स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने समझाया गजानन के स्वरूप का रहस्य
फरीदाबाद। श्री लक्ष्मीनारायण दिव्यधाम, श्री सिद्धदाता आश्रम में गणेश चतुर्थी का पावन पर्व अपार श्रद्धा और उल्लास के वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान श्री गणेश के दिव्य विग्रह का पंचामृत अभिषेक एवं विशेष पूजन संपन्न हुआ। अनुष्ठान के उपरांत भक्तों को आशीर्वचन देते हुए पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने कहा कि सभी प्रकार के विघ्नों का हरण करने वाले श्री गणेश प्रथम पूज्य देव हैं। वे देवाधिदेव महादेव के अंश होने के साथ-साथ सृष्टि के प्रथम संपादक भी हैं, जिन्होंने महर्षि वेदव्यास के मुख से उच्चारित गूढ़ वैदिक ग्रंथों को अपनी लेखनी से लिपिबद्ध कर मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया।
स्वामी जी ने श्रद्धालुओं को भगवान गणेश के अद्वितीय स्वरूप से मिलने वाली व्यावहारिक जीवन की प्रेरणाओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि गजानन का हर अंग मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाता है। उनकी लंबी सूंड निरंतर सजग रहकर चारों ओर के वातावरण को परखने का संकेत देती है, तो वहीं उनके विशाल कान यह सिखाते हैं कि व्यक्ति को प्रत्येक छोटी-बड़ी बात को धैर्य और एकाग्रता से सुनना चाहिए। भगवान का विशाल उदर सहनशीलता और बातों को पचाने की क्षमता का प्रतीक है, जबकि उनका विशालकाय शरीर और सूक्ष्म आंखें यह प्रेरणा देती हैं कि व्यक्ति को असीम शक्ति पाकर भी अहंकार नहीं करना चाहिए, बल्कि सदा विनम्र और अंतर्मुखी रहना चाहिए।
पूजन के समापन पर महाराजश्री ने आश्रम पहुंचे श्रद्धालुओं को प्रसाद और आशीर्वाद प्रदान किया। उल्लेखनीय है कि श्री लक्ष्मीनारायण दिव्यधाम में प्रत्येक वैदिक पर्व अत्यंत भव्य रूप से आयोजित किया जाता है। जन-जन में यह अटूट आस्था है कि आश्रम परिसर की परिक्रमा करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, जिसके चलते यहां वर्षभर भक्तों का तांता लगा रहता है। इसके साथ ही यह पावन धाम अध्यात्म के साथ-साथ विविध सामाजिक और परोपकारी गतिविधियों के माध्यम से भी निरंतर समाज सेवा में समर्पित है।

