फरीदाबाद, 04 फरवरी 2026
फरीदाबाद में आयोजित 39वें सूरजकुंड इंटरनेशनल आत्मनिर्भर क्राफ्ट फेस्टिवल में इस वर्ष शिल्प, कला और संस्कृति के साथ-साथ स्वच्छता और साफ-सफाई को भी प्रमुख प्राथमिकता दी जा रही है। मेला परिसर को स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन और हरियाणा पर्यटन विभाग द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पर्यटकों और कारीगरों दोनों को बेहतर और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, मेले की व्यवस्थाओं में स्वच्छता को केवल औपचारिक जिम्मेदारी के रूप में नहीं, बल्कि समग्र अनुभव का अहम हिस्सा माना गया है। इसी सोच के तहत मेले के हर हिस्से में साफ-सफाई की ठोस व्यवस्था लागू की गई है।
मेले में स्वच्छता को क्यों दिया जा रहा है महत्व
सूरजकुंड मेला देश-विदेश से आने वाले लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है। बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही के कारण साफ-सफाई बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होती है। इसी कारण प्रशासन ने शुरुआत से ही स्वच्छता को केंद्र में रखकर योजना तैयार की है।
स्वच्छ वातावरण न केवल मेले की सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि आगंतुकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से भी सीधे जुड़ा होता है। इसलिए इस बार स्वच्छता को एक अलग स्तर पर ले जाने का प्रयास किया गया है।
प्रवेश द्वार और मुख्य मार्गों पर नियमित सफाई
मेला परिसर के सभी प्रवेश द्वारों, मुख्य मार्गों और स्टॉल क्षेत्रों में नियमित रूप से सफाई कराई जा रही है। इसके लिए सफाई कर्मचारियों की विशेष टीमें तैनात की गई हैं, जो पूरे दिन अलग-अलग क्षेत्रों में निगरानी करती रहती हैं।
इसके अलावा, भीड़भाड़ वाले स्थानों पर अतिरिक्त सफाई कर्मियों की व्यवस्था की गई है। इससे कचरा जमा होने से पहले ही उसे साफ कर लिया जाता है। परिणामस्वरूप, पर्यटकों को हर समय साफ और व्यवस्थित वातावरण मिलता है।
कचरा प्रबंधन की बेहतर व्यवस्था
मेले में कचरा प्रबंधन को लेकर विशेष योजना बनाई गई है। जगह-जगह डस्टबिन और कचरा संग्रहण केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन डस्टबिन को इस तरह रखा गया है कि आगंतुकों को कचरा फेंकने में आसानी हो।
इसके साथ ही सफाई कर्मियों को निर्देश दिए गए हैं कि डस्टबिन नियमित अंतराल पर खाली किए जाएं। इससे कचरे के ढेर बनने की स्थिति नहीं आती। यह व्यवस्था मेले की स्वच्छ छवि बनाए रखने में मदद कर रही है।
पर्यावरण के अनुकूल सामग्री पर जोर
मेला अथॉरिटी द्वारा कारीगरों और दुकानदारों को पर्यावरण के अनुकूल सामग्री के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्लास्टिक के उपयोग को सीमित रखने और वैकल्पिक सामग्री अपनाने पर जोर दिया गया है।
इसके अलावा, कई स्टॉल संचालकों ने भी स्वेच्छा से पर्यावरण हितैषी विकल्प अपनाए हैं। इससे न केवल कचरा कम हो रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी प्रसारित हो रहा है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत जागरूकता
मेले में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े संदेश भी प्रदर्शित किए गए हैं। मेला परिसर में पोस्टर और सूचना बोर्ड लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से लोगों को साफ-सफाई के महत्व के बारे में बताया जा रहा है।
इन संदेशों का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं है, बल्कि आगंतुकों को स्वच्छता अभियान में भागीदार बनाना भी है। इससे लोगों में जिम्मेदारी की भावना विकसित हो रही है।
शौचालयों की साफ-सफाई और सैनिटाइजेशन
मेले में बनाए गए शौचालयों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन शौचालयों की नियमित रूप से सफाई की जा रही है और समय-समय पर सैनिटाइजेशन भी किया जा रहा है।
इस व्यवस्था का लाभ खास तौर पर परिवार के साथ आने वाले पर्यटकों को मिल रहा है। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग आगंतुक इस सुविधा को लेकर संतोष व्यक्त कर रहे हैं। साफ-सुथरे शौचालय मेले के अनुभव को अधिक आरामदायक बनाते हैं।
पीने के पानी के आसपास स्वच्छता
मेले में पीने के पानी की व्यवस्था के आसपास भी स्वच्छता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। पानी के स्टॉल और टैंकों के आसपास नियमित सफाई कराई जा रही है, ताकि किसी प्रकार की गंदगी न फैले।
इससे आगंतुकों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है। प्रशासन का मानना है कि स्वास्थ्य से जुड़ी ऐसी सुविधाओं में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
पर्यटकों की प्रतिक्रिया
मेले में आने वाले पर्यटक स्वच्छता व्यवस्था की खुले तौर पर सराहना कर रहे हैं। कई आगंतुकों का कहना है कि साफ-सुथरा माहौल मेले को और आकर्षक बनाता है।
पर्यटकों के अनुसार, जब वातावरण स्वच्छ होता है, तो लोग अधिक समय तक मेले में रुकना पसंद करते हैं। इससे न केवल मनोरंजन बढ़ता है, बल्कि कारीगरों और दुकानदारों को भी लाभ मिलता है।
परिवारों के लिए बेहतर अनुभव
परिवार के साथ मेले में आने वाले दर्शकों के लिए यह व्यवस्था खास तौर पर उपयोगी साबित हो रही है। बच्चों और बुजुर्गों के साथ घूमने में साफ-सफाई एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
स्वच्छ रास्ते, साफ शौचालय और व्यवस्थित परिसर परिवारों को सुरक्षित महसूस कराते हैं। यही कारण है कि इस बार मेले में परिवारों की संख्या भी अधिक देखने को मिल रही है।
प्रशासन और जनता का सहयोग
मेला अथॉरिटी का कहना है कि सूरजकुंड मेला केवल कला और संस्कृति का उत्सव नहीं है। यह स्वच्छता, अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देता है।
जिला प्रशासन द्वारा की जा रही व्यवस्थाओं के साथ-साथ आम जनता का सहयोग भी अहम है। जब आगंतुक स्वयं कचरा न फैलाने और नियमों का पालन करने का प्रयास करते हैं, तो व्यवस्था और मजबूत होती है।
निरंतर निगरानी और सुधार
स्वच्छता व्यवस्था को बनाए रखने के लिए निरंतर निगरानी की जा रही है। जहां भी सुधार की आवश्यकता महसूस होती है, वहां तुरंत कदम उठाए जा रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, मेला समाप्त होने तक इसी तरह की व्यवस्था जारी रहेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर दिन मेले में आने वाले पर्यटकों को समान रूप से स्वच्छ और सुरक्षित माहौल मिले।
स्वच्छता से बढ़ता मेले का आकर्षण
सूरजकुंड इंटरनेशनल क्राफ्ट फेस्टिवल अपनी कला और संस्कृति के लिए पहले से ही प्रसिद्ध है। अब स्वच्छता और सुव्यवस्था के कारण इसका आकर्षण और बढ़ रहा है।
स्वच्छ वातावरण न केवल मेले की छवि को बेहतर बनाता है, बल्कि भविष्य के आयोजनों के लिए भी एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करता है। इसी सोच के साथ प्रशासन और आयोजन समिति लगातार प्रयासरत है।

