संवाददाता – Divyanshu Ojha (Journalist)
फरीदाबाद में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 को सेक्टर-12 स्थित उपायुक्त कार्यालय परिसर में श्रद्धा, शांति और अनुशासन के साथ दो मिनट का मौन धारण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यह कार्यक्रम हरियाणा सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रातः 11:00 बजे आयोजित किया गया, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों और स्टाफ सदस्यों ने सहभागिता की।
यह आयोजन औपचारिकता तक सीमित न रहकर राष्ट्रपिता के विचारों और मूल्यों को स्मरण करने का अवसर बना, जिसमें उपस्थित सभी लोगों ने आत्मचिंतन और अनुशासन के साथ मौन रखकर श्रद्धांजलि दी।
उपायुक्त कार्यालय परिसर में गरिमामय आयोजन
पुण्यतिथि कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त कार्यालय परिसर में पूर्ण शांति और मर्यादित वातावरण बना रहा। मौन धारण से पहले अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्धारित स्थान पर एकत्रित किया गया, जहां राष्ट्रपिता के चित्र के समक्ष सभी ने एकजुट होकर मौन रखा। कार्यक्रम का संचालन तय समय-सारिणी के अनुसार किया गया, जिससे आयोजन सुव्यवस्थित और अनुशासित रहा।
इस अवसर पर सिटी मजिस्ट्रेट अंकित कुमार सहित उपायुक्त कार्यालय के अधीन विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी और अन्य स्टाफ सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने समान भाव से इस राष्ट्रीय स्मरण दिवस में भाग लिया।
दो मिनट का मौन: एक प्रतीकात्मक लेकिन गहरा संदेश
दो मिनट का मौन केवल एक औपचारिक परंपरा नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता के विचारों और उनके बलिदान को याद करने का एक प्रतीकात्मक माध्यम है। मौन के दौरान उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने सत्य, अहिंसा, संयम और सेवा जैसे मूल्यों पर विचार किया, जो महात्मा गांधी के जीवन और संघर्ष का आधार रहे हैं।
मौन के इस क्षण ने सभी को यह याद दिलाया कि राष्ट्र निर्माण केवल नीतियों और योजनाओं से नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से भी होता है।
राष्ट्रपिता के आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों ने यह संकल्प भी लिया कि वे महात्मा गांधी के आदर्शों को अपने व्यक्तिगत जीवन और कार्यस्थल दोनों में अपनाने का प्रयास करेंगे। इसमें—
ईमानदारी और पारदर्शिता
कर्तव्यनिष्ठा
अनुशासन
समाज के प्रति जिम्मेदारी
जैसे मूल्यों को व्यवहार में लाने की भावना व्यक्त की गई। अधिकारियों का मानना है कि प्रशासनिक व्यवस्था में नैतिक मूल्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है और ऐसे आयोजन इस सोच को मजबूत करते हैं।
शहीद दिवस के रूप में पुण्यतिथि का महत्व
कार्यक्रम के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि 30 जनवरी को देशभर में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन न केवल राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बलिदान को स्मरण करने का अवसर देता है, बल्कि उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों को भी नमन करने का प्रतीक है, जिन्होंने देश की आज़ादी और एकता के लिए अपने प्राण न्योछावर किए।
अधिकारियों ने कहा कि शहीद दिवस हमें यह याद दिलाता है कि स्वतंत्रता केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि एक सतत जिम्मेदारी है, जिसे हर नागरिक को निभाना होता है।
प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में नैतिक चेतना का महत्व
उपायुक्त कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल श्रद्धांजलि देना ही नहीं था, बल्कि प्रशासनिक तंत्र में नैतिक चेतना और संवेदनशीलता को सुदृढ़ करना भी था। अधिकारियों का मानना है कि जब कर्मचारी और अधिकारी राष्ट्र के महापुरुषों के विचारों से प्रेरणा लेते हैं, तो उनकी कार्यप्रणाली अधिक उत्तरदायी और जनहितकारी बनती है।
ऐसे कार्यक्रम कर्मचारियों में—
टीम भावना
राष्ट्रीय एकता की समझ
सामाजिक समरसता
को भी बढ़ावा देते हैं।
शांतिपूर्ण और अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ कार्यक्रम
पूरे कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त कार्यालय परिसर में अनुशासन और गंभीरता बनी रही। किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या शोर-शराबे से दूर, कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। इससे आयोजन की गरिमा और महत्व और अधिक प्रभावी रूप में सामने आया।
प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित किया गया कि सभी विभागों के कर्मचारी समय पर उपस्थित रहें और कार्यक्रम की मर्यादा बनाए रखें।
भविष्य में भी होंगे ऐसे आयोजन
उपायुक्त कार्यालय, फरीदाबाद की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि भविष्य में भी राष्ट्रीय महत्व के ऐसे कार्यक्रमों का नियमित आयोजन किया जाता रहेगा। इसका उद्देश्य कर्मचारियों और अधिकारियों में—
देशभक्ति
अनुशासन
नैतिक मूल्यों
की भावना को निरंतर प्रोत्साहित करना है।
प्रशासन का मानना है कि जब कार्यस्थल पर राष्ट्रीय चेतना को महत्व दिया जाता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव समाज और नागरिकों तक भी पहुंचता है।
निष्कर्ष
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उपायुक्त कार्यालय, फरीदाबाद में आयोजित दो मिनट का मौन कार्यक्रम श्रद्धा, अनुशासन और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक रहा। यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता के आदर्शों को स्मरण कर उन्हें जीवन में उतारने का संदेश भी देता है। ऐसे कार्यक्रम प्रशासनिक व्यवस्था में मानवीय मूल्यों और नैतिक जिम्मेदारियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

