फरीदाबाद, जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एकॉर्ड सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने की शपथ ली। साथ ही स्वच्छता, हरित जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने का आह्वान किया गया।
अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि प्रदूषण कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अस्पताल परिसर में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के लिए नि:शुल्क पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। कार्यक्रम में पर्यावरण और स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंधों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि बढ़ता प्रदूषण अनेक गंभीर बीमारियों का कारण बन रहा है, ऐसे में पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
अस्पताल के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) डॉ. जितेंद्र कुमार ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों की जिम्मेदारी केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण के प्रति जागरूक करना भी उनका दायित्व है।
सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. प्रबल रॉय ने कहा कि प्रदूषण का प्रभाव शरीर के विभिन्न अंगों पर पड़ता है और इससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। वहीं कार्डियोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. ऋषि गुप्ता ने बताया कि वायु प्रदूषण हृदय रोगों के बढ़ते मामलों का प्रमुख कारण बन रहा है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और प्लास्टिक के उपयोग को कम करने की अपील की।
ऑर्थोपेडिक्स विभाग के निदेशक डॉ. युवराज कुमार ने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए स्वच्छ वातावरण अत्यंत आवश्यक है। पर्यावरण संरक्षण के प्रयास आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और बेहतर भविष्य प्रदान करेंगे। न्यूरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. रोहित गुप्ता ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण का प्रभाव केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक एवं न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रहा है।
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. आर.सी. सोनी ने कहा कि अस्पताल मरीजों के उपचार के साथ-साथ अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों का भी निर्वहन कर रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक भागीदारी और जनजागरूकता से ही सकारात्मक बदलाव संभव है।
कार्यक्रम के अंत में सभी डॉक्टरों एवं कर्मचारियों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दोहराया तथा नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और पर्यावरण को स्वच्छ एवं सुरक्षित बनाए रखने में सक्रिय योगदान देने की अपील की।

