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संवाददाता – Divyanshu Ojha (Journalist)

हरियाणा के फरीदाबाद जिले में आयोजित होने वाले सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय क्राफ्ट मेला–2026 को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज़ हो चुकी हैं। इस बार मेला केवल कला, संस्कृति और हस्तशिल्प तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विशेष रूप से बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को लेकर मेला प्रशासन ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य बच्चों को किसी भी प्रकार के शोषण, जोखिम और अवैध गतिविधियों से बचाना है।

बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता

मेला प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, मेला परिसर और उसके आसपास बच्चों द्वारा भीख मांगने, खतरनाक करतब दिखाने या किसी भी प्रकार के श्रम में शामिल होने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। यह निर्णय बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि मेला एक सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में संपन्न हो सके।

प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि किसी भी परिस्थिति में बच्चों को आय के साधन के रूप में उपयोग करना कानूनन अपराध है। यदि कोई व्यक्ति या समूह बच्चों को इस प्रकार की गतिविधियों में शामिल करता हुआ पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

बाल अधिकार संरक्षण से जुड़े दिशा-निर्देश लागू

मेला प्रवक्ता के अनुसार, यह निर्णय हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी सार्वजनिक आयोजन में बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन न हो और उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जाए।

यदि मेला क्षेत्र में या उसके आसपास कोई बच्चा भीख मांगता हुआ, खतरनाक गतिविधियों में लिप्त या किसी भी तरह के शोषण का शिकार पाया जाता है, तो संबंधित विभाग तुरंत हस्तक्षेप करेगा। ऐसे मामलों में बाल कल्याण समिति और जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा संयुक्त रूप से आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

कानून के दायरे में सख्त कार्रवाई

जारी निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बच्चों से भीख मंगवाना, उनसे जोखिमपूर्ण करतब करवाना या उन्हें किसी भी प्रकार के श्रम के लिए मजबूर करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 और बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन ने यह भी निर्देश दिए हैं कि मेला परिसर में तैनात अधिकारी, पुलिसकर्मी और मेला प्रबंधन से जुड़े सभी कर्मचारी इस बात पर विशेष नजर रखें कि बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन न हो।

मेला कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए स्पष्ट निर्देश

मेला प्रशासन द्वारा सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को लिखित एवं मौखिक निर्देश जारी किए गए हैं। इनमें मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं पर जोर दिया गया है:

  • किसी भी बच्चे से भीख मंगवाने की अनुमति नहीं होगी

  • बच्चों से किसी प्रकार के खतरनाक या अवैध करतब नहीं करवाए जाएंगे

  • बच्चों को काम करने या पैसा कमाने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा

  • संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत उच्च अधिकारियों को सूचना दी जाएगी

इन निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

शिकायत के लिए हेल्पलाइन व्यवस्था

मेला प्रशासन ने आम नागरिकों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया है। यदि कोई व्यक्ति मेला परिसर या उसके आसपास बच्चों से जुड़ा कोई अधिकार उल्लंघन देखता है, तो वह तुरंत संबंधित हेल्पलाइन नंबरों पर सूचना दे सकता है।

इसके लिए 1098 (चाइल्ड हेल्पलाइन) और 112 (आपातकालीन सेवा) नंबर सक्रिय रहेंगे। इसके अतिरिक्त, हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा मेला परिसर में गेट नंबर–2 पर विशेष स्टॉल भी लगाया जाएगा, जहां नागरिक सीधे संपर्क कर सकते हैं।

आमजन से सहयोग की अपील

प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे बच्चों को भीख देने के बजाय संबंधित अधिकारियों को सूचना दें। भीख देने से बच्चों की समस्या का समाधान नहीं होता, बल्कि यह उन्हें उसी स्थिति में बनाए रखता है। इसके बजाय सही सूचना देकर बच्चों को सुरक्षित भविष्य की ओर ले जाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

मेला प्रशासन का मानना है कि यदि नागरिक सजग और जिम्मेदार बनें, तो बच्चों के शोषण जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

सामाजिक दृष्टिकोण से अहम पहल

विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के बड़े आयोजनों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाना बेहद आवश्यक है। इससे न केवल बच्चों के अधिकार सुरक्षित रहते हैं, बल्कि समाज में जागरूकता भी बढ़ती है। यह पहल यह संदेश देती है कि मनोरंजन और व्यापार के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय क्राफ्ट मेला–2026 के दौरान बच्चों की सुरक्षा को लेकर जारी किए गए ये दिशा-निर्देश एक सकारात्मक और जिम्मेदार पहल माने जा रहे हैं। भीख मांगने और खतरनाक करतबों पर रोक से बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा और मेला परिसर में अनुशासन एवं संवेदनशीलता बनी रहेगी। यह कदम न केवल कानून के पालन की दिशा में अहम है, बल्कि समाज को बच्चों के अधिकारों के प्रति सजग बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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