सूरजकुंड (फरीदाबाद) | 03 फरवरी 2026
39वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड आत्मनिर्भर शिल्प मेला–2026 में मंगलवार की शाम संगीत प्रेमियों के लिए खास बन गई, जब छोटी चौपाल पर प्रसिद्ध पंजाबी गायिका मन्नत नूर ने अपनी सुरीली आवाज़ से समां बांध दिया। लोक, सूफी और आधुनिक संगीत के रंगों से सजी यह सांस्कृतिक संध्या दर्शकों के लिए एक यादगार अनुभव साबित हुई।
कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा तथा हरियाणा पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पर्यटक, संगीत प्रेमी और परिवार शामिल हुए। दिनभर शिल्प, हस्तकला और खरीदारी की चहल-पहल के बाद शाम को जब संगीत की शुरुआत हुई, तो पूरा पंडाल तालियों और उत्साह से गूंज उठा।
छोटी चौपाल पर संगीत से सजी यादगार शाम
मन्नत नूर के मंच पर आते ही दर्शकों में खास उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने अपने लोकप्रिय पंजाबी गीत “वे तू लौंग, वे मैं लाची” से की, जिसने पहले ही पल माहौल को जीवंत बना दिया। इसके बाद “तेरे पीछे आ गवाची” जैसे गीतों पर दर्शक झूमते नजर आए।
जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, मन्नत नूर ने “जब दिल दिया गल्लां करें तेरे नाल” और “तू होवे सामने मैं होवा चरणा नाल” जैसे सुपरहिट गीतों की प्रस्तुति दी। इन गीतों पर पंडाल में मौजूद श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ गायिका का उत्साहवर्धन किया। कई दर्शक गीतों के साथ-साथ गुनगुनाते नजर आए, जिससे कार्यक्रम में सहभागिता का भाव और मजबूत हुआ।
गायकी में दिखा लोक और आधुनिक संगीत का संतुलन
मन्नत नूर की प्रस्तुति की खास बात यह रही कि उन्होंने अपने कार्यक्रम में पंजाबी लोक संगीत और आधुनिक धुनों का संतुलन बनाए रखा। उनकी आवाज़ की मिठास और मंच पर सहज प्रस्तुति ने दर्शकों को बांधे रखा।
संगीत विशेषज्ञों के अनुसार, यही संतुलन उनकी लोकप्रियता का बड़ा कारण है। वे पारंपरिक लोक भावनाओं को आधुनिक संगीत के साथ इस तरह प्रस्तुत करती हैं कि हर आयु वर्ग का श्रोता उनसे जुड़ाव महसूस करता है।
दर्शकों की उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया
कार्यक्रम के दौरान छोटी चौपाल पर मौजूद दर्शकों का उत्साह देखने लायक था। कोई तालियों के साथ गीतों का आनंद ले रहा था, तो कोई अपने मोबाइल कैमरे में इस पल को कैद करता नजर आया।
पर्यटकों का कहना था कि सूरजकुंड मेला केवल खरीदारी और हस्तकला तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की सांस्कृतिक संध्याएं मेले को एक संपूर्ण अनुभव बनाती हैं। मन्नत नूर की प्रस्तुति ने इस अनुभव को और खास बना दिया।
अन्य कलाकारों की विविध प्रस्तुतियां
कला एवं सांस्कृतिक अधिकारी डॉ. दीपिका रानी ने जानकारी देते हुए बताया कि मन्नत नूर के अलावा अन्य कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।
कार्यक्रम में शामिल प्रमुख प्रस्तुतियां इस प्रकार रहीं:
सूफी बैंड की भावपूर्ण गायकी
पाली नाथ एंड पार्टी की लोक प्रस्तुति
रिंकू डेरु पार्टी के पारंपरिक गीत
डॉ. दिनेश रहेजा द्वारा ग़ज़ल गायन
सतीश हरियाणवी का हास्य अभिनय
तनु शर्मा पार्टी द्वारा हरियाणवी सांस्कृतिक लोकनृत्य
कलई वाणी पार्टी द्वारा शास्त्रीय नृत्य
अभिषेक राठौर थिएटर पार्टी द्वारा नाटक “सूटकेस”
इन सभी प्रस्तुतियों ने मिलकर सांस्कृतिक संध्या को बहुआयामी बना दिया।
संगीत, नृत्य और रंगमंच का संगम
कार्यक्रम की खासियत यह रही कि यहां केवल गायन ही नहीं, बल्कि नृत्य, रंगमंच और वाद्य संगीत का भी सुंदर समावेश देखने को मिला।
शेखर श्रीवास्तव, निरोत्तम और अंश ने गिटार की मधुर धुनों से वातावरण को संगीतमय बना दिया, वहीं जादूगर अशोक सम्राट ने अपनी जादूगरी से बच्चों और बड़ों सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस विविधता ने यह साबित किया कि सूरजकुंड मेले की सांस्कृतिक संध्याएं हर वर्ग के दर्शकों को ध्यान में रखकर तैयार की जाती हैं।
युवाओं और परिवारों के लिए खास अनुभव
सांस्कृतिक संध्या में युवाओं की बड़ी संख्या देखने को मिली। पंजाबी गीतों पर युवा दर्शक झूमते नजर आए, जबकि परिवारों और बुजुर्गों ने भी शांत भाव से संगीत का आनंद लिया।
कई अभिभावकों का कहना था कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों को भारतीय और क्षेत्रीय संस्कृति से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम हैं। आधुनिक संगीत के साथ लोक संस्कृति का यह संगम नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में सहायक साबित हो रहा है।
सूरजकुंड मेला: केवल शिल्प नहीं, संस्कृति का उत्सव
39वां अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड आत्मनिर्भर शिल्प मेला अब केवल शिल्प और व्यापार तक सीमित नहीं रहा। यह आयोजन कला, संस्कृति और मनोरंजन का एक बड़ा मंच बन चुका है।
दिन में जहां शिल्पकार अपने हस्तनिर्मित उत्पादों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रहे हैं, वहीं शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम मेले को जीवंत बनाए रखते हैं। यही संतुलन सूरजकुंड मेले को अन्य आयोजनों से अलग पहचान देता है।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की निरंतर श्रृंखला
यह उल्लेखनीय है कि सूरजकुंड शिल्प मेला 15 फरवरी 2026 तक जारी रहेगा। इस दौरान प्रतिदिन मुख्य चौपाल, छोटी चौपाल और महा चौपाल पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
इन कार्यक्रमों का आयोजन आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल, महानिदेशक के. एम. पांडुरंग तथा अतिरिक्त निदेशक विवेक कालिया के दिशा-निर्देशन में किया जा रहा है।
पर्यटकों को मिल रहा समृद्ध सांस्कृतिक अनुभव
देश-विदेश से आए पर्यटकों का कहना है कि सूरजकुंड मेला उन्हें एक ही स्थान पर विभिन्न संस्कृतियों को देखने और समझने का अवसर देता है।
मन्नत नूर की प्रस्तुति जैसी संध्याएं इस अनुभव को और गहरा बनाती हैं। संगीत, नृत्य और रंगमंच के माध्यम से पर्यटक भारतीय संस्कृति के विविध रंगों से परिचित हो रहे हैं।
सांस्कृतिक पहचान को मिल रही मजबूती
इस तरह के आयोजनों से न केवल कलाकारों को मंच मिलता है, बल्कि क्षेत्रीय संगीत और लोक कलाओं को भी नई पहचान मिलती है। मन्नत नूर जैसी लोकप्रिय गायिकाओं की प्रस्तुतियां युवाओं को लोक और क्षेत्रीय संगीत की ओर आकर्षित करती हैं।
यादगार रही छोटी चौपाल की यह संध्या
39वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड आत्मनिर्भर शिल्प मेले में छोटी चौपाल पर आयोजित यह संगीतमय शाम दर्शकों के लिए लंबे समय तक यादगार बनी रहने वाली है। मन्नत नूर की सुरीली आवाज़, दर्शकों की भागीदारी और अन्य कलाकारों की विविध प्रस्तुतियों ने इस सांस्कृतिक संध्या को खास बना दिया।

