फरीदाबाद, 15 मार्च। बदलते मौसम और लगातार बढ़ते तापमान के बीच किडनी रोगियों के लिए स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ जाते हैं। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही मरीजों की स्थिति को गंभीर बना सकती है, इसलिए गर्मी के मौसम में विशेष सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है। यह बात ग्रेटर फरीदाबाद सेक्टर-86 स्थित एकॉर्ड अस्पताल के चेयरमैन एवं वरिष्ठ किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र कुमार ने कही।
नीलम बाटा रोड स्थित एक होटल में आयोजित सेमिनार में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। इस दौरान डॉ. कुमार ने किडनी से जुड़ी बीमारियों, उनके कारणों तथा बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन दिनों अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 8 से 10 नए किडनी मरीज सामने आ रहे हैं। इनमें अधिकतर मरीज डिहाइड्रेशन, संक्रमण, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के कारण किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि गर्मी में अधिक पसीना निकलने से शरीर में पानी और जरूरी लवणों (इलेक्ट्रोलाइट्स) की कमी हो जाती है, जिससे किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। सामान्य व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, जबकि किडनी रोगियों को अपनी स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह पर ही तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए। विशेषकर डायलिसिस मरीज बिना परामर्श पानी या अन्य तरल पदार्थों की मात्रा न बढ़ाएं।
डॉ. कुमार ने बताया कि जो मरीज एसजीएलटी-2 इन्हिबिटर, एआरबी या एसीई इन्हिबिटर जैसी दवाइयों का सेवन कर रहे हैं, उन्हें गर्मी में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। इन दवाओं के साथ डिहाइड्रेशन होने पर किडनी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे मरीज पानी की मात्रा, ब्लड प्रेशर और किडनी फंक्शन की नियमित जांच कराते रहें तथा बिना डॉक्टर की सलाह के दवा या तरल सेवन में कोई बदलाव न करें।
उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में खुले और अस्वच्छ खाद्य पदार्थों से संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है, जो किडनी मरीजों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए घर का ताजा और संतुलित भोजन ही लेना चाहिए। साथ ही नियमित दवाइयों का सेवन, समय-समय पर जांच और डॉक्टर से परामर्श आवश्यक है।
डॉ. कुमार ने लोगों को तेज धूप से बचने, हल्के व ढीले कपड़े पहनने तथा शरीर को हाइड्रेट रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किडनी संबंधी बीमारियां अक्सर धीरे-धीरे बढ़ती हैं और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने से स्थिति गंभीर हो सकती है।
सेमिनार के अंत में उन्होंने कहा कि जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। यदि लोग समय रहते अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत हों और सही जीवनशैली अपनाएं, तो किडनी संबंधी बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

