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फरीदाबाद | 3 फ़रवरी 2026

39वें अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर सूरजकुंड शिल्प मेला–2026 में इस वर्ष केवल शिल्प, संस्कृति और कला ही नहीं, बल्कि मीडिया प्रबंधन और आयोजन व्यवस्था भी चर्चा का विषय बनी हुई है। मेले में स्थापित मीडिया सेंटर और समग्र आयोजन व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है, जिसे वैश्विक दृष्टिकोण से एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

कैमरून (मध्य अफ्रीका) से आए प्रतिष्ठित होलिस्टिक मेडिसिन विशेषज्ञ एवं प्रोफेसर डॉ. गिडिउन पेलुलेघो ने सूरजकुंड शिल्प मेले के दौरान मीडिया सेंटर का दौरा किया और इसकी कार्यप्रणाली, समन्वय और सूचना प्रबंधन व्यवस्था की खुले तौर पर प्रशंसा की। उनका यह दौरा इस बात का प्रमाण माना जा रहा है कि सूरजकुंड मेला अब केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त आयोजन मॉडल के रूप में उभर रहा है।


मीडिया सेंटर बना प्रभावी संवाद का केंद्र

सूरजकुंड शिल्प मेले में स्थापित मीडिया सेंटर इस वर्ष विशेष रूप से सुचारू और आधुनिक स्वरूप में कार्य कर रहा है। यहां देश-विदेश से आए पत्रकारों, मीडिया प्रतिनिधियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े लोगों को समयबद्ध, तथ्यात्मक और प्रमाणिक सूचनाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

डॉ. गिडिउन पेलुलेघो ने मीडिया सेंटर का दौरा करते हुए हरियाणा जनसंपर्क विभाग की टीम से बातचीत की और उनके पेशेवर दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि वही आयोजन को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का माध्यम बनती है।

उनका मानना था कि मीडिया सेंटर का सुव्यवस्थित संचालन आयोजन की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को बढ़ाता है।


प्रभावी सूचना प्रबंधन की सराहना

डॉ. पेलुलेघो ने विशेष रूप से मीडिया सेंटर में अपनाई गई सूचना प्रबंधन प्रणाली की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि:

  • सूचनाओं का समय पर वितरण

  • विभिन्न भाषाओं और माध्यमों के अनुरूप सामग्री

  • मीडिया कर्मियों के लिए सुविधाजनक वातावरण

किसी भी अंतरराष्ट्रीय आयोजन की सफलता में अहम भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार, सूरजकुंड मेले में मीडिया से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं इस स्तर की हैं कि यहां से निकलने वाली सूचनाएं वैश्विक दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंच सकती हैं।


अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए उदाहरण

कैमरून से आए इस अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ ने कहा कि इस प्रकार की मीडिया व्यवस्था अन्य देशों के आयोजनों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि अक्सर सांस्कृतिक आयोजनों में मंच, कलाकार और प्रदर्शनी पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, लेकिन मीडिया प्रबंधन को उतना महत्व नहीं मिलता।

सूरजकुंड मेले में मीडिया सेंटर को जिस स्तर पर संगठित किया गया है, वह यह दर्शाता है कि आयोजन की योजना बनाते समय हर पहलू पर समान रूप से ध्यान दिया गया है।


भारत की जनसंपर्क प्रणालियों की प्रशंसा

डॉ. गिडिउन पेलुलेघो ने इस अवसर पर भारत की जनसंपर्क और संवाद प्रणालियों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत जिस तरह से बड़े आयोजनों के माध्यम से संस्कृति, संवाद और सहयोग को बढ़ावा दे रहा है, वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहनीय है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत जैसे बहुसांस्कृतिक देश में इस प्रकार के आयोजन केवल मनोरंजन या व्यापार तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे देशों के बीच संवाद का सेतु बनते हैं। सूरजकुंड मेला इसी दिशा में एक सशक्त मंच के रूप में उभर रहा है।


सांस्कृतिक उत्सव से आगे एक वैश्विक मंच

डॉ. पेलुलेघो के अनुसार, सूरजकुंड शिल्प मेला केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सांस्कृतिक कूटनीति का भी प्रभावी माध्यम बन चुका है। यहां विभिन्न देशों के शिल्पकार, कलाकार, विशेषज्ञ और पर्यटक एक-दूसरे से संवाद करते हैं, जिससे आपसी समझ और सहयोग को बढ़ावा मिलता है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से:

  • सांस्कृतिक विविधता को सम्मान मिलता है

  • वैश्विक साझेदारी मजबूत होती है

  • और स्थानीय पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच मिलता है


पर्यटन विभाग की व्यवस्थाओं की सराहना

अपने दौरे के दौरान डॉ. पेलुलेघो ने हरियाणा पर्यटन विभाग द्वारा की गई व्यवस्थाओं की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि:

  • आयोजन स्थल की साफ-सफाई

  • अतिथियों के लिए सुविधाएं

  • सुरक्षा व्यवस्था

  • और कार्यक्रमों का समन्वय

बेहद संतुलित और व्यवस्थित है। उनके अनुसार, किसी भी अंतरराष्ट्रीय आयोजन में मेहमानों की सुविधा और सुरक्षा सबसे अहम होती है, और सूरजकुंड मेले में इन पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया है।


आयोजन गुणवत्ता का वैश्विक संदेश

डॉ. पेलुलेघो ने कहा कि सूरजकुंड शिल्प मेला हरियाणा सरकार की आयोजन क्षमता और प्रबंधन कौशल को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के आयोजन यह संदेश देते हैं कि भारत और हरियाणा बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को सफलतापूर्वक आयोजित करने में पूरी तरह सक्षम हैं।

उनके अनुसार, जब किसी आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिलती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव भविष्य के आयोजनों और वैश्विक सहभागिता पर भी पड़ता है।


मीडिया और आयोजन: एक मजबूत संयोजन

विशेषज्ञों का मानना है कि सूरजकुंड मेले की सफलता के पीछे मीडिया और आयोजन प्रबंधन का संतुलित संयोजन एक बड़ा कारण है। मीडिया सेंटर न केवल सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रहा है, बल्कि आयोजन की सकारात्मक छवि को भी सशक्त बना रहा है।

डॉ. पेलुलेघो ने इस बात पर जोर दिया कि जब मीडिया और प्रशासन मिलकर कार्य करते हैं, तो किसी भी आयोजन की पहुंच और प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।


अंतरराष्ट्रीय पहचान को मिल रही मजबूती

सूरजकुंड शिल्प मेले को मिल रही अंतरराष्ट्रीय सराहना यह दर्शाती है कि यह आयोजन अब केवल क्षेत्रीय या राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहा। मीडिया सेंटर और आयोजन व्यवस्था की प्रशंसा से मेले की वैश्विक पहचान और अधिक मजबूत हो रही है।

इससे आने वाले वर्षों में:

  • अधिक देशों की भागीदारी

  • अंतरराष्ट्रीय मीडिया की बढ़ती रुचि

  • और वैश्विक सहयोग

की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।


संवाद और सहयोग का सशक्त माध्यम

डॉ. पेलुलेघो ने कहा कि सूरजकुंड मेला देशों के बीच संवाद और सहयोग का एक प्रभावी मंच बन रहा है। यहां संस्कृति, शिल्प और कला के माध्यम से जो संवाद होता है, वह औपचारिक बैठकों से कहीं अधिक प्रभावशाली होता है।

उनके अनुसार, ऐसे आयोजनों से वैश्विक समुदाय के बीच आपसी समझ और सम्मान को बढ़ावा मिलता है।


भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत

मीडिया सेंटर और आयोजन व्यवस्था को मिली अंतरराष्ट्रीय सराहना यह संकेत देती है कि सूरजकुंड शिल्प मेला भविष्य में और अधिक ऊंचाइयों को छू सकता है। बेहतर प्रबंधन, वैश्विक सहभागिता और पेशेवर दृष्टिकोण इसे विश्व स्तर के प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों की श्रेणी में स्थापित कर सकता है।


आयोजन क्षमता का प्रमाण

39वें अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर सूरजकुंड शिल्प मेले में मीडिया सेंटर की प्रशंसा केवल एक तारीफ नहीं, बल्कि आयोजन की गुणवत्ता और प्रशासनिक क्षमता का प्रमाण मानी जा रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि हरियाणा सरकार और संबंधित विभागों द्वारा की गई योजना और क्रियान्वयन प्रभावी रहे हैं।

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