सूरजकुंड (फरीदाबाद), 01 फरवरी।
39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव 2026 के तहत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला जारी है। इसी क्रम में 3 फरवरी, मंगलवार को पंजाबी गीत ‘तू लांग मैं लाची’ से पहचान बनाने वाली गायिका मन्नत नूर शिल्प महोत्सव में सांस्कृतिक प्रस्तुति देंगी। यह प्रस्तुति मेले की मुख्य चौपाल में आयोजित की जाएगी, जिसे लेकर संगीत प्रेमियों और पर्यटकों में उत्सुकता देखी जा रही है।
आयोजकों के अनुसार, सूरजकुंड शिल्प महोत्सव में प्रतिदिन विभिन्न राज्यों और देशों की लोक व आधुनिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को मंच दिया जा रहा है, ताकि मेले में आने वाले पर्यटकों को शिल्प के साथ-साथ सांस्कृतिक अनुभव भी मिल सके।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से पर्यटकों को जोड़ा जा रहा
हरियाणा कला एवं सांस्कृतिक विभाग के मार्गदर्शन में आयोजित इन कार्यक्रमों का उद्देश्य मेले में आने वाले आगंतुकों के लिए विविध मनोरंजन के अवसर उपलब्ध कराना है। शिल्प, हस्तकला और व्यंजनों के साथ-साथ संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियां इस आयोजन को बहुआयामी स्वरूप प्रदान कर रही हैं।
विभाग के अनुसार, सांस्कृतिक संध्याओं के माध्यम से—
लोक कला और आधुनिक संगीत का संतुलन
विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक झलक
कलाकारों और दर्शकों के बीच संवाद
को बढ़ावा दिया जा रहा है।
मन्नत नूर की प्रस्तुति से जुड़े कार्यक्रम विवरण
3 फरवरी को होने वाली इस सांस्कृतिक संध्या में मन्नत नूर अपने लोकप्रिय पंजाबी गीतों की प्रस्तुति देंगी। उनकी गायकी को युवा वर्ग के साथ-साथ पारंपरिक संगीत पसंद करने वाले श्रोताओं द्वारा भी सराहा जाता रहा है।
आयोजकों के अनुसार, इस प्रस्तुति में—
पंजाबी लोक संगीत की झलक
आधुनिक संगीत के तत्व
मंचीय प्रस्तुति का संतुलित संयोजन
देखने को मिलेगा, जिससे दर्शकों को एक अलग अनुभव प्राप्त होगा।
गीतों के माध्यम से बनी पहचान
मन्नत नूर को उनके गीतों के लिए जाना जाता है, जिन्होंने संगीत प्रेमियों के बीच खास पहचान बनाई है। उनके गाए गीत विभिन्न मंचों और कार्यक्रमों में प्रस्तुत किए जाते रहे हैं। सूरजकुंड शिल्प महोत्सव जैसे बड़े सांस्कृतिक आयोजन में उनकी भागीदारी से कार्यक्रमों की विविधता और बढ़ेगी।
सांस्कृतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजनों में समकालीन कलाकारों की भागीदारी—
युवाओं को सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जोड़ती है
लोक और आधुनिक संगीत के बीच सेतु का कार्य करती है
पारंपरिक आयोजनों में नई ऊर्जा जोड़ती है
सूरजकुंड महोत्सव: शिल्प के साथ संस्कृति का मंच
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव केवल हस्तशिल्प और कारीगरी तक सीमित नहीं है। यहां—
देश-विदेश के शिल्पकार
लोक कलाकार
संगीत और नृत्य से जुड़े कलाकार
एक साझा मंच पर अपनी प्रस्तुतियां देते हैं। इससे पर्यटकों को भारत और अन्य देशों की सांस्कृतिक विविधता को नजदीक से देखने का अवसर मिलता है।
सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देने की पहल
कला एवं सांस्कृतिक विभाग के अनुसार, इस तरह के कार्यक्रमों का उद्देश्य सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देना और कलाकारों को एक सशक्त मंच प्रदान करना है। विभाग का मानना है कि संगीत और कला समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं और ऐसे आयोजन इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में—
शास्त्रीय
लोक
आधुनिक संगीत
सभी विधाओं को स्थान दिया जा रहा है, ताकि हर आयु वर्ग के दर्शकों को रुचिकर अनुभव मिल सके।
पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण
3 फरवरी को होने वाली यह सांस्कृतिक संध्या शिल्प महोत्सव में आने वाले पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहने की संभावना है। देश-विदेश से आए पर्यटक शिल्प देखने के साथ-साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी आनंद ले सकेंगे।
आयोजकों का कहना है कि—
सांस्कृतिक कार्यक्रमों से मेले में रुकने की अवधि बढ़ती है
पर्यटकों को संपूर्ण अनुभव मिलता है
शिल्प और संस्कृति दोनों को समान मंच मिलता है
युवा दर्शकों की बढ़ती भागीदारी
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। आधुनिक संगीत और लोक तत्वों का संयोजन युवाओं को आकर्षित करता है और उन्हें सांस्कृतिक आयोजनों से जोड़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार—
युवा वर्ग की भागीदारी से आयोजनों में जीवंतता आती है
कलाकारों को विविध श्रोता वर्ग मिलता है
सांस्कृतिक परंपराएं नई पीढ़ी तक पहुंचती हैं
आयोजन की तैयारियां और व्यवस्थाएं
आयोजकों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए मंच, ध्वनि व्यवस्था और दर्शक बैठने की उचित व्यवस्था की जा रही है। सुरक्षा और यातायात से जुड़े इंतजाम भी प्रशासन के सहयोग से किए गए हैं, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रूप से संपन्न हो सके।
संगीत प्रेमियों से सहभागिता की अपील
कला एवं सांस्कृतिक विभाग ने संगीत प्रेमियों और पर्यटकों से अपील की है कि वे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेकर कलाकारों का उत्साहवर्धन करें। विभाग का कहना है कि दर्शकों की सक्रिय भागीदारी से ही ऐसे आयोजनों की सार्थकता बढ़ती है।

