सड़क दुर्घटनाओं, चोटों और मौतों की रोकथाम के लिए फॉरेंसिक जांच, ‘नियर मिस’ विश्लेषण और वैज्ञानिक सुरक्षा उपायों पर होगा विशेष फोकस
नई दिल्ली, 15 सितंबर। सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में वैज्ञानिक एवं निवारक दृष्टिकोण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजुकेशन (IRTE) ने कॉलेज ऑफ ट्रैफिक मैनेजमेंट एंड फॉरेंसिक साइंस (CTM) के सहयोग से हरियाणा के फरीदाबाद स्थित सीटीएम परिसर में इंटरनेशनल सेंटर फॉर प्रिवेंटिव फॉरेंसिक्स, ट्रैफिक मैनेजमेंट एंड सेफ्टी साइंसेज (ICPF) की स्थापना की है। यह देश में अपनी तरह का पहला केंद्र बताया गया है।
आईसीपीएफ को एक बहुविषयक वैज्ञानिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं, गंभीर चोटों और मौतों को होने से पहले रोकने के लिए फॉरेंसिक विज्ञान, ट्रैफिक इंजीनियरिंग और सुरक्षा विज्ञान का इस्तेमाल करना है। केंद्र के माध्यम से यातायात नियमों के उल्लंघन, सड़क उपयोगकर्ताओं के बीच उच्च जोखिम वाले व्यवहार और यातायात व्यवस्था में मौजूद प्रणालीगत कमियों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा।
आईआरटीई के निदेशक डॉ. रोहित बलूजा ने कहा कि पारंपरिक व्यवस्था में आमतौर पर दुर्घटना होने के बाद उसके कारणों की जांच की जाती है, जबकि आईसीपीएफ का उद्देश्य दुर्घटना से पहले दिखाई देने वाले ‘चेतावनी संकेतों’ की पहचान करना है। उन्होंने कहा कि केंद्र में ‘नियर मिस’ यानी ऐसी घटनाएं जिनमें दुर्घटना होते-होते बची, असुरक्षित वाहन संचालन, ट्रैफिक कॉन्फ्लिक्ट और अन्य जोखिमपूर्ण गतिविधियों का अध्ययन किया जाएगा, ताकि उनके मूल कारणों को समझकर समय रहते प्रभावी रोकथाम के उपाय विकसित किए जा सकें।
फॉरेंसिक ऑडिट और ट्रैफिक इंजीनियरिंग का होगा समन्वय
आईसीपीएफ की खासियत यह होगी कि इसमें फॉरेंसिक ऑडिटिंग और ट्रैफिक इंजीनियरिंग विश्लेषण को एक साथ जोड़ा जाएगा। विशेषज्ञ सड़क उपयोगकर्ताओं के व्यवहार, सड़क एवं परिवहन ढांचे की कमियों, ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली तथा दुर्घटनाओं को प्रभावित करने वाले अन्य कारकों का एकीकृत तरीके से अध्ययन करेंगे।
इस पहल का प्रमुख उद्देश्य सड़क सुरक्षा व्यवस्था को केवल दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने वाली प्रतिक्रियात्मक प्रणाली से आगे बढ़ाकर पूर्वानुमान आधारित, निवारक और साक्ष्य-आधारित प्रणाली में परिवर्तित करना है।
‘इंटरसेप्टर एएफओआरई’ मोबाइल प्रयोगशाला भी शुरू
आईसीपीएफ के शुभारंभ के अवसर पर आईआरटीई ने ‘INTERCEPTOR AFORE’ मोबाइल प्रयोगशाला भी पेश की। यह एक विशेष फील्ड प्लेटफॉर्म है, जिसे सड़क सुरक्षा ऑडिट, दुर्घटना जांच और निवारक सुरक्षा अनुसंधान में सहयोग के लिए तैयार किया गया है।
यह मोबाइल प्रयोगशाला विशेषज्ञों को सड़कों, चौराहों और अन्य संवेदनशील एवं दुर्घटना संभावित स्थानों पर पहुंचकर वैज्ञानिक मूल्यांकन और आवश्यक डेटा एकत्र करने में मदद करेगी। इससे वास्तविक परिस्थितियों में सड़क सुरक्षा से जुड़े जोखिमों की पहचान और उनके समाधान की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने की उम्मीद है।
अरावली की पहाड़ियों में होगा केंद्र का संचालन
आईसीपीएफ का संचालन कॉलेज ऑफ ट्रैफिक मैनेजमेंट एंड फॉरेंसिक साइंस परिसर, अरावली हिल्स, सूरजकुंड-बड़खल रोड, फरीदाबाद से किया जाएगा। केंद्र को ट्रैफिक प्रबंधन विशेषज्ञों, फॉरेंसिक विशेषज्ञों, इंजीनियरों, शोधकर्ताओं, कानून प्रवर्तन एजेंसियों तथा सड़क सुरक्षा से जुड़े अन्य हितधारकों के बीच सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में विकसित किया जाएगा।
शोध, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर भी जोर
भारत में सड़क एवं परिवहन ढांचे का तेजी से विस्तार हो रहा है। इसके साथ ही सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों को कम करना लगातार एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे समय में आईसीपीएफ की स्थापना को सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
केंद्र में शोध, प्रशिक्षण, फील्ड जांच, पेशेवर क्षमता निर्माण और ज्ञान विकास से जुड़े कार्यों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। निवारक फॉरेंसिक, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञों तथा पेशेवरों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने की दिशा में भी यह केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
आईसीपीएफ और ‘इंटरसेप्टर एएफओआरई’ मोबाइल प्रयोगशाला की शुरुआत के साथ आईआरटीई और सीटीएम ने सड़क सुरक्षा के लिए एक ऐसी संस्थागत व्यवस्था विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है, जिसमें हर ‘नियर मिस’ को भविष्य की संभावित दुर्घटना को रोकने का अवसर माना जाएगा और वैज्ञानिक साक्ष्यों को सुरक्षित सड़कों एवं बेहतर परिवहन व्यवस्था की नींव बनाया जाएगा।

