एमडीडी ऑफ इंडिया (शक्ति वाहिनी), बाल कल्याण समिति और एएचटीयू के संयुक्त अभियान से मिली आज़ादी, दोषियों पर कानूनी कार्रवाई शुरू
पलवल, 13 जून। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर जिले में बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण अभियान चलाते हुए एमडीडी ऑफ इंडिया (शक्ति वाहिनी), बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) पलवल तथा मानव तस्करी निरोधक इकाई (एएचटीयू) के संयुक्त प्रयासों से 205 बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया गया। यह कार्रवाई राज्य सरकार द्वारा जून माह को बाल श्रम विरोधी ‘एक्शन मंथ’ के रूप में मनाने संबंधी जारी निर्देशों के तहत की गई।
अभियान के दौरान बाल मजदूरी की शिकायत वाले क्षेत्रों में व्यापक छानबीन की गई और विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कार्यरत बच्चों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। मुक्त कराए गए बच्चों की आयु 13 से 17 वर्ष के बीच बताई गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि ये बच्चे पिछले कई महीनों से अत्यंत शोषणकारी और अमानवीय परिस्थितियों में काम करने को मजबूर थे। कई स्थानों पर उनसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माहौल में लंबे समय तक काम कराया जा रहा था, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था।
रेस्क्यू के बाद संबंधित प्रतिष्ठानों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। साथ ही पीड़ित बच्चों के पुनर्वास, मुआवजा, शिक्षा और अन्य अधिकारों से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी जारी है।
अभियान के समानांतर एमडीडी ऑफ इंडिया (शक्ति वाहिनी) और बाल कल्याण समिति पलवल द्वारा जिले में व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिनमें विभिन्न सरकारी विभागों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, सामुदायिक नेताओं और ग्रामीणों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। संगठन बाल अधिकारों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए कार्यरत देश के सबसे बड़े नेटवर्क Just Rights for Children (JRC) के सहयोगी के रूप में भी कार्य कर रहा है।
इस अवसर पर एमडीडी ऑफ इंडिया (शक्ति वाहिनी) पलवल के निदेशक सुरिंदर सिंह मान तथा बाल कल्याण समिति के सदस्य विक्रम वशिष्ठ, निशांत गौड़, क्षमा शर्मा और नीतू सिंह ने कहा कि बाल श्रम बच्चों से उनका बचपन, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन का अधिकार छीन लेता है। उन्होंने कहा कि शोषण से मुक्त कराए गए प्रत्येक बच्चे के अधिकारों और गरिमा की आज पुनर्स्थापना हुई है।
उन्होंने कहा, “बच्चों की जगह फैक्ट्रियों, ढाबों और कार्यस्थलों पर नहीं, बल्कि स्कूलों में है। बाल तस्करी और बाल मजदूरी एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए अपराध हैं। इनकी रोकथाम के लिए प्रशासन, पुलिस और नागरिक समाज संगठनों के बीच निरंतर समन्वय आवश्यक है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि प्रत्येक मुक्त कराए गए बच्चे को समुचित पुनर्वास, शिक्षा और संरक्षण मिले।”
विशेषज्ञों के अनुसार बाल तस्करी बाल मजदूरी का प्रमुख कारण है। इसी वजह से जून माह के दौरान नागरिक समाज संगठन पुलिस और प्रशासन के साथ मिलकर संभावित तस्करी नेटवर्कों और बाल श्रम से जुड़े गिरोहों की पहचान एवं निगरानी का कार्य भी तेज करते हैं।
उल्लेखनीय है कि जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के देशव्यापी सहयोगी संगठनों के साझा सूचना एवं निगरानी तंत्र की मदद से अप्रैल 2023 से मार्च 2026 के बीच 1.45 लाख से अधिक बच्चों को तस्करी और शोषण से मुक्त कराया जा चुका है, जिनमें बड़ी संख्या उन बच्चों की थी जिन्हें बाल मजदूरी के लिए मजबूर किया गया था।

