फरीदाबाद/नई दिल्ली, 8 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर इंडियनऑयल अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) केंद्र में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन तथा सतत विकास के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में देश के प्रसिद्ध जल संरक्षण विशेषज्ञ एवं पद्मश्री सम्मानित श्री उमा शंकर पांडेय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरएंडडी केंद्र के कार्यकारी निदेशक प्रभारी डॉ. उमीश श्रीवास्तव ने पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि वर्तमान समय में सतत विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक नवाचारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इंडियनऑयल द्वारा विकसित की गई स्वदेशी एवं अत्याधुनिक तकनीकों की जानकारी दी, जो सस्टेनेबिलिटी (स्थिरता) और सर्कुलर इकोनॉमी (चक्रीय अर्थव्यवस्था) को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
अपने प्रेरणादायी मुख्य वक्तव्य में पद्मश्री उमा शंकर पांडेय ने पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने अपनी चर्चित पहल “खेत पर मेड़ और मेड़ पर पेड़” (मेड़ पर पेड़, खेतों में पानी) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अभियान जल संरक्षण, हरित आवरण बढ़ाने और कृषि को टिकाऊ बनाने की दिशा में एक प्रभावी मॉडल साबित हुआ है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों या संस्थानों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। हर व्यक्ति अपनी क्षमता और संसाधनों के अनुसार छोटे-छोटे प्रयास करके भी प्रकृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। श्री पांडेय ने इंडियनऑयल के अनुसंधान एवं विकास विभाग द्वारा पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों और नवाचारों के माध्यम से किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ये प्रयास देश को हरित और सतत भविष्य की ओर अग्रसर कर रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण, जल बचत, वृक्षारोपण और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के संकल्प के साथ प्रतिभागियों ने प्रकृति संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान और सतत विकास के प्रति सामूहिक जागरूकता का सशक्त संदेश देने में सफल रहा।

