फरीदाबाद, 1 फरवरी।
39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला 2026 में आज भक्ति, संगीत और संस्कृति का विशेष संगम देखने को मिलेगा। मेला परिसर की मुख्य चौपाल पर सोमवार 2 फरवरी को सायं 6:30 बजे आयोजित होने वाली सांस्कृतिक संध्या में भक्ति रस की स्वर-लहरियां गूंजेंगी, जहां पार्श्व गायक एवं रियलिटी शो विजेता हेमंत बृजवासी अपनी मधुर आवाज से दर्शकों को भाव-विभोर करेंगे।
सूरजकुंड मेला केवल शिल्प और हस्तकला का उत्सव नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध लोक-संस्कृति, संगीत और परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने वाला अंतरराष्ट्रीय मंच भी है। यहां प्रतिदिन आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम देश-विदेश से आए पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
मुख्य चौपाल पर सजेगी भक्ति संध्या
सोमवार की सांस्कृतिक संध्या में हेमंत बृजवासी की प्रस्तुति के साथ मुख्य चौपाल भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर हो जाएगी। उनकी गायकी में भारतीय भक्ति परंपरा की झलक देखने को मिलेगी, जो श्रोताओं को शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कराएगी।
आयोजकों के अनुसार, इस कार्यक्रम में—
भक्ति संगीत
भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं की प्रस्तुति
सुरों और भावों का संतुलित संगम
देखने को मिलेगा, जिससे मेला परिसर का माहौल और अधिक आध्यात्मिक बन जाएगा।
सादगीपूर्ण गायकी से बनी पहचान
हेमंत बृजवासी अपनी सादगीपूर्ण गायकी और भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए जाने जाते हैं। उनके भजनों में भाव और संगीत का ऐसा संतुलन होता है, जो श्रोताओं को सहज रूप से जोड़ लेता है। सूरजकुंड मेले के मंच पर उनकी प्रस्तुति भक्ति संगीत प्रेमियों के लिए विशेष अवसर मानी जा रही है।
उनकी प्रस्तुति में—
कृष्ण भक्ति से जुड़े भजन
पारंपरिक भक्ति रचनाएं
भावात्मक संगीत
शामिल रहने की संभावना है, जो दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ेंगी।
पर्यटकों के लिए आध्यात्मिक अनुभव
दिनभर शिल्पकारों द्वारा बनाए गए हस्तनिर्मित उत्पादों, हथकरघा वस्त्रों और पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लेने के बाद पर्यटक शाम को इस भक्ति संध्या में शामिल होकर एक अलग ही शांति और सुकून का अनुभव करेंगे।
पर्यटन विशेषज्ञों के अनुसार—
सांस्कृतिक कार्यक्रम मेले के अनुभव को संपूर्ण बनाते हैं
भक्ति संगीत मानसिक शांति प्रदान करता है
पर्यटक शिल्प के साथ संस्कृति को भी करीब से समझ पाते हैं
बड़ी संख्या में दर्शकों के पहुंचने की संभावना
आयोजकों ने बताया कि इस भक्ति संध्या को लेकर श्रद्धालुओं और संगीत प्रेमियों में खासा उत्साह है। बड़ी संख्या में दर्शकों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए—
सुरक्षा व्यवस्था
दर्शक बैठने की व्यवस्था
मंच और ध्वनि प्रबंधन
पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
सूरजकुंड मेला: शिल्प के साथ संस्कृति का उत्सव
39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला देश-विदेश के शिल्पकारों, कलाकारों और पर्यटकों को एक साझा मंच प्रदान कर रहा है। यहां—
हस्तशिल्प
लोक कला
संगीत और नृत्य
सभी का संगम देखने को मिल रहा है। भक्ति संध्या जैसे कार्यक्रम इस मेले की सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त बनाते हैं।
संगीत प्रेमियों से सहभागिता की अपील
आयोजकों ने संगीत और भक्ति रस के प्रेमियों से अपील की है कि वे मुख्य चौपाल पर आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में शामिल होकर कलाकारों का उत्साहवर्धन करें और भारतीय भक्ति परंपरा से जुड़ने का अवसर प्राप्त करें।

