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हरियाणा के फतेहाबाद जिले के गांव पीली मंढोरी में विश्वविख्यात शास्त्रीय गायक पंडित जसराज की जयंती के अवसर पर राज्य स्तरीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम सोमवार, 2 फरवरी को प्रातः 11 बजे आयोजित होगा, जिसमें हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

यह आयोजन भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा, उसके विकास और समाज में उसके योगदान को स्मरण करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। कार्यक्रम में संगीत, संस्कृति और कला से जुड़े विभिन्न वर्गों की सहभागिता अपेक्षित है।


पंडित जसराज का जन्मस्थान और सांस्कृतिक महत्व

पंडित जसराज का जन्म हरियाणा के फतेहाबाद जिले के गांव पीली मंढोरी में हुआ था। यह गांव आज भी उनकी स्मृतियों और योगदान के कारण सांस्कृतिक मानचित्र पर विशेष स्थान रखता है। स्थानीय लोगों के लिए यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत को स्मरण करने का अवसर है।

पंडित जसराज भारतीय शास्त्रीय संगीत के मेवाती घराने से जुड़े रहे और उन्होंने इस परंपरा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। उनके जीवन और संगीत यात्रा को याद करना नई पीढ़ी को शास्त्रीय संगीत से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


राज्य स्तरीय कार्यक्रम का उद्देश्य

इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम का उद्देश्य केवल जयंती मनाना नहीं है, बल्कि—

  • भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा को सम्मान देना

  • युवा कलाकारों को प्रेरित करना

  • लोक, भजन और शास्त्रीय संगीत को एक साझा मंच प्रदान करना

आयोजकों के अनुसार, ऐसे कार्यक्रमों से संगीत की विरासत को संरक्षित रखने में मदद मिलती है और कलाकारों को आपसी संवाद का अवसर मिलता है।


शास्त्रीय संगीत में पंडित जसराज का योगदान

पंडित जसराज को भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनके गहन रियाज़, भावपूर्ण गायकी और रागों की प्रस्तुति के लिए जाना जाता है। उन्होंने न केवल मंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से, बल्कि शिक्षण और मार्गदर्शन के जरिए भी कई शिष्यों को तैयार किया।

उनका संगीत—

  • रागात्मक अनुशासन

  • भावनात्मक अभिव्यक्ति

  • परंपरा और प्रयोग के संतुलन

का उदाहरण माना जाता है। उनके योगदान को समझना भारतीय संगीत परंपरा को समझने के समान है।


कार्यक्रम में कलाकारों की संभावित सहभागिता

इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से शास्त्रीय गायक, भजन गायक और लोक कलाकारों के शामिल होने की संभावना है। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में मुंबई से पंडित जसराज के परिजन भी शामिल हो सकते हैं।

इसके साथ ही प्रसिद्ध गायक सोनू निगम और अनूप जलोटा सहित अन्य संगीतकारों और कलाकारों की सहभागिता की भी संभावना जताई गई है। हालांकि, अंतिम सूची कार्यक्रम के निकट स्पष्ट होगी।


शास्त्रीय, भजन और लोक कलाकारों से सहभागिता की अपील

आयोजकों द्वारा सभी शास्त्रीय गायकों, भजन गायकों और लोक कलाकारों से इस कार्यक्रम में भाग लेने की अपील की गई है। उनका कहना है कि—

  • यह मंच कलाकारों को एक-दूसरे से सीखने का अवसर देगा

  • विभिन्न संगीत विधाओं का समन्वय देखने को मिलेगा

  • पंडित जसराज की स्मृति को सामूहिक रूप से नमन किया जाएगा

इस तरह की सहभागिता से सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलता है।


युवा पीढ़ी और संगीत शिक्षा

कार्यक्रम के माध्यम से युवा पीढ़ी को शास्त्रीय संगीत के महत्व से परिचित कराने का भी प्रयास किया जा रहा है। आज के डिजिटल और तेज़ रफ्तार जीवन में शास्त्रीय संगीत की गहराई और अनुशासन को समझना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

आयोजकों का मानना है कि—

  • ऐसे आयोजन युवाओं में रुचि जगा सकते हैं

  • संगीत को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि साधना के रूप में समझाया जा सकता है

  • गुरू-शिष्य परंपरा की अहमियत को रेखांकित किया जा सकता है


गांव पीली मंढोरी में आयोजन का महत्व

गांव पीली मंढोरी में इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे—

  • गांव की सांस्कृतिक पहचान को बल मिलता है

  • स्थानीय युवाओं को प्रेरणा मिलती है

  • क्षेत्रीय पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है

स्थानीय प्रशासन द्वारा कार्यक्रम को सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित करने की तैयारियां की जा रही हैं।


भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा और समाज

भारतीय शास्त्रीय संगीत केवल कला का रूप नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक धरोहर है। पंडित जसराज जैसे कलाकारों ने इस परंपरा को जीवित रखने और आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस आयोजन के माध्यम से—

  • शास्त्रीय संगीत के सामाजिक पक्ष

  • उसकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भूमिका

  • और उसकी समकालीन प्रासंगिकता

पर भी चर्चा और प्रस्तुति देखने को मिल सकती है।


प्रशासनिक और सांस्कृतिक समन्वय

कार्यक्रम के आयोजन में प्रशासनिक और सांस्कृतिक संस्थाओं के बीच समन्वय किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार—

  • सुरक्षा

  • यातायात

  • मंच और ध्वनि व्यवस्था

जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि कलाकारों और दर्शकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।


संगीत प्रेमियों के लिए अवसर

यह कार्यक्रम संगीत प्रेमियों के लिए भी एक अवसर है, जहां वे—

  • शास्त्रीय संगीत को करीब से अनुभव कर सकेंगे

  • विभिन्न कलाकारों की प्रस्तुतियां देख सकेंगे

  • भारतीय संगीत की विविधता को एक मंच पर महसूस कर सकेंगे

ऐसे आयोजनों से दर्शकों और कलाकारों के बीच संवाद भी मजबूत होता है।


सांस्कृतिक स्मृति और विरासत

पंडित जसराज की जयंती पर आयोजित यह राज्य स्तरीय कार्यक्रम उनकी सांस्कृतिक विरासत को स्मरण करने का माध्यम है। यह आयोजन न केवल अतीत को याद करने तक सीमित है, बल्कि वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों को संगीत से जोड़ने का प्रयास भी है।

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