सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र की अनूठी पहल, देशभर के स्कूलों में निःशुल्क कार्यशालाओं के माध्यम से भारतीय संगीत एवं सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ेंगे विद्यार्थी
फरीदाबाद, 1 अगस्त। विद्यार्थियों में संगीत के प्रति रुचि, सांस्कृतिक चेतना, नैतिक मूल्यों और रचनात्मक प्रतिभा के विकास के उद्देश्य से भूपानी (फरीदाबाद) स्थित सतयुग दर्शन ट्रस्ट (रजि.) द्वारा संचालित सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र ने देशभर के विद्यालयों के लिए “निःशुल्क संगीत जागरूकता एवं इंटरैक्टिव कार्यशाला” आयोजित करने की विशेष पहल की है। इस अभियान के तहत विद्यालयों में विद्यार्थियों को भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा, उसके वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक प्रभाव तथा व्यक्तित्व निर्माण में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका से परिचित कराया जाएगा।
संस्था का मानना है कि “संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, संस्कार संवर्धन और आत्मिक उन्नयन का सशक्त माध्यम है।” इसी सोच के साथ केंद्र वर्षों से विद्यार्थियों के नैतिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विकास के लिए विभिन्न शिक्षण एवं संस्कार आधारित गतिविधियों का संचालन कर रहा है, ताकि युवा पीढ़ी एक जिम्मेदार, संस्कारित एवं श्रेष्ठ नागरिक के रूप में विकसित हो सके।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की आधारभूत अवधारणाओं—स्वर, लय, ताल, सप्तक, नियमित रियाज़ का महत्व, संगीत का वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक प्रभाव, एकाग्रता, आत्मविश्वास, अनुशासन तथा संगीत के क्षेत्र में उपलब्ध विविध करियर अवसरों—की विस्तृत एवं प्रेरणादायी जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही लाइव संगीत प्रस्तुति, संवादात्मक गतिविधियों और प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय सांगीतिक विरासत, संस्कृति और मानवीय मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
संस्था के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य केवल संगीत की शिक्षा देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच, सृजनात्मक अभिव्यक्ति, सांस्कृतिक गौरव और मानवीय संवेदनाओं का विकास करना भी है। पूरी कार्यशाला विद्यालयों के लिए पूर्णतः निःशुल्क रहेगी।
सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र की वर्तमान में देशभर में 22 शाखाएं संचालित हो रही हैं। सभी केंद्र प्रयाग संगीत समिति, प्रयागराज से मान्यता प्राप्त हैं और भारतीय संगीत एवं सांस्कृतिक कलाओं के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अनुभवी एवं प्रशिक्षित शिक्षकों के मार्गदर्शन में प्रतिवर्ष हजारों विद्यार्थी संगीत की परीक्षाएं उत्तीर्ण कर प्रभाकर जैसी प्रतिष्ठित उपाधियां प्राप्त करते हैं। संस्था के अनेक विद्यार्थी आज संगीत अध्यापक, रेडियो एवं टेलीविजन कलाकार तथा विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों में सेवाएं देकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।
सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र ने देशभर के विद्यालयों के प्राचार्यों से आग्रह किया है कि वे अपने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए इस ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी कार्यशाला का आयोजन करवाएं। इच्छुक विद्यालय अपनी सुविधानुसार तिथि एवं समय निर्धारित कर संस्था से संपर्क कर अपना स्लॉट आरक्षित करा सकते हैं।

