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संवाददाता – Vishnu Ojha (Journalist)

उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जारी शीतलहर और गिरते तापमान का असर अब रबी फसलों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। फरीदाबाद जिले में लगातार बढ़ रही ठंड के बीच किसानों के लिए फसल सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. बाबू लाल ने किसानों को समय रहते आवश्यक प्रबंधन उपाय अपनाने की सलाह दी है।

उन्होंने कहा कि अत्यधिक ठंड, शीतलहर और पाले की स्थिति में यदि सावधानी न बरती जाए, तो फसलों में अनेक प्रकार की बीमारियां फैल सकती हैं, जिससे न केवल उत्पादन प्रभावित होता है, बल्कि गुणवत्ता और भंडारण क्षमता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।


अत्यधिक ठंड से फसलों में बढ़ता रोग प्रकोप

डॉ. बाबू लाल ने जानकारी देते हुए बताया कि अधिक ठंड और नमी की स्थिति में फसलों में काली रतुआ, सफेद रतुआ, लेट ब्लाइट जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ये रोग विशेष रूप से गेहूं, सरसों, आलू और सब्जी फसलों में तेजी से फैलते हैं।

उन्होंने कहा कि इन रोगों का सीधा असर फसलों के अंकुरण, पौधों की वृद्धि, पुष्पण और अंततः उपज पर पड़ता है। इसके साथ-साथ कटाई के बाद भंडारण के दौरान भी फसल की गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।


शीतलहर का समग्र उत्पादकता पर प्रभाव

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, शीतलहर केवल फसल की ऊपरी सतह को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि पौधों की जड़ प्रणाली, पोषक तत्वों के अवशोषण और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया पर भी नकारात्मक असर डालती है।

डॉ. बाबू लाल ने कहा कि यदि समय पर प्रबंधन न किया जाए, तो शीतलहर फसलों की समग्र उत्पादकता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। इसलिए किसानों को मौसम की जानकारी पर लगातार नजर रखते हुए अग्रिम तैयारी करनी चाहिए।


रासायनिक एवं पोषक तत्व प्रबंधन की सलाह

शीतलहर से बचाव और फसल रोगों की रोकथाम के लिए डॉ. बाबू लाल ने किसानों को वैज्ञानिक तरीके अपनाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि:

  • बोर्डो मिश्रण या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का संतुलित मात्रा में छिड़काव करने से फंगल रोगों पर नियंत्रण पाया जा सकता है

  • इसके साथ फास्फोरस और पोटेशियम का प्रयोग करने से जड़ों का विकास बेहतर होता है

  • मजबूत जड़ प्रणाली ठंड के प्रभाव को सहन करने में फसल की मदद करती है

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी रसायन का प्रयोग कृषि विभाग की सिफारिशों के अनुसार ही करें।


सिंचाई प्रबंधन से मिलेगी ठंड से राहत

डॉ. बाबू लाल ने सिंचाई प्रबंधन को शीतलहर से बचाव का महत्वपूर्ण उपाय बताया। उन्होंने कहा कि:

  • शीतलहर के दौरान हल्की लेकिन बार-बार सतही सिंचाई लाभकारी रहती है

  • जहां संभव हो, वहां स्प्रिंकलर सिंचाई का प्रयोग करना चाहिए

  • सिंचाई से खेत की मिट्टी का तापमान संतुलित रहता है, जिससे पाले का प्रभाव कम होता है

हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अत्यधिक पानी भराव से बचें, क्योंकि इससे रोगों का खतरा और बढ़ सकता है।


फसल चयन और खेती की रणनीति

उपनिदेशक ने किसानों को भविष्य की योजना के तहत ठंड सहनशील किस्मों की खेती अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि:

  • ठंड एवं पाला प्रतिरोधी किस्मों का चयन करना चाहिए

  • बागवानी फसलों में अंतर-फसली खेती अपनाएं

  • सब्जियों में मिश्रित खेती से जोखिम कम होता है

  • खेतों के किनारों पर सरसों और अरहर जैसी लंबी फसलों को लगाने से ठंडी हवाओं से प्राकृतिक सुरक्षा मिलती है

यह उपाय विशेष रूप से खुले और हवा-प्रभावित क्षेत्रों में कारगर साबित होते हैं।


नर्सरी और छोटे पौधों की विशेष सुरक्षा

डॉ. बाबू लाल ने नर्सरी और छोटे पौधों को शीतलहर से बचाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि:

  • नर्सरी को प्लास्टिक शीट या ढक्कन से ढकें

  • पुआल या सरकंडा घास से बनी छप्पर व्यवस्था अपनाएं

  • जैविक मल्चिंग से मिट्टी की नमी और तापमान संतुलित रहता है

इन उपायों से पौधों की शुरुआती अवस्था में होने वाला नुकसान काफी हद तक कम किया जा सकता है।


विंड ब्रेक और आश्रय बेल्ट का महत्व

तेज ठंडी हवाएं फसलों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाती हैं। इस संदर्भ में डॉ. बाबू लाल ने किसानों को विंड ब्रेक और आश्रय बेल्ट लगाने की सलाह दी।

उन्होंने बताया कि खेतों के चारों ओर पेड़-पौधों या अस्थायी संरचनाओं के माध्यम से हवा की गति को कम किया जा सकता है। इससे पाले और ठंडी हवाओं का सीधा असर फसलों पर नहीं पड़ता।


किसानों से अपील: सतर्कता और समय पर कार्रवाई

डॉ. बाबू लाल ने किसानों से अपील की कि वे मौसम पूर्वानुमान पर नियमित नजर रखें और किसी भी असामान्य स्थिति में कृषि विभाग या नजदीकी कृषि अधिकारी से संपर्क करें।

उन्होंने कहा कि सही समय पर उठाए गए छोटे-छोटे कदम बड़े नुकसान से बचा सकते हैं। शीतलहर कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन वैज्ञानिक प्रबंधन के अभाव में यह नुकसानदेह बन जाती है।


निष्कर्ष

फरीदाबाद जिले में बढ़ती ठंड और शीतलहर के बीच कृषि विभाग की यह सलाह किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अत्यधिक ठंड से फसलों में रोगों का खतरा बढ़ता है, लेकिन समय पर सही प्रबंधन अपनाकर नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। डॉ. बाबू लाल द्वारा सुझाए गए वैज्ञानिक और व्यावहारिक उपाय किसानों को फसलों की सुरक्षा, उत्पादन और गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करेंगे। सतर्कता, सही जानकारी और समय पर कार्रवाई ही शीतलहर से बचाव की सबसे प्रभावी रणनीति है।

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