फरीदाबाद। डायबिटीज के मरीजों के लिए भारत में साप्ताहिक बेसल इंसुलिन के लॉन्च को उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस नई तकनीक के आने से अब कई मरीजों को रोजाना इंसुलिन का इंजेक्शन लगाने की बजाय सप्ताह में केवल एक बार इंजेक्शन लेना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मरीजों की दवा लेने की नियमितता (कम्प्लायंस) बेहतर होगी और जीवनशैली भी आसान बनेगी।
ग्रेटर फरीदाबाद स्तिथ एकॉर्ड अस्पताल के हृदय रोग विभाग के चेयरमैन डॉ. ऋषि गुप्ता के अनुसार, मधुमेह केवल रक्त में शुगर बढ़ने की बीमारी नहीं है, बल्कि यह हृदय, किडनी, आंखों और नसों को भी गंभीर रूप से प्रभावित करती है। लंबे समय तक अनियंत्रित शुगर रहने से हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हार्ट फेल्योर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए डायबिटीज का समय पर और नियमित उपचार बेहद आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि सप्ताह में एक बार लगने वाली बेसल इंसुलिन उन मरीजों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है जिन्हें रोजाना इंजेक्शन लेने में कठिनाई होती है या जो अक्सर डोज़ भूल जाते हैं। इससे उपचार को नियमित रखने में मदद मिलेगी और ब्लड शुगर नियंत्रण बेहतर हो सकता है। हालांकि, यह सभी मरीजों के लिए उपयुक्त हो, ऐसा जरूरी नहीं है। मरीज को अपनी उम्र, बीमारी की अवस्था और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के आधार पर ही डॉक्टर की सलाह से इंसुलिन का चयन करना चाहिए।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि केवल इंसुलिन बदलने से ही डायबिटीज नियंत्रित नहीं होगी। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण, धूम्रपान और तंबाकू से दूरी, पर्याप्त नींद तथा समय-समय पर ब्लड शुगर और एचबीए1सी की जांच भी उतनी ही जरूरी है। हृदय रोग के जोखिम को कम करने के लिए रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल पर भी निगरानी रखनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि नई साप्ताहिक इंसुलिन चिकित्सा मरीजों के लिए एक सकारात्मक विकल्प है, लेकिन इसे किसी चमत्कारी इलाज के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सही मरीज का चयन, विशेषज्ञ की निगरानी और नियमित फॉलोअप के साथ ही इसका पूरा लाभ मिल सकता है। ऐसे में मरीज बिना चिकित्सकीय सलाह के अपनी वर्तमान इंसुलिन या दवा में कोई बदलाव न करें।

