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फरीदाबाद, 01 फरवरी।

39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला—2026 में दूसरे दिन मेले का माहौल पूरी तरह लोक रंगों में रंगा नजर आया। 15 फरवरी तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में रविवार को हजारों की संख्या में देश-विदेश से पर्यटक पहुंचे। मेला परिसर में जहां एक ओर स्वदेशी उत्पादों की विविधता, पारंपरिक हस्तशिल्प और लोक कलाओं ने लोगों का ध्यान खींचा, वहीं हरियाणा की लोक संस्कृति से जुड़ी बीन व नगाड़ा पार्टियों ने आगंतुकों का पारंपरिक अंदाज में जोरदार स्वागत किया।


लोक संगीत से गूंज उठा मेला परिसर

लोकल टू ग्लोबल – आत्मनिर्भर भारत की पहचान’ थीम पर आयोजित इस शिल्प मेले में संस्कृति और परंपरा का जीवंत स्वरूप देखने को मिल रहा है। मेला परिसर के विभिन्न प्रवेश मार्गों और प्रमुख स्थलों पर बीन व नगाड़ा पार्टी के कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में अपनी प्रस्तुति दे रहे हैं। नगाड़े की गूंज और बीन की मधुर धुन सुनते ही पर्यटक ठहरकर इस लोक संगीत का आनंद लेते नजर आए।


युवाओं और विदेशी पर्यटकों में दिखा उत्साह

बीन और नगाड़े की थाप पर युवाओं के कदम खुद-ब-खुद थिरकने लगे। कई युवा पारंपरिक धुनों पर नाचते दिखाई दिए, वहीं विदेशी पर्यटक भी इस लोक संगीत से खासे प्रभावित नजर आए। कलाकारों द्वारा—

  • नगाड़ा

  • बीन

  • झांझ

  • ढप

  • खंजरी

  • खड़ताल

  • चिमटा

जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों का प्रयोग कर प्रस्तुतियां दी जा रही हैं, जिन्हें देखकर और सुनकर पर्यटक झूमने को मजबूर हो रहे हैं।


परंपरा और मनोरंजन का अनोखा संगम

बीन व नगाड़ा पार्टी की प्रस्तुतियां केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह हरियाणा की समृद्ध लोक विरासत को भी दर्शाती हैं। कलाकारों की तालबद्ध प्रस्तुति मेला परिसर में उत्सव का माहौल बना रही है। इन प्रस्तुतियों के दौरान कई पर्यटक वीडियो और तस्वीरें लेते भी नजर आए, जिससे लोक संस्कृति का यह रूप डिजिटल माध्यमों से भी लोगों तक पहुंच रहा है।


मेले की पहचान को मजबूत करती लोक कला

सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला वर्षों से भारतीय हस्तशिल्प, लोक कलाओं और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रमुख मंच रहा है। बीन व नगाड़ा पार्टी जैसी प्रस्तुतियां मेले की पहचान को और मजबूत करती हैं और आगंतुकों को क्षेत्रीय संस्कृति से जोड़ने का कार्य करती हैं।

पर्यटन विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की लोक प्रस्तुतियां—

  • मेले को जीवंत बनाती हैं

  • पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति से जोड़ती हैं

  • शिल्प और संस्कृति के अनुभव को समृद्ध करती हैं


पर्यटकों के लिए यादगार अनुभव

मेला परिसर में दिनभर शिल्पकारों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों, हथकरघा वस्त्रों और पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लेने के बाद लोक संगीत की यह प्रस्तुतियां पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बनी हुई हैं। बीन और नगाड़े की धुन पर झूमते कलाकार और पर्यटक मिलकर सूरजकुंड मेले को एक उत्सव का रूप दे रहे हैं।

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