-आस्था और श्रद्धा के साथ शुरु हुआ 19वां ब्रह्मोत्सव

फरीदाबाद/नई दिल्ली। सूरजकुंड मार्ग स्थित श्रीरामानुज संप्रदाय की तीर्थपीठ श्रीलक्ष्मीनारायण दिव्यधाम-श्री सिद्धदाता आश्रम में रविवार को
भगवान श्रीविष्णुहरि की वंदना स्तुति के क्रम में मृदाहरण, अंकुरारोपण, ध्वजारोहण, अग्नि प्रतिष्ठा, भेरीपूजन, देवता आवाहन और श्रीसुदर्शन नृसिंह महायज्ञ के साथ पांच दिवसीय 19वां ब्रह्मोत्सव समारोह इंद्रप्रस्थ एवं हरियाणा पीठाधीश्वर श्रीमद्जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज के सान्निध्य में शुरू हुआ। मुख्य पुजारी पंडित रमाकांत शास्त्री समेत दक्षिण भारत से आए श्रीरामानुज संप्रदाय के विद्वानों ने विधि विधान से मंत्रोच्चरण के बीच मुख्य यजमान युवाचार्य स्वामी अनिरुद्धाचार्य जी महाराज से वंदना-स्तुति कराई। श्रीवैष्णव परंपरा में ब्रह्मोत्सव को भगवान विष्णु के प्रति शरणागति का सबसे बड़े उत्सव के रूप में मनाया जाता है। श्रीसिद्धदाता आश्रम के ब्रह्मोत्सव की शुरुआत अक्षय तृतीया के दिन से होती है। श्रीसिद्धदाता आश्रम के अधिपति अनंत विभूषित श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने अंकुरारोपण, ध्वजारोहण, अग्नि प्रतिष्ठा, भेरी पूजा एवं देवता आह्वान किया गया। विशिष्ठ दक्षिण शैली में पुरोहितों ने पूजन किया। देवता आह्वान के बाद यहां अगले चार दिन भगवान का विभिन्न प्रकार से पूजन किया जाएगा। विश्वकल्याण के लिए सबसे पवित्र और शक्तिशाली पूजा श्रीसुदर्शन नृसिंह महायज्ञ यहां प्रतिदिन किया जाएगा। आश्रम के अधिष्ठाता अनंत विभूषित श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने कहा कि भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र के अवतार के रुप में उनके हाथों में धारण दिव्य, सर्वशक्तिमान ब्रह्मांडीय शस्त्र है। भगवान विष्णु सुदर्शन चक्र का उपयोग ब्रह्मांड को बुरी शक्तियों से बचाने और ब्रह्मांड में व्यवस्था और संतुलन बहाल करने के लिए करते हैं। भगवान सुदर्शन संपूर्ण ब्रह्मांड की विभिन्न बाधाओं, दुर्भाग्य, कष्टों और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करते हैं। ब्रह्मोत्सव में शामिल होने के लिए भक्तगण पूरे साल आतुरता से प्रतीक्षा करते हैं। भक्तो के सेवाभाव के चलते आयोजन विशिष्ट हो जाता हैं। अलवर के मधुसूदन सेवा आश्रम से आए स्वामी सुदर्शनाचार्य जी महाराज ने ब्रह्मोत्सव विषय पर प्रवचन किया। इस अवसर पर स्थानीय विधायक धनेश अदलक्खा ने कार्यक्रम में पहुंचकर स्वामी से आशीर्वाद प्राप्त किया।
–संपूर्ण

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