सूरजकुंड (फरीदाबाद) | 02 फरवरी 2026
हरियाणा के प्रसिद्ध सांस्कृतिक एवं पर्यटन स्थल सूरजकुंड में आयोजित 39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला–2026 अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के कारण निरंतर दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। रविवार को मेले की छोटी चौपाल पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में संगीत, नृत्य, लोक कला और हास्य का अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने दिनभर दर्शकों को बांधे रखा।
कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा और हरियाणा पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटकों, स्थानीय नागरिकों और कला प्रेमियों ने भाग लिया। कार्यक्रमों की विविधता और कलाकारों की प्रस्तुतियों ने यह स्पष्ट किया कि सूरजकुंड शिल्प मेला केवल शिल्प और हस्तकला का मंच नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने का एक सशक्त माध्यम भी है।
वंदे मातरम से हुई कार्यक्रमों की शुरुआत
छोटी चौपाल पर दिनभर चले सांस्कृतिक आयोजनों की शुरुआत कलाकार सुरेश गंधर्व की भावपूर्ण प्रस्तुति से हुई। उन्होंने वंदे मातरम गीत की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर इस ऐतिहासिक गीत की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। इस प्रस्तुति के दौरान दर्शकों में विशेष उत्साह देखने को मिला और माहौल गंभीरता व गर्व से भर गया।
कार्यक्रम की यह शुरुआत आगे आने वाली प्रस्तुतियों के लिए एक सशक्त आधार साबित हुई, जिसने पूरे दिन के सांस्कृतिक माहौल को सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।
विक्रम सिरोहीवाल की गायकी पर झूमे दर्शक
कार्यक्रमों की श्रृंखला में प्रसिद्ध गायक विक्रम सिरोहीवाल की प्रस्तुति दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उन्होंने हिंदी और फिल्मी बॉलीवुड बैंड के लोकप्रिय गीतों की मधुर प्रस्तुति दी, जिसे सुनकर दर्शक खुद को रोक नहीं पाए।
विशेष रूप से
“तुम्हें दिल-लगी भूल जानी पड़ेगी,
मोहब्बत की राहों में आकर तो देखो…”
जैसे गीतों की प्रस्तुति के दौरान छोटी चौपाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी। गीतों के भावपूर्ण बोल और विक्रम सिरोहीवाल की सधी हुई आवाज़ ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। कई दर्शक गीतों के साथ झूमते और सुरों में सुर मिलाते नजर आए।
संगीत प्रेमियों का कहना था कि इस तरह की लाइव प्रस्तुतियां मेले के सांस्कृतिक महत्व को और अधिक बढ़ा देती हैं और दर्शकों को एक यादगार अनुभव प्रदान करती हैं।
लोक संगीत और ग्रामीण संस्कृति की झलक
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने भी खास प्रभाव छोड़ा। पाली नाथ बीन पार्टी और रिंकू डेरु पार्टी द्वारा दी गई लोक प्रस्तुतियों में ग्रामीण जीवन की सादगी और लोक संगीत की आत्मा साफ झलकती नजर आई। पारंपरिक वाद्य यंत्रों और लोक धुनों ने दर्शकों को हरियाणा और आसपास के ग्रामीण अंचलों की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ा।
इन प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को यह अनुभव हुआ कि लोक कला आज भी अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है और आधुनिक मंचों पर भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत की जा सकती है।
हास्य और मनोरंजन का तड़का
कार्यक्रम के दौरान हास्य कलाकार सतीश हरियाणवी ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को खूब हंसाया। उनके व्यंग्य और हास्य से भरपूर संवादों ने माहौल को हल्का-फुल्का बना दिया। दर्शकों ने उनकी प्रस्तुति को खूब सराहा और यह साबित हुआ कि हास्य कला भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अहम हिस्सा है।
हास्य और संगीत के इस संतुलन ने पूरे कार्यक्रम को और भी मनोरंजक बना दिया, जिससे हर आयु वर्ग के दर्शकों को कुछ न कुछ पसंद आने का अवसर मिला।
नृत्य प्रस्तुतियों से मंच हुआ जीवंत
सांस्कृतिक संध्या में नृत्य प्रस्तुतियों ने भी अपनी अलग पहचान बनाई। कलाकार अंजली भाटी और उनके सह कलाकारों द्वारा प्रस्तुत हरियाणवी सांस्कृतिक लोक नृत्य ने क्षेत्रीय संस्कृति की झलक पेश की। पारंपरिक वेशभूषा और सटीक तालमेल के साथ प्रस्तुत नृत्य ने दर्शकों को खूब आकर्षित किया।
इसके साथ ही डॉ. अमरजीत कौर और अन्य कलाकारों द्वारा प्रस्तुत शास्त्रीय लोक नृत्य ने मंच पर सांस्कृतिक विविधता को और गहराई प्रदान की। इन प्रस्तुतियों ने यह दिखाया कि भारतीय नृत्य परंपरा कितनी समृद्ध और बहुआयामी है।
नाट्य प्रस्तुति ने दिया सामाजिक संदेश
नाट्य कला के अंतर्गत शत्रुघ्न नागर और एस.डी. नागर पार्टी द्वारा प्रस्तुत नाटक “श्राप” ने दर्शकों को गंभीरता से सोचने पर मजबूर कर दिया। सामाजिक विषय पर आधारित इस नाटक ने मनोरंजन के साथ-साथ एक संदेश भी दिया।
नाटक की कहानी, संवाद और मंच सज्जा ने दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ा। कई दर्शकों ने इसे कार्यक्रम की सबसे प्रभावशाली प्रस्तुतियों में से एक बताया।
सांस्कृतिक विविधता का सशक्त मंच
39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले के ये सांस्कृतिक कार्यक्रम यह दर्शाते हैं कि यह आयोजन केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि कला, संस्कृति और परंपरा का जीवंत उत्सव है। दिनभर चली प्रस्तुतियों में संगीत, नृत्य, हास्य और नाट्य कला का ऐसा संतुलन देखने को मिला, जो कम ही आयोजनों में देखने को मिलता है।
मेले में आए देशी-विदेशी पर्यटकों ने इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन भारतीय लोक कला और संस्कृति को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आयोजन से जुड़े अधिकारी रहे मौजूद
इस अवसर पर कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा से कई अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रमों की व्यवस्थाओं और संचालन में कला एवं सांस्कृतिक अधिकारी डॉ. दीपिका रानी, रेनू हुडा, संदीप नैन, नरेंद्र, पंकज कुमार, राजेश कुमार, धर्मवीर, अनिल सहित विभाग के अन्य स्टाफ सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही।
अधिकारियों ने कार्यक्रमों की सुचारु व्यवस्था और दर्शकों की भागीदारी को लेकर संतोष व्यक्त किया।
मेले की सांस्कृतिक पहचान और आगे की उम्मीदें
सूरजकुंड शिल्प मेला हर वर्ष अपनी सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करता जा रहा है। इस तरह के विविध और संतुलित सांस्कृतिक कार्यक्रम न केवल कलाकारों को मंच प्रदान करते हैं, बल्कि दर्शकों को भी भारतीय कला और संस्कृति के करीब लाते हैं।
आयोजकों के अनुसार, आने वाले दिनों में भी छोटी चौपाल और अन्य मंचों पर इसी तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, जिससे मेले की रौनक बनी रहेगी।

