घर पर है पांडुलियों का 75 वर्ष से अधिक पुराना संग्रह तो कर सकते हैं साझा : एडीसी

– ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत दुर्लभ पांडुलिपियों का डेटाबेस किया जा रहा है तैयार

– आम नागरिक पांडुलिपियों की जानकारी वेबसाइट या मोबाइल ऐप के माध्यम से कर सकते हैं शेयर

 

पलवल, 2 जून। अतिरिक्त उपायुक्त उत्सव आनंद ने बताया कि भारत सरकार ने संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत एक प्रमुख पहल के रूप में ‘ज्ञान भारतम्’ मिशन शुरू किया है। उन्होंने बताया कि ‘ज्ञान भारतम्’ मिशन के तहत भारत की समृद्ध परम्परा, सांस्कृतिक धरोहर एवं बौद्धिक विकास के महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्राचीन पाण्डुलिपियां, ताड़पत्र एवं दुर्लभ अभिलेखों के संरक्षण एवं भावी पीढिय़ों तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण कर देश में मौजूद दुर्लभ पांडुलिपियों का डेटाबेस तैयार किया जा रहा है।

अतिरिक्त उपायुक्त ने बताया कि प्राचीन हस्तलिखित धरोहर यानी पांडुलिपि। इनके माध्यम से हमें अपनी संस्कृति के बारे में पता चलता है और इतिहास से जुड़ी तमाम जानकारी मिलती है। एक तरह से यह हमारी सभ्यता का अहम हिस्सा है। इस मिशन का उद्देश्य भारत भर में शैक्षणिक संस्थानों, संग्रहालयों, पुस्तकालयों तथा निजी संग्रहों में उपलब्ध पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, प्रलेखन, संरक्षण, डिजिटलीकरण कर उन्हें सुलभ बनाना है। उन्होंने कहा कि इन पांडुलिपियों को समय के प्रभाव से बचाने के लिए उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि किसी के पास घर में 75 वर्ष या इससे अधिक पुरानी पांडुलिपियों का संग्रह है तो वो भी उन्हें साझा कर सकते हैं। ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ से जुडक़र जिले की प्राचीन विरासत के संरक्षण में योगदान दें। यदि आपके पास 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ या कोई अन्य अमूल्य प्राचीन विरासत सुरक्षित है, तो उसकी जानकारी साझा कर ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ से जुड़ें।

अतिरिक्त उपायुक्त ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में जहां भी वर्षों पुरानी पांडुलिपियां सुरक्षित हैं, जिनमें धार्मिक ग्रंथ, ऐतिहासिक दस्तावेज और पारंपरिक ज्ञान का अनमोल भंडार मौजूद है, कि पहचान की जाए ताकि उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सके। उन्होंने ‘ज्ञान भारतम मिशन’ का व्यापर स्तर पर प्रचार-प्रसार करने के भी निर्देश दिए ताकि इस मिशन में सभी की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। आमजन गूगल प्ले स्टोर पर ‘ज्ञान भारतम्’ सर्च करके ऐप डाउनलोड कर सकते हैं।

15 जून तक जारी है सर्वेक्षण का कार्य :
अतिरिक्त उपायुक्त उत्सव आनंद ने कहा कि ‘ज्ञान भारतम्’ अभियान के तहत लगभग 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपियों को प्राथमिकता दी जाएगी। पांडुलिपि सर्वेक्षण का कार्य 15 जून तक जारी रहेगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से डिजिटलीकरण और संरक्षण कार्य आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पहल से जिले की ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

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