सूरजकुंड (फरीदाबाद) | 05 फरवरी 2026
39वें सूरजकुंड शिल्प महोत्सव में सीनियर सिटीजन और दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधाएं
फरीदाबाद के सूरजकुंड में आयोजित 39वां अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव केवल कला, संस्कृति और हस्तशिल्प का मंच ही नहीं है, बल्कि यह समावेशी और संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था का उदाहरण भी प्रस्तुत कर रहा है। इस वर्ष मेले में वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रबंध किए गए हैं, ताकि वे बिना किसी असुविधा के मेले का आनंद ले सकें।
जिला प्रशासन और जिला रेडक्रॉस सोसायटी के संयुक्त प्रयासों से यह सुनिश्चित किया गया है कि शारीरिक रूप से असमर्थ या अधिक आयु के आगंतुकों को मेले में घूमने-फिरने में कठिनाई न हो। इसी उद्देश्य से मेला परिसर के सभी प्रवेश द्वारों पर व्हीलचेयर और सहायता कर्मियों की व्यवस्था की गई है।
रेडक्रॉस सोसायटी की सक्रिय भूमिका
जिला रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से इस वर्ष मेले में सीनियर सिटीजन और दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गई है। प्रशासनिक मार्गदर्शन में यह पहल सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदनशीलता को दर्शाती है।
रेडक्रॉस सोसायटी का उद्देश्य है कि कोई भी आगंतुक केवल शारीरिक असमर्थता के कारण सांस्कृतिक अनुभव से वंचित न रह जाए। इसी सोच के तहत व्हीलचेयर सुविधा को प्राथमिकता दी गई है।
चारों गेटों पर व्हीलचेयर की व्यवस्था
मेला प्रशासन ने जानकारी दी है कि सूरजकुंड शिल्प महोत्सव के सभी चारों गेटों पर व्हीलचेयर की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इससे बुजुर्ग और दिव्यांगजन आसानी से प्रवेश कर सकें और पूरे परिसर का भ्रमण कर सकें।
कुल 16 व्हीलचेयर मेले में उपलब्ध कराई गई हैं, जिन्हें जरूरत के अनुसार आगंतुकों को प्रदान किया जा रहा है। यह व्यवस्था 15 फरवरी तक चलने वाले पूरे महोत्सव के दौरान जारी रहेगी।
प्रशिक्षित वॉलिंटियर्स की तैनाती
व्हीलचेयर सुविधा के साथ-साथ प्रशिक्षित रेडक्रॉस वॉलिंटियर्स की भी ड्यूटी लगाई गई है। ये वॉलिंटियर्स सीनियर सिटीजन और दिव्यांगजनों को मेले के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने में सहयोग कर रहे हैं।
वॉलिंटियर्स न केवल शारीरिक सहायता प्रदान कर रहे हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर आगंतुकों को जानकारी और मार्गदर्शन भी दे रहे हैं। इससे मेले में आने वाले बुजुर्ग और दिव्यांगजन स्वयं को सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर रहे हैं।
समावेशी प्रशासन का उदाहरण
रेडक्रॉस सोसायटी के सचिव बिजेन्द्र सरोत ने बताया कि यह पहल प्रशासन की समावेशी सोच को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि मेला प्रशासन का उद्देश्य है कि हर व्यक्ति, चाहे उसकी आयु या शारीरिक स्थिति कुछ भी हो, मेले का अनुभव समान रूप से कर सके।
इस तरह की व्यवस्थाएं यह संकेत देती हैं कि सार्वजनिक आयोजनों में केवल भीड़ और आयोजन ही नहीं, बल्कि लोगों की सुविधा और गरिमा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
सीनियर सिटीजन और दिव्यांगजनों की सकारात्मक प्रतिक्रिया
मेले में पहुंचे कई वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों ने इन सुविधाओं की सराहना की है। उनका कहना है कि व्हीलचेयर और सहयोगी वॉलिंटियर्स की मौजूदगी से वे बिना किसी झिझक और परेशानी के मेले का आनंद ले पा रहे हैं।
कुछ आगंतुकों ने यह भी बताया कि पहले ऐसे बड़े आयोजनों में उन्हें आने में संकोच होता था, लेकिन इस तरह की व्यवस्थाओं से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।
अंतरराष्ट्रीय सहभागिता से सजा महोत्सव
गौरतलब है कि 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव में इस वर्ष लगभग 50 देशों के 700 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। यह मेला एक वैश्विक सांस्कृतिक मंच के रूप में उभरा है, जहां विभिन्न देशों की कला, शिल्प और परंपराएं देखने को मिल रही हैं।
इस अंतरराष्ट्रीय सहभागिता के बीच वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए की गई विशेष व्यवस्था मेले की समावेशी सोच को और मजबूत करती है।
प्रशासन की जिम्मेदारी और सामाजिक दृष्टिकोण
जिला प्रशासन का मानना है कि किसी भी बड़े आयोजन की सफलता केवल संख्या या भव्यता से नहीं मापी जाती, बल्कि इस बात से भी आंकी जाती है कि वह समाज के हर वर्ग के लिए कितना सुलभ है।
इसी सोच के तहत यह प्रयास किया गया है कि सूरजकुंड शिल्प महोत्सव में आने वाला कोई भी व्यक्ति स्वयं को उपेक्षित महसूस न करे।
लोगों से मेले में पहुंचने की अपील
जिला उपायुक्त आयुष सिन्हा ने फरीदाबाद सहित देश-प्रदेश के लोगों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में सूरजकुंड शिल्प महोत्सव में पहुंचें। उन्होंने कहा कि यह मेला अंतरराष्ट्रीय कला, शिल्प और संस्कृति को एक साथ देखने का अनूठा अवसर प्रदान करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन द्वारा की गई सुविधाओं का उद्देश्य यह है कि हर वर्ग का नागरिक सहजता और सम्मान के साथ इस सांस्कृतिक आयोजन का हिस्सा बन सके।
सामाजिक संवेदनशीलता की दिशा में कदम
सूरजकुंड शिल्प महोत्सव में सीनियर सिटीजन और दिव्यांगजनों के लिए की गई यह व्यवस्था केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को दर्शाती है। यह पहल भविष्य में अन्य सार्वजनिक आयोजनों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है।
इस तरह के प्रयास यह संदेश देते हैं कि जब प्रशासन और समाज मिलकर सोचते हैं, तो हर आयोजन वास्तव में सभी के लिए सुलभ और यादगार बन सकता है।

