– शहर की बहुसांस्कृतिक पहचान में सिख समुदाय का योगदान सराहनीय: धनेश अदलखा

– गुरु तेग बहादुर की शहादत मानवता का मार्गदर्शन करती रहेगी”: विधायक सतीश फागना

– केंद्रीय मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने किया नीलम चौक का नामकरण, विधायक बड़खल धनेश अदलखा और एनआईटी विधायक सतीश फागना रहे मौजूद

 

फरीदाबाद, 29 नवंबर। फरीदाबाद में आज का दिन ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण रहा, जब वर्षों से नीलम चौक के नाम से पहचाना जाने वाला यह प्रमुख चौराहा आधिकारिक रूप से ‘गुरु तेग बहादुर चौक’ के नाम से घोषित किया गया। यह निर्णय गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत वर्षगांठ के उपलक्ष में लिया गया है, जिसकी मुख्य राज्यस्तरीय समर्पित कार्यक्रम 26 नवंबर को कुरुक्षेत्र में आयोजित हुआ था और जिसमें स्वयं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए थे। यह जानकारी देते हुए भारत सरकार में केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने उपस्तिथ लोगों को सम्बोधित करते हुए कहे। केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने आज नीलम चौक का नाम ‘गुरु तेग बहादुर चौक’ के नाम से घोषित किया। उनके साथ बड़खल विधायक धनेश अदलखा, एनआईटी फरीदाबाद विधायक सतीश फागना भी मौजूद रहे।

केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने कहा कि गुरु तेग बहादुर की शहादत सदियों से मानवता, धर्म–रक्षा और अदम्य साहस का प्रतीक रही है। उन्होंने धर्म के लिए प्राण त्याग दिए, किंतु सिद्धांतों से विचलित होना स्वीकार नहीं किया। यह नामकरण फरीदाबाद ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है, क्योंकि ऐसे महापुरुष सम्पूर्ण मानवता की धरोहर होते हैं।

उन्होंने स्मरण कराया कि मुगल शासनकाल में सिख गुरुओं और उनके साथियों ने धर्म और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अप्रतिम बलिदान दिए। गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों की शहादत भारत की इतिहास धारा में अमिट है, जहां दो युद्धभूमि में वीरगति को प्राप्त हुए और दो नन्हे राजकुमारों को जीवित दीवार में चुनवा दिया गया। इसी बलिदान की स्मृति को जीवित रखने के लिए देशभर में प्रतिवर्ष वीर बाल दिवस मनाए जाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कार्यक्रम में सिख समुदाय की सेवा–परंपरा की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आपदाओं और संकटों के समय गुरुद्वारों द्वारा किए गए सेवा कार्य, विशेषकर कोरोना महामारी के दौरान लाखों लोगों के लिए प्रतिदिन लंगर उपलब्ध कराना, मानवता की अनुपम मिसाल है।

उन्होंने कहा कि नीलम चौक का नया नाम श्री गुरु तेग बहादुर चौक आने वाली पीढ़ियों को उन वीरों की याद दिलाता रहेगा, जिन्होंने देश और धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया। यह परिवर्तन केवल एक नामकरण नहीं, बल्कि उन मूल्यों और त्याग की स्मृति को सम्मान देने का संकल्प है, जिनके कारण आज हम स्वतंत्रता का आनंद ले पा रहे हैं।

बड़खल विधायक धनेश अदलखा ने कहा कि फरीदाबाद के एनआईटी क्षेत्र में स्थित नीलम चौक का नाम आज औपचारिक रूप से श्री गुरु तेग बहादुर चौक घोषित किया गया। यह घोषणा केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर द्वारा स्थानीय जनप्रतिनिधियों, संगत और नागरिकों की उपस्थिति में की गई। यह निर्णय गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत वर्षगांठ पर उन्हें समर्पित दिवस के रूप में लिया गया है। उन्होंने कहा कि फरीदाबाद की बहुधर्मी और बहुसांस्कृतिक पहचान को सिख समुदाय ने सदैव मजबूती दी है। शहर में गुरुद्वारा साहिब की उपस्थिति लोगों के लिए भरोसे और एकता का प्रतीक है। उन्होंने यह भी बताया कि जल्द ही इसी चौक से थोड़ा आगे ‘गुरु तेग बहादुर द्वार के निर्माण का शिलान्यास किया जाएगा, ताकि गुरु साहिब की शहादत और मानवीय मूल्यों को नई पीढ़ी तक प्रेरणादायक रूप में पहुंचाया जा सके। इसके अतिरिक्त सलूजा साहिब पेट्रोल पंप से केसी रोड तक की सड़क को ‘बाबा बंदा सिंह बहादुर मार्ग नाम देने की भी बात सरकार से चल रही है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में वैश्विक स्तर पर गुरुद्वारों द्वारा की गई सेवा को भी मानवता की मिसाल के रूप में याद किया गया।

एनआईटी विधायक सतीश फागना ने कहा कि फरीदाबाद के ऐतिहासिक नीलम चौक, जिसे अब आधिकारिक रूप से श्री गुरु तेग बहादुर चौक नाम दिया गया है, को लेकर क्षेत्र में हर्ष और सम्मान का वातावरण देखने को मिला। उन्होंने कहा कि यह स्थान लंबे समय से ‘नीलम चौक’ के नाम से जाना जाता था, जबकि आज यहां न तो नीलम नाम की कोई पहचान बची थी और न ही इसका पूर्व स्वरूप। ऐसे में यह बदलाव शहर की भावना और श्रद्धा को सम्मान देने वाला निर्णय है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के गुरुद्वारों और संगत की यह लंबे समय से मांग थी कि शहर के प्रमुख चौकों का नाम सिख शहीदों और महान विभूतियों के नाम पर रखा जाए। सरकार द्वारा इस मांग को स्वीकार करते हुए नीलम चौक का नाम बदलकर गुरु तेग बहादुर चौक रखना पूरे समुदाय के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहादत वर्षगांठ के उपलक्ष में लिया गया है। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी की शहादत मानवता, साहस और धर्म–रक्षा का अमर प्रतीक है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। चौक का यह नया नाम आने वाली पीढ़ियों को उनके आदर्शों की निरंतर याद दिलाता रहेगा। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब के मूल्यों—सत्य, त्याग, सेवा और समाज सुधार—को आत्मसात करते हुए हम सभी को कुरीतियों को समाप्त कर एक बेहतर समाज का निर्माण करना चाहिए।

इस अवसर पर पार्षद सुमन बाला, जसवंत सिंह, सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के सदस्य और अन्य कई पार्षदगण और अन्य कई गणमान्य व्यक्तिगण मौजूद रहे।

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