फरीदाबाद, 1 फरवरी।
39वां सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला इस वर्ष शिल्प, स्वाद और संस्कृति के साथ-साथ आकर्षक सेल्फी पॉइंट्स के कारण भी पर्यटकों का ध्यान खींच रहा है। ‘लोकल फॉर ग्लोबल–आत्मनिर्भर भारत की पहचान’ थीम के साथ आयोजित इस मेले में देश-विदेश से आए आगंतुक पारंपरिक हस्तशिल्प, लोक कलाओं और क्षेत्रीय व्यंजनों का आनंद लेने के साथ-साथ रचनात्मक रूप से तैयार किए गए फोटो स्पॉट्स पर यादगार पलों को कैमरे में कैद कर रहे हैं।
शिल्प के साथ फोटो-अनुभव का नया आयाम
सूरजकुंड की प्राकृतिक वादियों के बीच सजे इस अंतर्राष्ट्रीय आयोजन में इस बार फोटो-फ्रेंडली डिज़ाइन पर खास ध्यान दिया गया है। मेला परिसर के विभिन्न हिस्सों में बनाए गए सेल्फी पॉइंट्स न केवल सौंदर्यबोध को बढ़ाते हैं, बल्कि पर्यटकों को मेले के अनुभव से भावनात्मक रूप से भी जोड़ते हैं। परिवार, मित्र समूह और युवा पर्यटक इन स्पॉट्स पर तस्वीरें लेकर सोशल मीडिया पर साझा करते दिखाई दे रहे हैं, जिससे मेले की पहुंच डिजिटल प्लेटफॉर्म तक और मजबूत हो रही है।
थीम राज्यों की झलक: उत्तर प्रदेश और मेघालय
इस वर्ष मेले में थीम स्टेट्स के रूप में उत्तर प्रदेश और मेघालय को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया है।
उत्तर प्रदेश से प्रेरित सेल्फी पॉइंट्स में उसकी ऐतिहासिक वास्तुकला, पारंपरिक द्वार और सांस्कृतिक प्रतीकों को कलात्मक ढंग से उकेरा गया है। इन सेट-अप्स पर दिनभर पर्यटकों की भीड़ नजर आती है।
मेघालय की पहचान दर्शाने वाले सेल्फी स्पॉट्स में पारंपरिक हट्स और प्राकृतिक तत्वों का संयोजन किया गया है, जो पूर्वोत्तर भारत की विशिष्ट संस्कृति और जीवनशैली को दर्शाता है। यह संयोजन खासतौर पर प्रकृति-प्रेमी पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है।
डिजिटल सेल्फी बूथ: तकनीक और परंपरा का संगम
मेले में डिजिटल तकनीक का समावेश भी इस बार एक प्रमुख आकर्षण बना हुआ है। थीम राज्यों के डिजिटल सेल्फी बूथ पर आगंतुक क्यूआर कोड स्कैन कर अपनी तस्वीरें तुरंत डिजिटल रूप में प्राप्त कर सकते हैं।
यह सुविधा युवाओं और विदेशी पर्यटकों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय है।
कम समय में फोटो मिलने से भीड़ प्रबंधन और सुविधा—दोनों में मदद मिल रही है।
इस पहल से यह स्पष्ट है कि मेला परंपरा के साथ-साथ आधुनिक तकनीक को भी समान रूप से अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
पार्टनर कंट्री मिस्र की सांस्कृतिक छाप
इस वर्ष के पार्टनर कंट्री के रूप में मिस्र की संस्कृति को दर्शाने वाले सेल्फी पॉइंट्स भी मेले का प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं।
प्राचीन सभ्यता, कला और वास्तुकला से प्रेरित सजावट
पिरामिड और मिस्र के पारंपरिक प्रतीकों पर आधारित थीम
इन फोटो स्पॉट्स पर लगातार भीड़ देखने को मिल रही है, जहां पर्यटक एक अलग सांस्कृतिक अनुभव के साथ तस्वीरें खिंचवा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर बढ़ती मौजूदगी
सेल्फी पॉइंट्स ने मेले की सोशल मीडिया विज़िबिलिटी को भी बढ़ाया है। आगंतुक अपनी तस्वीरें साझा कर रहे हैं, जिससे—
मेले की ब्रांडिंग स्वाभाविक रूप से मजबूत हो रही है
दूर बैठे लोग भी आयोजन से जुड़ रहे हैं
युवाओं में मेले के प्रति रुचि बढ़ रही है
यह रुझान दिखाता है कि सांस्कृतिक आयोजनों में विज़ुअल एक्सपीरियंस की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
हर कोने में फोटो-मोमेंट
मेला परिसर में कई ऐसे कॉर्नर विकसित किए गए हैं, जहां—
शिल्प पृष्ठभूमि
रंगीन लोक-आर्ट
पारंपरिक स्थापत्य
के साथ सहज फोटो-मोमेंट बनते हैं। परिणामस्वरूप सूरजकुंड मेला इस बार केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि यादों को संजोने का अवसर भी बन गया है।
पर्यटकों का अनुभव और आयोजन की पहचान
पर्यटकों का कहना है कि शिल्प और व्यंजनों के साथ फोटो-स्पॉट्स का समावेश मेले के अनुभव को और समृद्ध बनाता है। इससे—
घूमने की रफ्तार संतुलित रहती है
परिवारों और बच्चों के लिए आकर्षण बढ़ता है
विदेशी पर्यटकों को भारतीय संस्कृति की दृश्य झलक मिलती है
आयोजकों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य आगंतुकों को अधिक समय तक मेले से जोड़े रखना और उनके अनुभव को यादगार बनाना है।
परंपरा, कला और आधुनिकता का संगम
वर्षों से सूरजकुंड मेला भारत की सांस्कृतिक विरासत, हस्तशिल्प और लोक परंपराओं का जीवंत मंच रहा है। इस वर्ष सेल्फी पॉइंट्स के जरिए परंपरा, कला और आधुनिकता का संतुलित संगम देखने को मिल रहा है, जो मेले की पहचान को और व्यापक बनाता है।

