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फरीदाबाद | 05 फरवरी 2026

सूरजकुंड मेले को लेकर युवाओं में दिख रहा जबरदस्त उत्साह

फरीदाबाद की अरावली वादियों में आयोजित सूरजकुंड मेला इन दिनों युवाओं के बीच खासा लोकप्रिय बना हुआ है। 15 फरवरी तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर क्राफ्ट मेले में रोजाना हजारों की संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। “लोकल टू ग्लोबल – आत्मनिर्भर भारत की पहचान” थीम पर आधारित यह मेला भारतीय संस्कृति, परंपरा और लोक कला का जीवंत उदाहरण बनकर उभर रहा है।

सूरजकुंड मेले में प्रवेश करते ही लोक संगीत की गूंज, पारंपरिक वेशभूषा और स्वदेशी उत्पादों की खुशबू आगंतुकों को अपनी ओर खींच लेती है। खासकर युवा वर्ग इस माहौल को खुलकर जीता नजर आ रहा है।

लोक कलाकारों ने बढ़ाया मेले का आकर्षण

मेले में हरियाणा के साथ-साथ अन्य राज्यों से आए लोक कलाकार अपनी पारंपरिक लोक शैलियों से दर्शकों का मनोरंजन कर रहे हैं। कलाकार पारंपरिक पोशाक पहनकर बीन, नगाड़ा, ढोल, डेरु और बैगपाइपर जैसे वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों से आगंतुकों का स्वागत कर रहे हैं।

इन वाद्य यंत्रों की लय और ताल इतनी प्रभावशाली है कि लोग खुद को थिरकने से रोक नहीं पा रहे। युवक-युवतियों के साथ-साथ विदेशी पर्यटक भी इन धुनों पर झूमते नजर आ रहे हैं, जिससे मेला परिसर में एक अलग ही ऊर्जा देखने को मिल रही है।

युवाओं में दिखा खास जोश

अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर क्राफ्ट मेले को लेकर युवा पीढ़ी में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। मेला परिसर में जगह-जगह पारंपरिक वेशभूषा से सजी सांस्कृतिक टोलियां नजर आ रही हैं, जो लगातार लोगों का मनोरंजन कर रही हैं।

युवा वर्ग न केवल इन प्रस्तुतियों को देख रहा है, बल्कि उनमें सक्रिय रूप से शामिल भी हो रहा है। लोक संगीत की धुनों पर नाचते युवा मेले के माहौल को और भी जीवंत बना रहे हैं।

बीन और नगाड़ा पार्टी बनी आकर्षण

हरियाणा की लोक संस्कृति को दर्शाती बीन और नगाड़ा पार्टी मेले में विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इन कलाकारों की प्रस्तुतियों के दौरान युवाओं के कदम खुद-ब-खुद थिरकने लगते हैं। कई युवा तो बेहद उत्साह और मोहक अंदाज में नृत्य करते दिखाई देते हैं।

बीन और नगाड़ा पार्टी द्वारा मोरबीन, चिमटा, सेट्रम, ढोल और डूबी जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की सुरीली धुनें बिखेरी जा रही हैं। इन धुनों के साथ मेला परिसर में लगातार तालियों और उल्लास की आवाजें सुनाई दे रही हैं।

कच्ची घोड़ी और लोक वाद्यों की जुगलबंदी

मेले में कच्ची घोड़ी पार्टी भी पर्यटकों का भरपूर मनोरंजन कर रही है। नगाड़ा, बीन, झांज और ढप की जुगलबंदी से मेला परिसर का माहौल पूरी तरह लोक रंग में रंगा हुआ है।

रोजाना हजारों की संख्या में आने वाले पर्यटक इन प्रस्तुतियों का आनंद लेते हुए कलाकारों के साथ नाचते नजर आते हैं। कई लोग इस यादगार अनुभव को कैमरे में कैद करने के साथ-साथ कलाकारों के साथ सेल्फी भी ले रहे हैं।

विदेशी पर्यटकों की भी सक्रिय भागीदारी

सूरजकुंड मेले की खास बात यह है कि यहां विदेशी पर्यटक भी भारतीय लोक संस्कृति से जुड़ते नजर आ रहे हैं। बीन, ढोल और नगाड़ा की धुनों पर विदेशी पर्यटकों को नाचते देखना लोगों के लिए खास आकर्षण बन गया है।

यह दृश्य इस बात को दर्शाता है कि भारतीय लोक कला और संगीत की अपील वैश्विक स्तर पर भी बनी हुई है। विदेशी मेहमान न केवल मनोरंजन कर रहे हैं, बल्कि भारतीय परंपराओं को करीब से समझने का प्रयास भी कर रहे हैं।

संस्कृति और परंपरा का जीवंत संगम

मेला परिसर में स्वदेशी उत्पादों की सजावट, लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां और पारंपरिक वेशभूषा एक साथ मिलकर संस्कृति और परंपरा का सुंदर संगम प्रस्तुत कर रही हैं। यह माहौल युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम भी कर रहा है।

सूरजकुंड मेला केवल खरीदारी या घूमने का स्थान नहीं रह गया है। यह एक ऐसा मंच बन चुका है, जहां लोग भारतीय लोक संस्कृति को महसूस कर पा रहे हैं।

यादगार अनुभव बनता सूरजकुंड मेला

युवाओं के जोश, लोक कलाकारों की ऊर्जा और विदेशी पर्यटकों की भागीदारी ने सूरजकुंड मेले को और भी खास बना दिया है। यहां आने वाले आगंतुक इस अनुभव को लंबे समय तक याद रखने की बात कर रहे हैं।

मेले में हर दिन कुछ नया देखने और सुनने को मिल रहा है। यही कारण है कि सूरजकुंड मेला युवाओं के लिए मनोरंजन, संस्कृति और उत्सव का एक बड़ा केंद्र बनता जा रहा है।

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