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संवाददाता – Divyanshu Ojha (Journalist)

फरीदाबाद जिले के पृथला और तिगांव विधानसभा क्षेत्रों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को लेकर चल रही बहस एक बार फिर तेज हो गई है। इसी क्रम में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की जिला इकाई ने ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान चलाकर ग्रामीण मजदूरों को मनरेगा से जुड़े मौजूदा बदलावों की जानकारी दी।

जिला कांग्रेस अध्यक्ष बलजीत कौशिक के नेतृत्व में कांग्रेस की एक टीम ने पृथला और तिगांव विधानसभा क्षेत्रों के पांच गांव—जुन्हेड़ा, कौराली, घरोड़ा, मंधावली और बदरौला—का दौरा किया। इस दौरान ग्रामीणों के साथ संवाद कर उन्हें मनरेगा से जुड़े विभिन्न पहलुओं, योजनाओं के क्रियान्वयन और मजदूरों पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में अवगत कराया गया।


ग्रामीणों से सीधा संवाद, मनरेगा पर चर्चा

कांग्रेस नेताओं ने गांव-गांव जाकर मजदूरों और ग्रामीण परिवारों से सीधा संवाद किया। इस दौरान मनरेगा के नाम, स्वरूप और कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों पर चर्चा की गई। जिला कांग्रेस अध्यक्ष बलजीत कौशिक ने कहा कि ग्रामीण रोजगार योजनाएं केवल आर्थिक सहायता का साधन नहीं होतीं, बल्कि ग्रामीण समाज की आजीविका और स्थिरता से जुड़ी होती हैं।

उन्होंने ग्रामीणों को बताया कि मनरेगा योजना की शुरुआत वर्ष 2006 में हुई थी और इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराना था, ताकि मजदूरों को अपने ही गांव में काम मिल सके।


कांग्रेस का पक्ष: मजदूर हितों से जुड़ी योजना

बलजीत कौशिक ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का मानना है कि मनरेगा जैसी योजनाएं ग्रामीण मजदूरों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह होती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों के दौरान इस योजना को मांग-आधारित रखा गया था, जिसमें पंजीकरण कराने वाले पात्र मजदूरों को काम उपलब्ध कराने का प्रावधान था।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में कई स्थानों पर काम के अवसर सीमित हो रहे हैं, जिससे ग्रामीण मजदूरों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, यदि योजना के स्वरूप में बदलाव होते हैं, तो उसका सीधा असर गरीब और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ता है।


प्रशासनिक बदलावों पर सवाल

कांग्रेस नेताओं ने गांवों में यह भी कहा कि मनरेगा से जुड़े कुछ प्रशासनिक बदलावों को वे केवल तकनीकी बदलाव नहीं मानते, बल्कि इसे रोजगार की गारंटी को प्रभावित करने वाला कदम बताते हैं। उन्होंने ग्रामीणों को यह जानकारी दी कि पहले यह योजना पूरी तरह से मांग-आधारित थी, जबकि अब राज्यों को मिलने वाले कार्य-दिवसों को लेकर अलग-अलग प्रावधान सामने आ रहे हैं।

इस दौरान यह भी कहा गया कि कांग्रेस पार्टी इन मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाती रहेगी और मजदूरों की आवाज को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगी।


विरोध दर्ज कराने की बात

बलजीत कौशिक ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मनरेगा से जुड़े मुद्दों पर लगातार अपनी बात रख रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पार्टी को लगता है कि किसी योजना से मजदूरों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं, तो वह संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीकों से विरोध दर्ज कराएगी।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर संसद तक अपनी बात रखने की रणनीति अपनाती है और आगे भी मजदूरों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहेगी।


गांवों में हुआ स्वागत

इस जनसंपर्क अभियान के दौरान कई गांवों में कांग्रेस नेताओं का स्थानीय ग्रामीणों द्वारा स्वागत भी किया गया। जुन्हेड़ा गांव में रमेश कौशिक और पूर्व सरपंच ब्रह्मनंद कौशिक, कौराली में मनोज भाटी, मंधावली में जयभगवान कौशिक, बदरौला में आजाद सिंह (पूर्व ब्लॉक समिति सदस्य) और गजराज सिंह (पूर्व सरपंच) तथा घरोड़ा में विनोद शर्मा और पवन त्यागी द्वारा पारंपरिक रूप से पगड़ी पहनाकर स्वागत किया गया।

ग्रामीणों ने नेताओं को भरोसा दिलाया कि वे ग्रामीण मुद्दों को लेकर संवाद बनाए रखने के पक्ष में हैं और अपनी समस्याओं को लोकतांत्रिक तरीके से उठाते रहेंगे।


कांग्रेस टीम की मौजूदगी

इस अभियान के दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष बलजीत कौशिक के साथ कांग्रेस की जिला और ब्लॉक स्तर की टीम भी मौजूद रही। इनमें विनोद कौशिक, देवेंद्र दीक्षित, पूर्व पार्षद अनिल शर्मा, कालीचरण, दशरथ, जीतराम, देवीराम, रामरतन, गोकुलचंद, मूलचंद, सोहनपाल, धनीराम और जगपाल सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल थे।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस तरह के जनसंपर्क अभियान आगे भी जारी रहेंगे, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक समस्याओं को समझा जा सके।


राजनीतिक संदर्भ में मनरेगा

मनरेगा देश की प्रमुख ग्रामीण रोजगार योजनाओं में से एक है, जिस पर समय-समय पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं। जहां एक ओर इसे ग्रामीण रोजगार का महत्वपूर्ण साधन माना जाता है, वहीं इसके क्रियान्वयन, बजट और कार्यप्रणाली को लेकर अलग-अलग दलों की अलग-अलग राय रही है।

इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से राजनीतिक दल अपने-अपने दृष्टिकोण को जनता के सामने रखते हैं, जिससे लोकतांत्रिक विमर्श को बल मिलता है।


निष्कर्ष

पृथला और तिगांव विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस द्वारा चलाया गया यह जनसंपर्क अभियान मनरेगा जैसे मुद्दों पर ग्रामीणों के साथ संवाद स्थापित करने का प्रयास रहा। इस दौरान योजना के इतिहास, वर्तमान स्थिति और संभावित प्रभावों पर चर्चा की गई। ऐसे कार्यक्रम यह दर्शाते हैं कि ग्रामीण रोजगार और आजीविका से जुड़े विषय आज भी राजनीतिक और सामाजिक बहस का अहम हिस्सा बने हुए हैं।

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