फरीदाबाद। जिले में रैबीज के एक मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से किसी भी कुत्ते या अन्य संदिग्ध जानवर के काटने को बिल्कुल भी हल्के में न लेने की अपील की है। रैबीज एक ऐसी बीमारी है जिसे समय रहते टीकाकरण से पूरी तरह रोका जा सकता है, लेकिन एक बार इसके लक्षण विकसित हो जाएं तो मरीज को बचाना लगभग असंभव हो जाता है।
एकॉर्ड अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. मुकुंद के अनुसार रैबीज वायरस संक्रमित जानवर की लार के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है और धीरे-धीरे नसों के जरिए मस्तिष्क तक पहुंचता है। इसलिए डॉग बाइट के तुरंत बाद सही प्राथमिक उपचार और समय पर एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाना सबसे प्रभावी बचाव है। सामान्यतः संक्रमण के लक्षण कुछ सप्ताह बाद सामने आते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह एक महीने से लेकर एक वर्ष या उससे अधिक समय बाद भी प्रकट हो सकते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि घाव कितना गहरा है, शरीर के किस हिस्से पर काटा गया है और व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कैसी है। शुरुआती लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, शरीर में दर्द, बेचैनी और काटे गए स्थान पर झुनझुनी या जलन महसूस हो सकती है। संक्रमण बढ़ने पर वायरस मस्तिष्क और स्पाइनल कॉर्ड को प्रभावित करता है, जिससे मरीज में पानी से डर लगना, निगलने में कठिनाई, दौरे, लकवा और अंततः मृत्यु तक हो सकती है।
डॉ. मुकुंद ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को पालतू कुत्ता भी काट ले तो केवल यह सोचकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए कि उसे पहले से वैक्सीन लगी हुई है। पशु का टीकाकरण जोखिम को कम जरूर करता है, लेकिन काटने के बाद डॉक्टर से सलाह लेकर एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाना आवश्यक है। यदि घाव गहरा हो या चेहरे, गर्दन अथवा हाथ जैसे संवेदनशील हिस्सों पर काटा गया हो तो एंटी रैबीज वैक्सीन के साथ रैबीज इम्यूनोग्लोब्युलिन (RIG) की भी आवश्यकता पड़ सकती है।
उन्होंने कहा, “रैबीज एक सौ प्रतिशत रोकी जा सकने वाली बीमारी है, लेकिन लक्षण विकसित होने के बाद इसका कोई प्रभावी इलाज नहीं है। इसलिए किसी भी जानवर के काटने को हल्के में न लें। तुरंत घाव को साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोएं और बिना देरी किए अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार पूरा वैक्सीनेशन कोर्स पूरा करें। समय पर लगाया गया टीका जान बचा सकता है।”
डॉग बाइट के बाद घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोएं।
घाव पर मिर्च, हल्दी, तेल या अन्य घरेलू पदार्थ न लगाएं।
बिना देरी किए नजदीकी सरकारी या निजी अस्पताल पहुंचें।
डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटी रैबीज वैक्सीन की सभी डोज समय पर पूरी करें।
गहरा घाव या चेहरे, गर्दन और हाथ पर काटने की स्थिति में रैबीज इम्यूनोग्लोब्युलिन की आवश्यकता हो सकती है।

