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फरीदाबाद, 17 फरवरी 2026 

यहाँ पर एक बड़ा साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें निवेश के नाम पर लोगों को आकर्षित कर कुल 50 लाख 60 हजार रुपये की ठगी की गई। इस मामले में साइबर थाना एनआईटी की टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार व्यक्तियों की पहचान अमान हुसैन (34), जो आगरा, उत्तर प्रदेश का निवासी है, और अमन कौशल (21), जो गांधी नगर, मथुरा, और वर्तमान में गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश में रहता है, के रूप में हुई है। जांच में पता चला है कि ठगी की राशि में से 25 लाख रुपये आरोपियों के बैंक खाते में ट्रांसफर हुए थे।

फरीदाबाद पुलिस ने साइबर अपराधों पर रोक लगाने के लिए जो विशेष अभियान चलाया है, उसमें यह एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन निवेश और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग बढ़ने के साथ-साथ साइबर ठगी के मामलों में भी तेजी आ गई है। ऐसे में आम लोगों को सतर्क रहना बेहद जरूरी है।

पुलिस प्रवक्ता के मुताबिक, सेक्टर-22, फरीदाबाद के एक व्यक्ति ने साइबर थाना एनआईटी में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 6 जुलाई 2025 को उन्हें व्हाट्सएप के माध्यम से एक ऐप आधारित निवेश ग्रुप “IIFL कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड” से जोड़ा गया। इसके बाद उनके लिए एक ट्रेडिंग अकाउंट खोला गया और निवेश संबंधी सलाह देने के लिए उन्हें “VIP सर्विस ग्रुप 710” नामक व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल किया गया।

ग्रुप में मौजूद कथित विशेषज्ञों ने उन्हें 2-3 महीनों में 850 प्रतिशत तक मुनाफा कमाने का भरोसा दिलाया। लगातार संदेशों, फर्जी स्क्रीनशॉट और लाभ के आंकड़ों से उन्हें विश्वास में लिया गया। लालच में आकर उन्होंने आरोपियों द्वारा बताए गए विभिन्न बैंक खातों में कुल 50,60,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए।

कुछ समय बाद जब शिकायतकर्ता ने अपने ट्रेडिंग अकाउंट की जांच की, तो उसमें करीब 3 करोड़ रुपये दिखाए गए। इससे उनका भरोसा और बढ़ गया। लेकिन जब उन्होंने पैसे निकालने का प्रयास किया, तो निकासी संभव नहीं हो सकी। जब उन्होंने ग्रुप के एडमिन और तथाकथित प्रतिनिधियों से संपर्क किया, तो उनसे 61 लाख रुपये कमीशन के रूप में जमा कराने की मांग की गई।

यहाँ से उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने तुरंत साइबर थाना एनआईटी में शिकायत दर्ज कराई। इसी आधार पर पुलिस ने मामले दर्ज कर जांच शुरू की। डिजिटल ट्रेल और बैंक खातों की जांच के बाद पुलिस ने आरोपियों का पता लगा लिया।

जांच में यह सामने आया कि अमान हुसैन ने अपना बैंक खाता अमन कौशल को दिया था। उसी खाते में ठगी की रकम में से 25 लाख रुपये ट्रांसफर हुए थे। पुलिस के अनुसार, अमान हुसैन जूते बेचने का काम करता है जबकि अमन कौशल बेरोजगार है। दोनों ने लालच में आकर अपना बैंक खाता साइबर ठगों को दे दिया और कमीशन के रूप में हिस्सा लेने की योजना बनाई।

पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहाँ से उन्हें छह दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। रिमांड के दौरान पुलिस यह जानने का प्रयास करेगी कि इस गिरोह में और कौन-कौन शामिल है, ठगी की रकम कहाँ-कहाँ ट्रांसफर हुई और क्या अन्य पीड़ित भी इस जाल में फंसे हुए हैं।

साइबर अपराध विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के कुछ सालों में ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी के मामलों में तेजी आई है। ठग अक्सर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी वेबसाइटों का इस्तेमाल करके लोगों को ऊँचे रिटर्न का लालच देते हैं। वे प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम और लोगो का दुरुपयोग कर भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं।

फरीदाबाद पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति या ग्रुप के माध्यम से निवेश करने से पहले उनकी सत्यता की जांच जरूर करें। अगर कोई योजना असामान्य रूप से अधिक लाभ का दावा करती है, तो उस पर संदेह करना चाहिए। पुलिस ने यह भी कहा है कि किसी भी अज्ञात खाते में धनराशि ट्रांसफर करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल कर लें और जरूरत पड़ने पर संबंधित वित्तीय संस्थान या आधिकारिक वेबसाइट से पुष्टि करें।

विशेषज्ञों के अनुसार, साइबर ठगी से बचने के लिए कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं। जैसे कि केवल आधिकारिक और विश्वसनीय प्लेटफॉर्म पर निवेश करना, अनजान लिंक पर क्लिक न करना, ओटीपी या बैंक विवरण किसी के साथ साझा न करना, और संदिग्ध गतिविधि होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस से संपर्क करना।

फरीदाबाद पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ एक मजबूत संदेश है। डिजिटल युग में जहाँ निवेश के अवसर बढ़े हैं, वहीं जोखिम भी बढ़ गए हैं। इसलिए सतर्कता और जागरूकता सबसे बड़ा बचाव है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए तकनीकी टीमों की मदद ली जा रही है। बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल डिवाइस की फोरेंसिक जांच की जा रही है। अगर जांच में अन्य राज्यों से जुड़े तार सामने आते हैं, तो संबंधित एजेंसियों के साथ संयोजन किया जाएगा।

यह मामला इस बात को स्पष्ट करता है कि अत्यधिक लाभ का लालच अक्सर भारी नुकसान में बदल सकता है। निवेश के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह लोगों की आर्थिक स्थिति और भरोसे का फायदा उठाते हैं। इसलिए निवेश से पहले पूरी जानकारी और सावधानी बरतना जरूरी है।

फरीदाबाद पुलिस ने दो आरोपियों की गिरफ्तारी से यह साबित कर दिया है कि वे साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते रहेंगे। आम जनता से भी उम्मीद की गई है कि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करते समय सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके और अन्य लोगों को ठगी से बचाया जा सके।

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