फरीदाबाद में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 78वीं पुण्यतिथि के अवसर पर शुक्रवार को जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय, सेक्टर-9 में श्रद्धा और अनुशासन के साथ एक स्मृति कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने राष्ट्रपिता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर दो मिनट का मौन रखा और उनके जीवन, विचारों तथा सामाजिक योगदान को स्मरण किया।
यह कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और मर्यादित वातावरण में संपन्न हुआ, जिसमें गांधी जी के विचारों पर चर्चा और उनके आदर्शों को याद करने पर विशेष जोर दिया गया।
जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित हुई श्रद्धांजलि सभा
श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता बलजीत कौशिक ने की। कार्यक्रम की शुरुआत में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्र पर पुष्प अर्पित किए गए, जिसके बाद उपस्थित सभी लोगों ने सामूहिक रूप से मौन धारण किया।
कार्यक्रम में मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन केवल औपचारिकता नहीं होते, बल्कि समाज को अपने ऐतिहासिक मूल्यों और नैतिक आधारों से जोड़ने का माध्यम भी होते हैं।
महात्मा गांधी के जीवन मूल्यों पर चर्चा
सभा को संबोधित करते हुए बलजीत कौशिक ने कहा कि महात्मा गांधी का जीवन सत्य, अहिंसा और सामाजिक न्याय जैसे मूल्यों पर आधारित रहा है। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने न केवल देश को स्वतंत्रता दिलाने में भूमिका निभाई, बल्कि समाज में समानता, भाईचारे और नैतिकता की भावना को भी मजबूत किया।
उनका कहना था कि गांधी जी के विचार आज भी प्रासंगिक हैं और सामाजिक सौहार्द, शांति एवं लोकतांत्रिक मूल्यों को समझने में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा गांधी का संघर्ष और जीवन दर्शन केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि वर्तमान समाज के लिए भी प्रेरणास्रोत है।
पुण्यतिथि को शहीद दिवस के रूप में याद किया गया
कार्यक्रम के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि 30 जनवरी को देशभर में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन केवल राष्ट्रपिता के बलिदान को स्मरण करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी व्यक्तियों को नमन करने का अवसर भी प्रदान करता है, जिन्होंने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
वक्ताओं ने कहा कि इस दिन का महत्व नई पीढ़ी को इतिहास और राष्ट्रनिर्माण के मूल्यों से जोड़ने में भी है।
सामाजिक न्याय और समानता पर बल
सभा में वक्ताओं ने गांधी जी के सामाजिक दृष्टिकोण पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने समाज के हर वर्ग के अधिकारों की बात की और विशेष रूप से वंचित एवं कमजोर वर्गों के उत्थान पर जोर दिया।
इस दौरान यह कहा गया कि—
सामाजिक समानता
आपसी सद्भाव
अहिंसक संवाद
जैसे विचार आज भी समाज को जोड़ने में सहायक हो सकते हैं। वक्ताओं ने कहा कि गांधी जी के विचार केवल राजनीतिक संदर्भ तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे सामाजिक और नैतिक जीवन के हर पहलू से जुड़े हुए थे।
समकालीन संदर्भों में गांधी विचारों की चर्चा
कार्यक्रम में कुछ वक्ताओं द्वारा यह भी कहा गया कि वर्तमान समय में गांधी जी के सिद्धांतों को समझना और उन पर चर्चा करना आवश्यक है। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद, सहमति और अहिंसा की भूमिका आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी स्वतंत्रता आंदोलन के समय थी।
सभा के दौरान यह विचार भी सामने आया कि इतिहास और विरासत से जुड़े विषयों पर संवाद लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं और इन्हें शांतिपूर्ण एवं वैचारिक तरीके से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता रहे उपस्थित
इस श्रद्धांजलि सभा में कांग्रेस संगठन से जुड़े अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम में हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी विचार विभाग के अध्यक्ष विनोद कौशिक, प्रदेश प्रवक्ता योगेश ढींगरा, डॉ. एस. एल. शर्मा, पूर्व पार्षद राजेंद्र चपराना सहित अनेक वरिष्ठ और स्थानीय कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में मास्टर ऋषिपाल, अशोक रावल, वेद प्रकाश यादव, गौरव ढींगड़ा, रेनू चौहान, चुन्नू राजपूत, बाबूलाल रवि, संजय सोलंकी, मुकेश डागर, हेम डागर, सुरेश बेनीवाल, देवेंद्र दीक्षित, अनुज शर्मा, ललित बंसल, राजा सैनी, एन. के. शर्मा, विकास फागना, प्रेम यादव, नसीमा शेख, राजकुमार यादव, सीमा, मोहसिन खान, जय भगवान शर्मा, वेदराम शर्मा, रमेश सरपंच, हातिम अधाना, हब्बन खान, आजाद कुरैशी, प्रीतम प्रधान, महेश बैंसला, पंकज, रविदत्त शर्मा, शैलेंद्र, मंगत शर्मा सहित कई अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य और स्वरूप
इस श्रद्धांजलि सभा का उद्देश्य राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन और विचारों को याद करना और उनके आदर्शों पर चर्चा करना रहा। कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार का शोर-शराबा या अव्यवस्था नहीं रही और पूरा आयोजन अनुशासन एवं शांति के साथ संपन्न हुआ।
आयोजकों का कहना था कि इस तरह के कार्यक्रम समाज में ऐतिहासिक चेतना और नैतिक मूल्यों को बनाए रखने में सहायक होते हैं।

