फरीदाबाद | 05 फरवरी 2026
39वें शिल्प मेले में हैदराबादी रियल पर्ल्स और स्टोन ज्वेलरी का खास आकर्षण
फरीदाबाद के सूरजकुंड में आयोजित 39वां अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला देश और विदेश की पारंपरिक कला, संस्कृति और हस्तशिल्प को एक मंच पर प्रस्तुत कर रहा है। इस मेले में हर राज्य की विशिष्ट कारीगरी देखने को मिल रही है। इसी क्रम में हैदराबाद की पारंपरिक ज्वेलरी भी पर्यटकों और खरीदारों का ध्यान आकर्षित कर रही है।
मेले में स्टॉल नंबर 928 पर हैदराबाद से आईं शिल्पकार स्वाति द्वारा हैदराबादी रियल पर्ल्स और स्टोन ज्वेलरी का प्रदर्शन किया जा रहा है। उनके स्टॉल पर पारंपरिक और आधुनिक डिज़ाइन की ज्वेलरी का विस्तृत संग्रह उपलब्ध है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
वर्षों का अनुभव और निरंतर भागीदारी
स्वाति ने बताया कि वह पिछले 16 वर्षों से लगातार सूरजकुंड शिल्प मेले में भाग लेती आ रही हैं। इस दौरान उन्होंने मेले में आने वाले दर्शकों की पसंद और बदलते रुझानों को करीब से समझा है। उनके अनुसार, सूरजकुंड मेला शिल्पकारों को सीधे ग्राहकों से जुड़ने का अवसर देता है, जिससे उनकी कला को पहचान मिलती है।
उन्होंने बताया कि हर वर्ष मेले में नए डिज़ाइन और कलेक्शन के साथ भाग लेना उनके लिए एक सीखने की प्रक्रिया भी होती है। इससे उन्हें पारंपरिक शिल्प को आधुनिक स्वाद के अनुसार ढालने में मदद मिलती है।
रियल पर्ल्स और स्टोन ज्वेलरी की खासियत
स्टॉल पर प्रदर्शित ज्वेलरी हैदराबादी रियल पर्ल्स और ओरिजिनल स्टोन से तैयार की गई है। इन गहनों में माला, नेकलेस, ईयररिंग, ब्रेसलेट, कंगन और चूड़ियां शामिल हैं। इसके अलावा विशेष डिज़ाइन की ज्वेलरी भी लोगों के लिए उपलब्ध कराई गई है।
इन गहनों की खास बात यह है कि इनमें पारंपरिक कारीगरी के साथ आधुनिक डिज़ाइन का संतुलन देखने को मिलता है। यही कारण है कि अलग-अलग आयु वर्ग के लोग इन ज्वेलरी डिज़ाइनों में रुचि दिखा रहे हैं।
हर बजट के लिए उपलब्ध विकल्प
स्वाति ने बताया कि उनके स्टॉल पर हर बजट के अनुसार ज्वेलरी उपलब्ध है। कम कीमत वाली फैशन ज्वेलरी से लेकर प्रीमियम श्रेणी की हैदराबादी पर्ल्स ज्वेलरी तक, ग्राहकों को कई विकल्प मिलते हैं।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि हर वर्ग का व्यक्ति अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार ज्वेलरी खरीद सके। कई खरीदार पारंपरिक अवसरों के लिए गहनों का चयन कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग रोजमर्रा के उपयोग के लिए हल्की ज्वेलरी में रुचि ले रहे हैं।
गुणवत्ता और टिकाऊपन पर ध्यान
स्टॉल पर मौजूद ज्वेलरी की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया गया है। शिल्पकार के अनुसार, रियल पर्ल्स और स्टोन का चयन सावधानीपूर्वक किया जाता है, ताकि गहनों की चमक और मजबूती बनी रहे।
उन्होंने बताया कि अच्छी गुणवत्ता के कारण ये गहने लंबे समय तक उपयोग में लाए जा सकते हैं। यही वजह है कि कई ग्राहक बार-बार उनके स्टॉल पर लौटकर खरीदारी करते हैं।
शिल्प मेले की भूमिका
सूरजकुंड शिल्प मेला शिल्पकारों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। यहां उन्हें अपनी कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। इससे पारंपरिक शिल्प को नई पहचान मिलती है और कारीगरों को प्रोत्साहन मिलता है।
स्वाति के अनुसार, यह मेला केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। यह पारंपरिक कला और संस्कृति को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाता है।
पारंपरिक कला और आधुनिक बाजार
हैदराबादी पर्ल्स ज्वेलरी लंबे समय से अपनी विशिष्ट पहचान के लिए जानी जाती है। सूरजकुंड मेले जैसे आयोजनों के माध्यम से यह कला आधुनिक बाजार से जुड़ती है। इससे शिल्पकारों को नए ग्राहकों तक पहुंचने में मदद मिलती है।
मेले में आने वाले पर्यटक न केवल खरीदारी कर रहे हैं, बल्कि इन गहनों की निर्माण प्रक्रिया और इतिहास के बारे में भी जानकारी ले रहे हैं। इससे लोगों में पारंपरिक शिल्प के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।
कारीगरों के लिए अवसर
शिल्प मेले कारीगरों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी मदद करते हैं। यहां उन्हें अपने उत्पाद सीधे बेचने का अवसर मिलता है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होती है और शिल्पकारों को उचित मूल्य प्राप्त होता है।
स्वाति ने बताया कि सूरजकुंड मेला उनके लिए अनुभव साझा करने और अन्य शिल्पकारों से सीखने का भी माध्यम है। इस तरह के आयोजन पारंपरिक कला को जीवित रखने में सहायक साबित हो रहे हैं।
सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
39वां अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला भारतीय सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने का अवसर प्रदान कर रहा है। हैदराबादी रियल पर्ल्स और स्टोन ज्वेलरी इस विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मेले में इस तरह की ज्वेलरी की मौजूदगी यह दर्शाती है कि पारंपरिक कला आज भी लोगों की पसंद बनी हुई है। इससे आने वाली पीढ़ियों को भी इन कलाओं से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।

