फरीदाबाद, 1 फरवरी।
संत शिरोमणि गुरु रविदास की शिक्षाएं आज भी समाज को समानता, सद्भाव और नैतिकता का मार्ग दिखा रही हैं। यह विचार हरियाणा सरकार में मंत्री राजेश नागर ने मंझावली गांव में आयोजित संत गुरु रविदास की 649वीं जयंती के अवसर पर व्यक्त किए। यह कार्यक्रम रविदास समाज विकास जागृति ट्रस्ट द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें क्षेत्र के 52 गांवों से आए समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य संत गुरु रविदास के विचारों और सामाजिक संदेश को जन-जन तक पहुंचाना तथा समाज में आपसी भाईचारे और समरसता को मजबूत करना रहा।
संत गुरु रविदास की शिक्षाओं की प्रासंगिकता
मंत्री राजेश नागर ने अपने संबोधन में कहा कि संत गुरु रविदास की शिक्षाएं किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे पूरे समाज को समानता और मानवता का संदेश देती हैं। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने अपने जीवन और वचनों के माध्यम से यह बताया कि मनुष्य की पहचान उसके कर्म, आचरण और विचारों से होती है, न कि उसकी जाति या सामाजिक स्थिति से।
उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में, जब समाज अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, संत गुरु रविदास के विचार सामाजिक एकता और आपसी सम्मान को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
समाज में समरसता और समानता पर जोर
कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि संत महापुरुषों की जयंती केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह अवसर होना चाहिए—
उनके विचारों को समझने का
सामाजिक कुरीतियों पर चिंतन करने का
और समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित होने का
राजेश नागर ने कहा कि संत गुरु रविदास ने जीवनभर सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाई और समरस समाज की कल्पना की। उनकी शिक्षाएं आज भी सामाजिक न्याय, आपसी सम्मान और मानव मूल्यों को मजबूत करने का कार्य कर रही हैं।
शिक्षा को सामाजिक उत्थान का माध्यम
कार्यक्रम के दौरान रविदास समाज विकास जागृति ट्रस्ट की ओर से जानकारी दी गई कि संत गुरु रविदास की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से ट्रस्ट का गठन किया गया है। इस ट्रस्ट के अंतर्गत क्षेत्र के 52 गांवों को जोड़ा गया है, ताकि समाज के लोगों को शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।
ट्रस्ट ने यह लक्ष्य निर्धारित किया है कि—
विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में स्कूलों की स्थापना
जिले में एक कॉलेज की स्थापना
और प्रत्येक गांव में समाज के लोगों को संगठित करना
जैसे प्रयासों के माध्यम से शैक्षिक और सामाजिक विकास को गति दी जाए।
गांव-गांव तक संगठन निर्माण की पहल
जानकारी के अनुसार, ट्रस्ट द्वारा प्रत्येक गांव में समाज के आठ-आठ लोगों को जोड़कर समितियां बनाई जा रही हैं। इसका उद्देश्य यह है कि—
समाज की समस्याओं को संगठित रूप से उठाया जा सके
शिक्षा और सामाजिक सुधार से जुड़े कार्यों को स्थानीय स्तर पर आगे बढ़ाया जा सके
युवाओं को सकारात्मक दिशा दी जा सके
इस पहल को समाज के लोगों ने एक दीर्घकालिक और रचनात्मक कदम बताया।
व्यापक जनभागीदारी के साथ आयोजन
इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाज के लोग, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने संत गुरु रविदास के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से परिचित कराते हैं।
सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक पहचान
वक्ताओं ने कहा कि संत गुरु रविदास की जयंती जैसे आयोजनों से—
समाज में सामाजिक चेतना का विकास होता है
सांस्कृतिक पहचान मजबूत होती है
और आपसी भाईचारे की भावना को बढ़ावा मिलता है
उन्होंने यह भी कहा कि संतों और महापुरुषों की शिक्षाएं किसी राजनीतिक या वैचारिक दायरे में सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें मानवता के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
भविष्य की दिशा और समाज की भूमिका
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि समाज के प्रत्येक वर्ग को—
शिक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए
सामाजिक सौहार्द बनाए रखना चाहिए
और संत गुरु रविदास के विचारों को अपने दैनिक जीवन में अपनाना चाहिए
इससे न केवल समाज का सर्वांगीण विकास संभव है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी एक सकारात्मक दिशा मिल सकती है।
आयोजन में उपस्थित प्रमुख लोग
कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, ग्राम पंचायतों के पदाधिकारी, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने संत गुरु रविदास की शिक्षाओं को समाज के लिए मार्गदर्शक बताते हुए ऐसे आयोजनों को निरंतर आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

