश्रा फरवरी 2025 से एफसीआर की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि लिंक ऑफिसर की व्यवस्था स्थायी समाधान नहीं होती और केवल अल्पकालिक विकल्प के रूप में ही इसका प्रयोग किया जाना चाहिए।
जनगणना-2027 के मद्देनज़र अहम निर्णय
हेमंत कुमार ने बीते महीनों में कई बार सरकार को यह सुझाव दिया था कि चूंकि आगामी जनगणना-2027 की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है और यह विषय राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अंतर्गत आता है, इसलिए एफसीआर के पद पर नियमित और पूर्णकालिक वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति आवश्यक है।
अब डॉ. सुमिता मिश्रा की नियमित तैनाती के साथ इस दिशा में प्रशासनिक स्थिरता आने की उम्मीद जताई जा रही है।
वित्त एवं योजना विभाग का नया प्रभार
इसी आदेश के तहत वित्त एवं योजना विभाग का अतिरिक्त कार्यभार, जो अब तक मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के पास था, अब अरुण कुमार गुप्ता को सौंप दिया गया है। अरुण गुप्ता वर्तमान में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव हैं और अब वे एसीएस, वित्त एवं योजना विभाग की जिम्मेदारी भी संभालेंगे।
वहीं उनके पास पहले से मौजूद शहरी स्थानीय निकाय विभागों का अतिरिक्त कार्यभार अब मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव साकेत कुमार को कमिश्नर एवं सचिव के रूप में सौंपा गया है।
सुधीर राजपाल बने नए गृह सचिव
एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव के तहत सुधीर राजपाल को प्रदेश के गृह, जेल, आपराधिक जांच और न्याय प्रशासन विभागों का अतिरिक्त मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। वे डॉ. सुमिता मिश्रा के स्थान पर यह दायित्व संभालेंगे।
हालांकि सुधीर राजपाल के पास पहले से आबंटित पर्यावरण, वन और वन्यजीव विभागों का कार्यभार यथावत रहेगा। इस प्रकार उनके जिम्मेदारी क्षेत्र में और विस्तार हुआ है।
प्रशासनिक संतुलन की दिशा में कदम
विशेषज्ञों के अनुसार, यह फेरबदल हरियाणा सरकार की प्रशासनिक संरचना को अधिक संतुलित और कार्यक्षम बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है। लंबे समय से अतिरिक्त प्रभारों के सहारे चल रहे विभागों को अब नियमित नेतृत्व मिलने से नीति-निर्माण और क्रियान्वयन में स्पष्टता आने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
लगभग एक वर्ष बाद डॉ. सुमिता मिश्रा की नियमित एफसीआर के रूप में तैनाती, सुधीर राजपाल का गृह सचिव बनना और अरुण गुप्ता को वित्त एवं योजना विभाग का अतिरिक्त प्रभार मिलना—ये सभी बदलाव हरियाणा सरकार की नौकरशाही में महत्वपूर्ण पुनर्संरचना को दर्शाते हैं। इन निर्णयों से राजस्व, गृह और वित्त जैसे संवेदनशील विभागों में प्रशासनिक स्थिरता आने की संभावना है, जो आने वाले समय में राज्य की नीति-निर्माण प्रक्रिया को और प्रभावी बना सकती है।

