फरीदाबाद | 05 फरवरी 2026

मनरेगा गांवों की आजीविका से जुड़ी अहम योजना: बलजीत कौशिक

फरीदाबाद में मनरेगा को लेकर आयोजित जनजागरूकता कार्यक्रम के दौरान इस योजना के सामाजिक और आर्थिक महत्व पर जोर दिया गया। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बलजीत कौशिक ने कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि ग्रामीण भारत की रोजी-रोटी और आत्मनिर्भरता से सीधे जुड़ी व्यवस्था है। उन्होंने इसे गांवों के लिए काम, सम्मान और आजीविका का आधार बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा का उद्देश्य हर जरूरतमंद को काम का अवसर देना है। इसी वजह से इस योजना को कमजोर करने के बजाय और अधिक प्रभावी बनाए जाने की आवश्यकता है, ताकि ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत पैदल मार्च

मनरेगा बचाओ संग्राम के अंतर्गत अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर फरीदाबाद में पैदल मार्च निकाला गया। यह मार्च सेक्टर-12 स्थित पेट्रोल पंप से शुरू होकर जिला उपायुक्त कार्यालय तक पहुंचा।

इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी। उपायुक्त की अनुपस्थिति में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन एसडीएम अमित कुमार को सौंपा गया।

ज्ञापन में उठाए गए प्रमुख बिंदु

ज्ञापन में मनरेगा के महत्व और इसके सामाजिक प्रभावों का उल्लेख किया गया। बलजीत कौशिक ने कहा कि यह योजना ग्रामीण मजदूरों, किसानों और कमजोर वर्गों को सम्मान के साथ रोजगार का अवसर देती रही है।

उनका कहना था कि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के साधनों की कमी को देखते हुए मनरेगा जैसी योजनाएं बेहद जरूरी हैं। इससे न केवल रोजगार मिलता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा गया कि मनरेगा के तहत मिलने वाला रोजगार गांवों में आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में सहायक रहा है। मजदूरी से मिलने वाली आय का उपयोग परिवारों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में होता है।

इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसी आवश्यकताओं पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। वक्ताओं ने कहा कि जब ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित आय होती है, तो पलायन की समस्या भी कम होती है।

नीति में बदलाव पर चिंता

बलजीत कौशिक ने कहा कि मनरेगा से जुड़े नियमों और वित्तीय व्यवस्था में हुए बदलावों को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में चिंता है। उन्होंने बताया कि पहले इस योजना के तहत केंद्र सरकार का योगदान अधिक था, जिससे राज्यों को इसे प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलती थी।

उन्होंने कहा कि किसी भी योजना में बदलाव करते समय उसके दूरगामी प्रभावों को ध्यान में रखना जरूरी होता है, खासकर तब जब वह करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़ी हो।

संघर्ष जारी रखने की बात

उन्होंने कहा कि मनरेगा से जुड़े मुद्दों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी जाती रहेगी। उनका कहना था कि जब तक ग्रामीण हितों से जुड़े सवालों का समाधान नहीं होता, तब तक संवाद और जनआंदोलन के माध्यम से आवाज उठाई जाएगी।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह विषय किसी एक संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे ग्रामीण समाज से जुड़ा हुआ है।

कांग्रेस की भूमिका पर बयान

कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा गरीबों, किसानों और मजदूरों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी है। वक्ताओं ने कहा कि रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं ने ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है।

उनका मानना था कि इन योजनाओं को समय के साथ और मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि बदलती परिस्थितियों में भी उनका लाभ लोगों तक पहुंचता रहे।

बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी

इस कार्यक्रम में हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी विचार विभाग के अध्यक्ष विनोद कौशिक, प्रदेश प्रवक्ता योगेश ढींगड़ा, पूर्व पार्षद राजेंद्र चपराना सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

इसके अलावा महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस और अन्य संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और मनरेगा से जुड़े विषय पर अपनी राय रखी।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत ज्ञापन

कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि ज्ञापन सौंपने का उद्देश्य सरकार तक जनभावनाओं को पहुंचाना है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में ज्ञापन और संवाद को एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।

कार्यकर्ताओं ने उम्मीद जताई कि इस विषय पर संबंधित स्तर पर विचार किया जाएगा और ग्रामीण हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जाएंगे।

ग्रामीण रोजगार पर केंद्रित चर्चा

इस पूरे कार्यक्रम का केंद्र बिंदु ग्रामीण रोजगार और आजीविका रहा। वक्ताओं ने कहा कि गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाना समय की जरूरत है।

मनरेगा जैसी योजनाएं इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए इनके क्रियान्वयन, पारदर्शिता और प्रभावशीलता पर लगातार ध्यान दिया जाना चाहिए।

सामाजिक सरोकार से जुड़ा मुद्दा

मनरेगा को लेकर उठाए गए सवालों को सामाजिक सरोकार से जुड़ा बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि रोजगार केवल आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि इससे सम्मान और आत्मनिर्भरता भी जुड़ी होती है।

इसी वजह से ग्रामीण रोजगार से जुड़ी नीतियों पर व्यापक चर्चा और सहमति आवश्यक है।

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