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पलवल | 05 फरवरी 2026

कुरुक्षेत्र में 6 से 8 फरवरी तक होगी 41वीं राज्य स्तरीय पशु प्रदर्शनी

हरियाणा में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 41वीं राज्य स्तरीय पशु प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। यह तीन दिवसीय प्रदर्शनी 6 फरवरी से 8 फरवरी 2026 तक कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मेला ग्राउंड में आयोजित होगी। इस आयोजन में प्रदेशभर से चयनित उत्कृष्ट नस्ल के पशु भाग लेंगे, जिससे पशुपालकों को उन्नत नस्लों की जानकारी और प्रेरणा मिलेगी।

इस संबंध में जानकारी देते हुए पलवल के उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने बताया कि यह आयोजन मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी तथा पशुपालन एवं कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय पशु प्रदर्शनी किसानों और पशुपालकों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगी।

प्रदेशभर से शामिल होंगे लगभग 1500 पशु

उपायुक्त ने बताया कि इस प्रदर्शनी में हरियाणा के विभिन्न जिलों से लगभग 1500 उत्कृष्ट नस्ल के पशु भाग लेंगे। ये पशु अलग-अलग श्रेणियों में प्रदर्शित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य पशुपालकों को बेहतर नस्लों के बारे में जानकारी देना और नस्ल सुधार के प्रति जागरूक करना है।

उन्होंने कहा कि अच्छी नस्ल के पशुओं का प्रदर्शन पशुपालकों को आधुनिक पशुपालन की ओर प्रेरित करता है। इससे दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार करने में मदद मिलती है।

विजेताओं को मिलेंगे नकद पुरस्कार

प्रदर्शनी के दौरान विभिन्न श्रेणियों में चयनित सर्वश्रेष्ठ पशुओं को आकर्षक नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। यह प्रोत्साहन राशि पशुपालकों को बेहतर नस्लों के संरक्षण और विकास के लिए प्रेरित करेगी।

अधिकारियों के अनुसार, पुरस्कार प्रणाली को पारदर्शी रखा जाएगा, ताकि योग्य पशुपालकों को उचित सम्मान मिल सके।

पशुपालकों से भागीदारी की अपील

उपायुक्त ने बताया कि पशुपालन विभाग के सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के पशुपालकों से संपर्क करें। उन्हें मेले में भाग लेने और अपनी उच्च गुणवत्ता की नस्ल के पशुओं को प्रदर्शनी में लाने के लिए प्रेरित किया जाए।

इसके साथ ही अधिकारियों को आयोजन की तैयारियों में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि प्रदर्शनी का आयोजन सुचारु रूप से हो सके।

किन पशुओं की होगी प्रदर्शनी

पशुपालन एवं डेयरी विभाग पलवल के उपनिदेशक डा. विरेंद्र सिंह राठी ने बताया कि प्रदर्शनी में कई प्रमुख नस्लों के पशु शामिल होंगे। इनमें मुर्रा नस्ल की भैंसें, देशी नस्ल की गायें जैसे हरियाणा, साहीवाल, गिर, थारपारकर, साही और बेहली शामिल हैं।

इसके अलावा क्रॉस ब्रीड गाय, घोड़े और अन्य पशु भी प्रदर्शनी का हिस्सा होंगे। इससे पशुपालकों को विभिन्न नस्लों की विशेषताओं को समझने का अवसर मिलेगा।

आवश्यक दस्तावेज साथ लाना अनिवार्य

उपनिदेशक ने जानकारी दी कि प्रदर्शनी में भाग लेने वाले पशुपालकों को कुछ आवश्यक दस्तावेज अपने साथ लाने होंगे। इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक और परिवार पहचान पत्र शामिल हैं।

इन दस्तावेजों की आवश्यकता पंजीकरण और पुरस्कार वितरण की प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए रखी गई है।

परिवहन की विशेष व्यवस्था

पशुपालन विभाग पलवल द्वारा पशुपालकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परिवहन की विशेष व्यवस्था की गई है। विभाग की ओर से प्रतिदिन तीन बसों की व्यवस्था की जाएगी, जिससे पशुपालकों को प्रदर्शनी स्थल तक लाया और वापस ले जाया जा सके।

इस व्यवस्था से दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले पशुपालकों को भी सुविधा मिलेगी।

पशुपालन से जुड़ी नई जानकारी का अवसर

राज्य स्तरीय पशु प्रदर्शनी केवल पशुओं के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। यह पशुपालकों के लिए सीखने और जानकारी साझा करने का भी मंच है। यहां पशुपालन से जुड़ी नवीन तकनीकों, नस्ल सुधार और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की जाएगी।

अधिकारियों का मानना है कि ऐसे आयोजन पशुपालकों को अपने व्यवसाय को अधिक लाभकारी बनाने में मदद करते हैं।

जिला पलवल के पशुपालकों से विशेष आग्रह

उपनिदेशक डा. विरेंद्र सिंह राठी ने जिला पलवल के सभी पशुपालकों से अपील की है कि वे इस राज्य स्तरीय पशु मेले में बढ़-चढ़कर भाग लें। उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शनी में भाग लेकर पशुपालक उच्च कोटि की नस्लों को नजदीक से देख सकते हैं।

इसके साथ ही वे पशुपालन से संबंधित नई जानकारियां प्राप्त कर अपने कार्य को और अधिक प्रभावी बना सकते हैं।

किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में कदम

41वीं राज्य स्तरीय पशु प्रदर्शनी को किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अच्छी नस्लों के प्रचार और पशुपालन के आधुनिक तरीकों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के आयोजन भविष्य में भी लगातार किए जाते रहेंगे, ताकि पशुपालन क्षेत्र में निरंतर सुधार हो सके।

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