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फरीदाबाद |  राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की महत्त्वाकांक्षी NALSA (DAWN) योजना 2025: “नशा मुक्त भारत हेतु मादक पदार्थों के प्रति जागरूकता एवं स्वास्थ्य संवर्धन” के अंतर्गत गठित समिति के सदस्यों के लिए एक महत्वपूर्ण ओरिएंटेशन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आज फरीदाबाद में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समिति के सदस्यों को योजना के उद्देश्यों, कार्यप्रणाली और रणनीतिक कार्यान्वयन से परिचित कराना था, ताकि वे प्रभावी ढंग से ‘नशा मुक्त भारत’ के लक्ष्य में योगदान दे सकें।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-सह-सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, फरीदाबाद, श्रीमती रीतू यादव ने की, जो इस योजना के लिए नामित नोडल अधिकारी भी हैं। श्रीमती यादव ने बताया कि यह योजना माननीय श्री न्यायमूर्ति बी.आर. गवई (पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष, NALSA एवं वर्तमान भारत के मुख्य न्यायाधीश) द्वारा शुरू की गई थी। यह वर्ष 2015 की “NALSA लीगल सर्विसेज टू ड्रग एब्यूज एंड एरैडिकेशन ऑफ ड्रग मेनैस” का एक उन्नत संस्करण है, जिसे बच्चों और युवाओं में बढ़ती नशा प्रवृत्ति की समस्या और माननीय उच्चतम न्यायालय के अंकुश विपिन कपूर बनाम राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी, 2024 (INCS 986) के निर्णय के अनुपालन में विशेष रूप से तैयार किया गया है।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने योजना के उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए कहा, “हमारी योजना का लक्ष्य नशा पीड़ितों को सहायता प्रदान करना, नशा उन्मूलन हेतु जन-जागरूकता फैलाना, कानूनी सहायता और पुनर्वास सुविधा उपलब्ध कराना है।” उन्होंने समिति सदस्यों से छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, युवाओं और सामुदायिक कार्यकर्ताओं में नशे के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और पारिवारिक दुष्परिणामों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए नवाचार का उपयोग करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान मादक पदार्थों से संबंधित अपराधों की रिपोर्टिंग हेतु राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन 1933 और पोर्टल https://www.ncbmanas.gov.in की जानकारी दी गई। साथ ही, नशा पीड़ितों हेतु परामर्श व पुनर्वास सहायता के लिए हेल्पलाइन 14446 और विधिक सहायता हेतु NALSA हेल्पलाइन 15100 के बारे में भी बताया गया। ‘Say Yes to Life, No to Drugs’ नामक राष्ट्रीय ई-प्रतिज्ञा अभियान (https://www.pledge.mygov.in) को बढ़ावा देने का भी आह्वान किया गया।

मुख्य विधिक सहायता बचाव वकील रविंदर गुप्ता ने मादक पदार्थों से संबंधित कानूनों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने NDPS अधिनियम, 1985; औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940; किशोर न्याय अधिनियम, 2015 तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 का उल्लेख करते हुए कानूनी पहलुओं को स्पष्ट किया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 15(3), 21, 39(क) व 47 के संदर्भ में सरकार की जिम्मेदारी और इस योजना की संवैधानिक वैधता को भी रेखांकित किया। श्री गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि केवल पीड़ित को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार को भी मानसिक एवं सामाजिक सहयोग की आवश्यकता है।

कार्यक्रम के अंत में, त्वरित समन्वय एवं सूचना आदान-प्रदान हेतु एक व्हाट्सएप समूह के गठन की जानकारी दी गई, जो योजना के प्रभावी कार्यान्वयन में सहायक होगा। कार्यक्रम का समापन सभी सदस्यों को “नशा मुक्त समाज हेतु समर्पण एवं संवेदनशीलता के साथ कर्तव्यों के निर्वहन” का संकल्प दिलाते हुए किया गया।

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