फरीदाबाद | 1 फरवरी 2025
हरियाणा के फरीदाबाद में साइबर ठगी के मामलों को लेकर पुलिस की सतर्कता लगातार बनी हुई है। इसी क्रम में प्रीपेड टेलीग्राम टास्क के नाम पर 2,79,000 रुपये की ठगी के एक मामले में साइबर थाना बल्लभगढ़ की टीम ने कार्रवाई करते हुए बैंक खाता उपलब्ध करवाने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि यह मामला ऑनलाइन जॉब स्कैम के उस पैटर्न को दर्शाता है, जिसमें आसान कमाई का लालच देकर लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जाता है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती गतिविधियों के साथ-साथ साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे नए-नए तरीकों के कारण आम नागरिकों के लिए सतर्क रहना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है। यह मामला भी उसी कड़ी का हिस्सा है, जहां सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स का दुरुपयोग कर ठगी को अंजाम दिया गया।
पार्ट टाइम जॉब के नाम पर संपर्क
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सेक्टर-7 निवासी एक महिला ने साइबर थाना बल्लभगढ़ में शिकायत दर्ज कराई थी। महिला ने बताया कि 10 फरवरी 2025 को उसके व्हाट्सएप नंबर पर एक अंजान नंबर से संदेश आया। संदेश में पार्ट टाइम जॉब का ऑफर दिया गया था, जिसमें घर बैठे ऑनलाइन टास्क पूरा कर कमाई करने का दावा किया गया।
शुरुआत में काम बेहद आसान बताया गया, जिससे पीड़िता को किसी तरह का संदेह नहीं हुआ। आरोपी पक्ष ने भरोसा जीतने के लिए पहले छोटे टास्क कराए, ताकि सामने वाले को यह लगे कि ऑफर वास्तविक है।
लिंक, रेटिंग और टेलीग्राम ग्रुप
शिकायत के अनुसार, महिला को व्हाट्सएप पर एक लिंक भेजा गया, जिसमें किसी प्लेटफॉर्म पर 5-स्टार रेटिंग देने के लिए कहा गया। यह प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे एक टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ दिया गया।
ग्रुप में मौजूद लोग खुद को टीम सदस्य या सपोर्ट स्टाफ बताकर लगातार यह भरोसा दिलाते रहे कि टास्क पूरा करने पर निश्चित लाभ मिलेगा। इसी दौरान प्रीपेड टेलीग्राम टास्क के नाम पर निवेश करने को कहा गया।
अलग-अलग ट्रांजेक्शन में निवेश
आरोप है कि ठगों ने महिला से अलग-अलग चरणों में कुल 2,79,000 रुपये विभिन्न ट्रांजेक्शन के माध्यम से जमा करवा लिए। हर बार यह कहा गया कि अगला टास्क पूरा होने के बाद पिछली राशि के साथ मुनाफा भी मिलेगा।
हालांकि, जब महिला ने अपनी जमा राशि और वादा किया गया लाभ वापस मांगा, तो उसे कोई जवाब नहीं मिला। कुछ ही समय बाद संबंधित टेलीग्राम और व्हाट्सएप अकाउंट्स से उसे ब्लॉक कर दिया गया। इसके बाद पीड़िता को ठगी का अहसास हुआ और उसने पुलिस से संपर्क किया।
मामला दर्ज, जांच शुरू
पीड़िता की शिकायत के आधार पर साइबर थाना बल्लभगढ़ में संबंधित धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने जांच के दौरान बैंक खातों, ट्रांजेक्शन डिटेल्स और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया।
जांच में सामने आया कि ठगी की राशि जिन खातों में भेजी गई थी, उनमें से एक खाता इस मामले में अहम कड़ी साबित हुआ। इसी आधार पर पुलिस ने आगे की कार्रवाई की।
खाता उपलब्ध करवाने वाले आरोपी की गिरफ्तारी
पुलिस पूछताछ में यह सामने आया कि आरोपी विक्की, निवासी गांव सोलहा, जिला महेंद्रगढ़ (वर्तमान पता: शिवसिंहपुरा, जिला सीकर, राजस्थान), ने ठगों को बैंक खाता उपलब्ध करवाने में भूमिका निभाई थी।
जांच के अनुसार, यह खाता आरोपी हिमांशु से लिया गया था, जिसमें ठगी की रकम में से 1,16,400 रुपये जमा हुए थे। पुलिस ने बताया कि आरोपी हिमांशु को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और मामले की कड़ी जोड़ते हुए विक्की को भी हिरासत में लिया गया।
अदालत में पेशी और रिमांड
गिरफ्तारी के बाद आरोपी विक्की को माननीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 2 दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि रिमांड के दौरान आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ठगी से जुड़े अन्य लोग कौन हैं और पैसा आगे कहां ट्रांसफर किया गया।
अधिकारियों के अनुसार, साइबर ठगी के मामलों में खाताधारक या खाता उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर अपना खाता ऐसे कार्यों के लिए देता है, तो उसे भी कानून के तहत जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
साइबर ठगी के सामान्य तरीके
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की ठगी में अक्सर एक तय पैटर्न देखने को मिलता है, जैसे:
अनजान नंबर से जॉब ऑफर
आसान टास्क और त्वरित कमाई का लालच
टेलीग्राम या अन्य ऐप पर ग्रुप में जोड़ना
निवेश बढ़ाने के लिए लगातार दबाव बनाना
इन सभी तरीकों का उद्देश्य लोगों का भरोसा जीतकर उनसे पैसे ट्रांसफर करवाना होता है।
पुलिस की अपील: सतर्क रहें
फरीदाबाद पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे वर्क फ्रॉम होम, पार्ट टाइम जॉब या प्रीपेड टास्क जैसे ऑनलाइन ऑफर्स के प्रति सतर्क रहें।
किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें
बिना सत्यापन के पैसे ट्रांसफर न करें
अपने बैंक या ओटीपी संबंधी जानकारी साझा न करें
यदि किसी को साइबर ठगी का संदेह हो, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
यह मामला इस बात का उदाहरण है कि डिजिटल दुनिया में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ा नुकसान कर सकती है। समय पर की गई शिकायत और सही जानकारी साझा करने से न केवल पीड़ित को राहत मिल सकती है, बल्कि ऐसे अपराधों पर भी अंकुश लगाया जा सकता है।
पुलिस का कहना है कि साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे।

