फरीदाबाद। विजय रामलीला कमेटी के ऐतिहासिक मंच पर कल रात रामायण के उन भावुक प्रसंगों का मंचन किया गया, जिन्होंने कलाकारों से लेकर दर्शकों तक की आंखें नम कर दीं। भरत का अपनी माता कैकेयी के प्रति आक्रोश, भगवान श्रीराम के प्रति उनका अटूट प्रेम और राम-भरत मिलन के दृश्य ने पूरे वातावरण को राममय कर दिया।
नाटक के प्रथम दृश्य में ननिहाल से लौटे भरत और शत्रुघ्न को अयोध्या सूनी मिली। नगर में पसरे सन्नाटे और बदले हुए माहौल को देखकर भरत सीधे राजमहल पहुंचे और माता कैकेयी से इसका कारण पूछा। कैकेयी ने उन्हें पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया, लेकिन यह जानकर भरत स्तब्ध रह गए कि उनकी माता ने श्रीराम को वनवास भेजने और उनके लिए राजगद्दी प्राप्त करने की योजना बनाई थी।
भरत की भूमिका में कमेटी के वरिष्ठ एवं पुराने कलाकार कमल शर्मा ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों को भावुक कर दिया। माता कैकेयी के फैसले का विरोध करते हुए भरत ने उन्हें धिक्कारा और माता कौशल्या को आश्वासन दिया कि वह श्रीराम के अधिकार को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। भरत का यह संकल्प कि “यह गद्दी राम की है और राम ही गद्दी के अधिकारी होंगे”, दर्शकों के दिलों को छू गया। इसके बाद भरत भगवान श्रीराम को वापस अयोध्या लाने के लिए वन की ओर प्रस्थान करते हैं।
दूसरी ओर, केवट प्रसंग में आशीष भाटिया ने केवट की भूमिका निभाते हुए प्रभावशाली अभिनय किया। इसके बाद राम-भरत मिलन का दृश्य प्रस्तुत किया गया, जिसने पूरे वातावरण को भावनाओं से भर दिया। भरत अपने बड़े भाई श्रीराम से अयोध्या लौटने का आग्रह करते हैं, लेकिन श्रीराम पिता के वचन का पालन करने के अपने संकल्प पर अडिग रहते हैं। अंततः श्रीराम अपनी खड़ाऊं भरत को सौंपकर उन्हें अयोध्या लौटने के लिए विदा करते हैं।
राम और भरत के बिछोह के इस दृश्य को देखकर दर्शक भावविभोर हो उठे। इस प्रसंग को और अधिक मार्मिक बनाने में कमेटी के पूर्व निर्देशक स्वर्गीय विश्वबंधु शर्मा द्वारा रचित गीत “दिन कभी ऐसे भी आएंगे, ये मालूम न था” की अहम भूमिका रही। गीत और कलाकारों के भावपूर्ण अभिनय ने दर्शकों को रामायण के प्रसंगों से भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।
विजय रामलीला कमेटी के मंच पर प्रस्तुत इन दृश्यों ने भाई के प्रति प्रेम, त्याग, मर्यादा और कर्तव्यपालन का संदेश दिया। भरत का राजगद्दी को अस्वीकार कर श्रीराम के अधिकार को सर्वोपरि मानना दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहा।
आज होगा शूर्पणखा की नाक काटने और माता सीता के हरण का मंचन
रामलीला के आगामी मंचन में लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा की नाक काटने और माता सीता के हरण के महत्वपूर्ण प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे। इन घटनाओं के साथ रामायण की कथा एक नए मोड़ पर पहुंचेगी, जिसे देखने के लिए दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है।

