फरीदाबाद 23-02-25
फरीदाबाद के एनआईटी क्षेत्र में स्थित पीएम श्री गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल और केंद्रीय विद्यालय नंबर-3 का सोमवार को निरीक्षण किया गया। यह निरीक्षण केंद्रीय विद्यालय संगठन के आयुक्त विकास गुप्ता द्वारा किया गया, जिसमें जिला प्रशासन की ओर से उपायुक्त आयुष सिन्हा भी उपस्थित रहे। निरीक्षण का उद्देश्य विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता, आधारभूत संरचना, तकनीकी संसाधनों के उपयोग तथा प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम श्री) योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा करना बताया गया।
निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने विद्यालय परिसर का विस्तृत भ्रमण किया। इस दौरान कक्षाओं, विज्ञान प्रयोगशालाओं, कंप्यूटर लैब, पुस्तकालय, खेल मैदान, व्यावसायिक शिक्षा प्रयोगशालाओं, स्मार्ट क्लासरूम और स्वच्छता व्यवस्था का अवलोकन किया गया। अधिकारियों ने शिक्षण पद्धति, विद्यार्थियों की भागीदारी और उपलब्ध संसाधनों के उपयोग का भी आकलन किया। निरीक्षण के दौरान प्रयोगात्मक शिक्षण, गतिविधि-आधारित अधिगम और तकनीक-सक्षम कक्षाओं पर विशेष ध्यान दिया गया।
विद्यालय भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न नवाचार मॉडल भी प्रस्तुत किए गए। छात्रों ने 3D प्रिंटर की सहायता से निर्मित माँ सरस्वती की प्रतिमा प्रदर्शित की। इसके अतिरिक्त “Frutu Scan” नामक फूड सेग्रीगेशन मशीन का प्रदर्शन किया गया, जिसे खाद्य पदार्थों के वर्गीकरण और गुणवत्ता पहचान में सहायक बताया गया। विद्यार्थियों ने ऊष्मा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करने वाला एक मॉडल भी प्रस्तुत किया, जो वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के प्रति जागरूकता दर्शाता है। “स्पोइल अलर्ट” नामक लघु स्मार्ट फ्रिज का भी प्रदर्शन किया गया, जो खाद्य पदार्थों के खराब होने से पूर्व मोबाइल पर सूचना भेजने की अवधारणा पर आधारित है। इसके साथ ही एग्रोवाइटल टैबलेट्स नामक एक प्रायोगिक उत्पाद भी प्रदर्शित किया गया, जिसे मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और पौधों की वृद्धि में सहायक बताया गया।
विद्यार्थियों के साथ संवाद के दौरान आयुक्त और उपायुक्त ने उनके प्रोजेक्ट्स के बारे में जानकारी ली। छात्रों ने अपने मॉडलों की कार्यप्रणाली और उद्देश्य समझाया। अधिकारियों ने विद्यार्थियों की वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और तकनीकी समझ पर चर्चा की। इस अवसर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती प्रौद्योगिकियों के महत्व पर भी विचार साझा किए गए। विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकसित करने पर बल दिया गया।
निरीक्षण के दौरान शिक्षकों के साथ एक बैठक सत्र भी आयोजित किया गया। बैठक में पीएम श्री योजना के उद्देश्यों—समग्र विकास, कौशल-आधारित शिक्षा, ग्रीन स्कूल अवधारणा, डिजिटल संसाधनों का उपयोग तथा 21वीं सदी के कौशल—पर चर्चा की गई। विद्यालय प्रशासन द्वारा योजना के अंतर्गत प्राप्त संसाधनों, प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण, पुस्तकालय में नई पुस्तकों के समावेश, खेल सामग्री की उपलब्धता और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के बारे में जानकारी दी गई।
विद्यालय प्रशासन ने बताया कि योजना के अंतर्गत लैब उपकरणों और डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता से विद्यार्थियों को प्रयोगात्मक शिक्षा के अवसर मिले हैं। पुस्तकालय में नई पुस्तकों के जुड़ने से पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा मिला है। खेल सामग्री और एडवेंचर कैंप जैसी गतिविधियों से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और सहभागिता बढ़ी है। कुछ शिक्षकों ने यह भी साझा किया कि कंप्यूटर साइंस, ब्यूटी एंड वेलनेस, होम साइंस जैसे विषयों में छात्रों की रुचि में वृद्धि देखी गई है।
बैठक के दौरान वित्तीय प्रबंधन, अनुदान के उपयोग और ट्रेजरी स्तर पर बिल स्वीकृति से संबंधित तकनीकी प्रक्रियाओं पर भी चर्चा की गई। संबंधित अधिकारियों ने इन बिंदुओं पर विद्यालय प्रशासन से फीडबैक लिया। यह भी बताया गया कि निरीक्षण के दौरान प्राप्त सुझावों को उच्च स्तर पर विचारार्थ भेजा जाएगा।
शैक्षणिक गुणवत्ता के संदर्भ में आधारभूत संरचना की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। निरीक्षण के दौरान कक्षाओं की व्यवस्था, डिजिटल बोर्ड, प्रोजेक्टर और इंटरनेट कनेक्टिविटी की स्थिति का भी मूल्यांकन किया गया। अधिकारियों ने स्वच्छता व्यवस्था, पेयजल सुविधा और खेल मैदान की स्थिति का भी अवलोकन किया। विद्यालय परिसर में पर्यावरण संरक्षण के उपायों और ग्रीन स्कूल अवधारणा से जुड़े प्रयासों की भी समीक्षा की गई।
कार्यक्रम के समापन पर केंद्रीय विद्यालय नंबर-3 परिसर में वृक्षारोपण किया गया। इस अवसर पर शिक्षा विभाग और विद्यालय प्रशासन से जुड़े कई अधिकारी और शिक्षक उपस्थित रहे। डिप्टी कमिश्नर केवीएस आरओ गुरुग्राम वरुण मित्रा, जिला शिक्षा अधिकारी अंशु सिंगला, सीएमजीजीए देव वत्स और शारिका सहित अन्य अधिकारी कार्यक्रम में शामिल हुए। विद्यालय के प्राचार्य और शिक्षकगण भी उपस्थित रहे।
निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने यह भी कहा कि शिक्षा प्रणाली में नवाचार और तकनीकी समावेशन वर्तमान समय की आवश्यकता है। विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखते हुए उन्हें व्यवहारिक ज्ञान, समस्या-समाधान क्षमता और रचनात्मक सोच विकसित करने के अवसर प्रदान किए जाने चाहिए। इसके लिए प्रयोगशालाओं, डिजिटल उपकरणों और व्यावसायिक शिक्षा की भूमिका महत्वपूर्ण मानी गई।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार विकसित भारत 2047 जैसे दीर्घकालिक लक्ष्यों के संदर्भ में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एक आधारभूत स्तंभ मानी जाती है। विद्यालय स्तर पर कौशल-आधारित शिक्षा, डिजिटल साक्षरता और नवाचार को प्रोत्साहन देने से विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सकता है। इस दिशा में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से संसाधन और संरचना उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
निरीक्षण के दौरान प्राप्त सुझावों और अनुभवों के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार किए जाने की संभावना जताई गई। विद्यालय प्रशासन ने भी अपने स्तर पर निरंतर सुधार की प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। अधिकारियों ने विद्यालयों में चल रही शैक्षणिक गतिविधियों का अवलोकन कर संबंधित रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ की है।
इस प्रकार एनआईटी क्षेत्र के दोनों विद्यालयों में आयोजित निरीक्षण कार्यक्रम ने शैक्षणिक ढांचे, तकनीकी समावेशन और कौशल-आधारित शिक्षा की दिशा में चल रहे प्रयासों की समीक्षा का अवसर प्रदान किया। आगे की कार्यवाही संबंधित विभागीय प्रक्रियाओं के अनुसार की जाएगी।

