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फरीदाबाद, 31 मई। विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर एकॉर्ड अस्पताल के सर्जरी विभाग के चेयरमैन डॉ. प्रबल रॉय ने युवाओं से तंबाकू और धूम्रपान से दूर रहने की अपील की है। उन्होंने बताया कि हर माह 5 से 7 युवा तंबाकू जनित कैंसर की समस्या लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि कम उम्र में बड़ों जैसा दिखने की चाह और शौक में बीड़ी-सिगरेट के धुएं के छल्ले उड़ाने की लत युवाओं को इस जानलेवा जाल में फंसा रही है।

डॉ. रॉय ने कहा कि शुरुआत में यह आदत मज़ेदार और फैशनेबल लगती है, लेकिन धीरे-धीरे यह लत बन जाती है। लोग इसे तनाव कम करने का तरीका मान लेते हैं, पर जब स्वास्थ्य पर असर दिखने लगता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। तंबाकू में मौजूद निकोटिन जैसे केमिकल शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। एक सिगरेट में लगभग 9 मिलीग्राम निकोटिन होता है, जो जलने के बाद रिएक्शन कर टार बनाता है। यह टार फेफड़ों की सतह पर जमकर उन्हें नुकसान पहुंचाता है।

तंबाकू और धूम्रपान से फेफड़े, मुंह, गले, कंठ और श्वासनली का कैंसर होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। खैनी, गुटखा और पान मसाले जैसी चीजें भी उतनी ही हानिकारक हैं। इनका असर धीरे-धीरे शरीर को अंदर से खोखला कर देता है।

बचाव के उपाय
डॉ. रॉय ने तंबाकू छोड़ने के लिए कुछ उपाय भी सुझाए। उन्होंने कहा कि इसकी मात्रा धीरे-धीरे कम करें और अपनी लत छोड़ने की बात परिजनों व दोस्तों को बताएं ताकि वे भी सहयोग करें। चाय, कॉफी, शराब जैसे उत्प्रेरक से दूरी बनाएं। तनाव की स्थिति में बाहर घूमने के बजाय कोई पसंदीदा चीज चबाएं। अपने पास तंबाकू से जुड़ी कोई वस्तु न रखें और दिन में थोड़े-थोड़े अंतराल पर पांच बार हल्का भोजन करें।

उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी सेहत को गंभीरता से लें और तंबाकू जैसे ज़हर से खुद को बचाएं, क्योंकि हर कश के साथ ज़िंदगी कम होती जा रही है।

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