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फरीदाबाद 23-02-25

फरीदाबाद में बौद्धिक दिव्यांग एथलीटों के लिए हॉकी को प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में औपचारिक रूप से शुरू किया गया। यह पहल स्पेशल ओलंपिक्स भारत द्वारा की गई, जिसके तहत देशभर में इस खेल को शामिल करने की घोषणा की गई है। ग्रेटर फरीदाबाद स्थित श्रीराम मिलेनियम स्कूल परिसर में आयोजित कार्यक्रम में स्पेशल ओलंपिक्स भारत की अध्यक्षा डॉ. मल्लिका नड्डा और केन्द्रीय राज्यमंत्री चौधरी कृष्णपाल गुर्जर ने संयुक्त रूप से इस पहल का शुभारंभ किया।

कार्यक्रम के दौरान जानकारी दी गई कि 26 फरवरी तक चलने वाली प्रतियोगिता में देश के विभिन्न राज्यों से आई टीमें भाग ले रही हैं। इनमें आंध्र प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की टीमें शामिल हैं। आयोजन का उद्देश्य बौद्धिक दिव्यांग खिलाड़ियों को संगठित खेल मंच उपलब्ध कराना और प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण में भागीदारी का अवसर देना बताया गया।

डॉ. मल्लिका नड्डा ने कार्यक्रम में कहा कि स्पेशल ओलंपिक्स भारत एक राष्ट्रीय खेल महासंघ है, जिसे स्पेशल ओलंपिक्स इंक., यूएसए द्वारा मान्यता प्राप्त है। यह संगठन देशभर में बौद्धिक दिव्यांग बच्चों और वयस्कों के लिए खेल एवं विकास कार्यक्रम संचालित करता है। उन्होंने बताया कि इसे भारत सरकार के युवा मामले और खेल मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय खेल महासंघ के रूप में मान्यता प्राप्त है। उनके अनुसार हॉकी को शामिल किया जाना विशेष एथलीटों के लिए खेल अवसरों का विस्तार है।

उन्होंने कहा कि टीम खेल के रूप में हॉकी संचार, समन्वय और रणनीतिक सोच जैसे कौशल विकसित करने में सहायक हो सकती है। कार्यक्रम के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि खेल गतिविधियां सामाजिक सहभागिता और आत्मविश्वास बढ़ाने में भूमिका निभाती हैं। डॉ. नड्डा ने कहा कि यह पहल बौद्धिक दिव्यांग एथलीटों के लिए संरचित प्रतियोगिता का मंच तैयार करने की दिशा में एक कदम है।

कार्यक्रम में उपस्थित केन्द्रीय राज्यमंत्री चौधरी कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि विशेष एथलीटों के लिए खेल अवसरों का विस्तार समावेशी खेल वातावरण की दिशा में महत्वपूर्ण है। उन्होंने आयोजन से जुड़े प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और प्रतियोगिता के अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की पहल खिलाड़ियों को अपनी क्षमताएं प्रदर्शित करने का अवसर देती है।

आयोजन के दौरान यह जानकारी दी गई कि राज्य स्तर पर खेल अवसंरचना और प्रशिक्षण सुविधाओं को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हरियाणा सरकार के खेल विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए सहयोग का भी उल्लेख किया गया। बताया गया कि खेल परिसरों के विकास और पुरस्कार योजनाओं जैसी व्यवस्थाओं से खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिलता है।

स्पेशल ओलंपिक्स भारत की ओर से यह भी बताया गया कि हॉकी को प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में शामिल करने से हजारों एथलीटों को भागीदारी का अवसर मिलेगा। प्रतियोगिता के माध्यम से विभिन्न राज्यों के खिलाड़ी एक मंच पर एकत्रित होकर अनुभव साझा कर सकेंगे। आयोजन में खेल भावना, अनुशासन और टीम वर्क पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित अन्य अतिथियों में स्पेशल ओलंपिक्स भारत हरियाणा की अध्यक्षा लतिका शर्मा, महापारै प्रवीण बतरा जोशी, पूर्व मंत्री सीमा त्रिखा, हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया, मानव रचना एजुकेशन संस्थान से डॉ. अमित भल्ला, वरिष्ठ उपप्रधान संजय आहूजा, दिल्ली पब्लिक स्कूल सेक्टर-19 की प्रधानाचार्य कु. संगीता चक्रवर्ती, श्रीराम मॉडल स्कूल की डायरेक्टर कु. अंतरा सिंह, जिला उपाध्यक्ष गोल्डी अरोड़ा, महामंत्री शोभित अरोड़ा तथा अन्य प्रतिनिधि शामिल रहे।

आयोजन के दौरान खिलाड़ियों ने अभ्यास सत्र में भाग लिया और टीमों का परिचय कराया गया। प्रतियोगिता की रूपरेखा और नियमों की जानकारी भी साझा की गई। आयोजकों ने बताया कि प्रतियोगिता का उद्देश्य केवल पदक वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धात्मक अनुभव प्रदान करना और खेलों के माध्यम से समावेशिता को बढ़ावा देना है।

विशेषज्ञों के अनुसार खेल गतिविधियां शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक और सामाजिक विकास में भी योगदान देती हैं। टीम खेलों के माध्यम से सहयोग, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता विकसित होती है। बौद्धिक दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए संरचित खेल अवसर उपलब्ध कराना उन्हें मुख्यधारा खेल संस्कृति से जोड़ने का माध्यम बन सकता है।

कार्यक्रम के समापन पर खिलाड़ियों और आयोजकों ने आगामी प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं। प्रतियोगिता 26 फरवरी तक जारी रहेगी, जिसके दौरान विभिन्न राज्यों की टीमें निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मैच खेलेंगी। आयोजन से जुड़े प्रतिनिधियों ने कहा कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि खेलों के माध्यम से समावेशी वातावरण को प्रोत्साहित किया जा सके।

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