-श्री लक्ष्मीनारायण दिव्यधाम, सिद्धदाता आश्रम में नवकुंडीय यज्ञ के संग मनाया गया होली महापर्व

-श्रीमद् जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य महाराज के सान्निध्य में लोकमंगल का संकल्प

फरीदाबाद/नई दिल्ली। सूरजकुंड मार्ग स्थित श्री लक्ष्मीनारायण दिव्यधाम-सिद्धदाता आश्रम में होली महापर्व श्रद्धा, भक्ति और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मनाया गया। देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना, नवकुंडीय यज्ञ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
आश्रम के अधिष्ठाता एवं श्रीरामानुज संप्रदाय की तीर्थपीठ इंद्रप्रस्थ एवं हरियाणा के पीठाधीश्वर अनंतश्री विभूषित श्रीमद् जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज के सान्निध्य में विश्व शांति, समृद्धि और लोकमंगल के लिए विशेष नवकुंडीय यज्ञ आयोजित किया गया। स्वामीजी ने वैदिक विधि-विधान से आहुति अर्पित करते हुए जनकल्याण की कामना की। आश्रम में वैकुंठवासी श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी सुदर्शनाचार्य जी महाराज द्वारा होली महापर्व पर शुरू की गई हवन की प्राचीन परंपरा को श्री स्वामी जी महाराज ने आगे बढ़ाया है। नवकुंडीय यज्ञ में दी गई आहुति से शारीरिक, दैविक और भौतिक ऊष्मा का शमन होता है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

इस अवसर पर श्रीरामानुज संप्रदाय की तीर्थपीठ इंद्रप्रस्थ एवं हरियाणा के पीठाधीश्वर अनंतश्री विभूषित श्रीमद् जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज नें अपने प्रवचन में कहा कि होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि भक्त प्रह्लाद की अटूट आस्था और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि जब अहंकार और अधर्म के प्रतीक हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र की भक्ति को रोकना चाहा, तब होलिका की अग्नि भी सच्चे भक्त का कुछ नहीं बिगाड़ सकी। यह पर्व सिखाता है कि जो ईश्वर की शरणागित पा जाते हैं, तो ईश्वर की कृपा पात्र बनता है, उसके सभी संकट स्वतः दूर हो जाते हैं।

उन्होंने कहा कि कलियुग में मनुष्य के लिए सबसे सरल और अंतिम उपाय समर्पण या शरणागति है। अपने जीवन रूपी रथ की लगाम श्रीनारायण को सौंप दें, जैसे प्रह्लाद या अर्जुन ने समर्पण किया था। जब जीवन ईश्वर को अर्पित होता है, तब सुख, शांति और समृद्धि की कमी नहीं रहती। इस अवसर पर आश्रम की वार्षिकी सुदर्शनलोक स्मारिका-2026 का विमोचन किया गया। श्रद्धालुओं के साथ शहर के गणमान्य व्यक्तियों ने स्वामी जी से आशीर्वाद प्राप्त किया। कुछ श्रद्धालुओं ने श्रीनारायण गौशाला में गाय पूजन के बाद पारंपरिक होली खेली और भोजन प्रसाद ग्रहण किया। आश्रम की परिक्रमा मार्ग पर एक दर्जन छबीलों में प्रसाद वितरण हुआ।

श्री सिद्धदाता दरबार की जय बोलो
…जहां बिगड़ी सबकी बनती इस दिव्यधाम दरबार की श्री सिद्धदाता दरबार की जय बोलो।। ….आज ब्रिज में होरी रे रसिया।। …मनमोहन खेर रहे होरी।।
जयपुर के भजन गायक लोकेश शर्मा ने होली के भक्तिमय भजनों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। देश-विदेश से आए श्रद्धालुगण होली के संगीतमयी गीतों पर झूमते रहे। इससे पहले उत्सव के दौरान दिल्ली के मधुबन आर्ट के कलाकारों ने मनोहारी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।

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