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फरीदाबाद | 05 फरवरी 2026

प्रशासन और जनता के सहयोग से बाल विवाह की कुप्रथा समाप्त करने पर जोर

फरीदाबाद जिले में बाल विवाह की रोकथाम को लेकर प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयास तेज किए जा रहे हैं। इसी क्रम में गांव बुखारपुर सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जानकारी देना और समाज को इस कुप्रथा के खिलाफ एकजुट करना रहा।

कार्यक्रम उपायुक्त के मार्गदर्शन में आयोजित किए गए, जिनमें स्थानीय प्रतिनिधियों, ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इस दौरान उपस्थित लोगों को यह संकल्प भी दिलाया गया कि वे न तो बाल विवाह करेंगे और न ही किसी भी स्थिति में इसे होने देंगे।

बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान

भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत जिले में लगातार जागरूकता गतिविधियां की जा रही हैं। इन अभियानों का मुख्य उद्देश्य लोगों को कानून, सामाजिक जिम्मेदारी और बच्चों के अधिकारों के प्रति सजग करना है।

कार्यक्रमों में यह बताया गया कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक बुराई नहीं है, बल्कि यह बच्चों के जीवन पर दूरगामी नकारात्मक प्रभाव डालता है। इससे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और मानसिक विकास प्रभावित होता है।

कानून की जानकारी दी गई

जागरूकता कार्यक्रम के दौरान संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी हेमा कौशिक ने बाल विवाह से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु की लड़की और 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह कानूनन अमान्य है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बाल विवाह कराने, उसमें सहयोग करने या इसे बढ़ावा देने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। इसलिए इस विषय को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।

बच्चों के भविष्य पर पड़ने वाला असर

कार्यक्रम में यह बात प्रमुख रूप से रखी गई कि बाल विवाह बच्चों के भविष्य के लिए गंभीर बाधा बनता है। कम उम्र में विवाह होने से बच्चों की पढ़ाई अधूरी रह जाती है। इसके साथ ही उनके स्वास्थ्य और आत्मनिर्भर बनने की संभावनाएं भी सीमित हो जाती हैं।

अधिकारियों ने बताया कि सरकार बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और कल्याण के लिए कई योजनाएं चला रही है। हालांकि इन योजनाओं का पूरा लाभ तभी मिल सकता है, जब समाज भी अपनी जिम्मेदारी निभाए।

समाज की भूमिका को बताया गया अहम

जागरूकता सत्रों में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि बाल विवाह को खत्म करने में समाज की भूमिका बेहद अहम है। केवल प्रशासनिक प्रयासों से इस समस्या का पूरी तरह समाधान संभव नहीं है।

ग्रामीणों से अपील की गई कि वे अपने आसपास होने वाली गतिविधियों पर नजर रखें। यदि कहीं भी बाल विवाह की तैयारी दिखाई दे, तो उसे रोकने का प्रयास करें और तुरंत प्रशासन को सूचित करें।

शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया

कार्यक्रम में यह भी जानकारी दी गई कि यदि किसी को बाल विवाह की सूचना मिलती है, तो वह बिना डर के इसकी शिकायत कर सकता है। इसके लिए नजदीकी पुलिस थाना या चौकी से संपर्क किया जा सकता है।

इसके अलावा पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 पर कॉल करके भी सूचना दी जा सकती है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

प्रशासन की प्रतिबद्धता

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन बाल विवाह की रोकथाम को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस संबंध में प्राप्त प्रत्येक सूचना पर तुरंत और प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले में कोई भी बच्चा बाल विवाह का शिकार न हो। इसके लिए निरंतर निगरानी, जागरूकता और सख्त कार्रवाई की नीति अपनाई जा रही है।

सामूहिक प्रयास से ही संभव समाधान

जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को खत्म करना सभी की साझा जिम्मेदारी है। जब तक प्रशासन और जनता मिलकर काम नहीं करेंगे, तब तक इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

अधिकारियों ने विश्वास जताया कि समाज की सक्रिय भागीदारी से बच्चों को सुरक्षित, शिक्षित और सम्मानजनक भविष्य दिया जा सकता है। इसी दिशा में जिले में आगे भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम जारी रहेंगे।

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