फरीदाबाद। एनआईटी फरीदाबाद-86 से पूर्व विधायक नीरज शर्मा ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए जांच और प्रशासनिक कार्यवाहियों में बड़े स्तर पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है। एक विशेष बयान जारी करते हुए पूर्व विधायक ने कहा कि वर्तमान सरकार ‘अंधा बांटे रेवड़ी, फिर-फिर अपने को दे’ की नीति पर चल रही है और जांच के नाम पर जनता की आंखों में धूल झोंकने का काम कर रही है।
नीरज शर्मा ने पंचकूला नगर निगम के करोड़ों रुपये के घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष और जनता के भारी दबाव के बाद इस मामले को सीबीआई को सौंपने की बात तो कही गई, लेकिन सरकार की नीयत पूरी तरह साफ नहीं है।
पूर्व विधायक नीरज शर्मा ने चंडीगढ़ और हरियाणा के अन्य हिस्सों में हाल ही में हुए कई हजार करोड़ रुपये के नए घोटालों पर चिंता जताते हुए कहा, *”सरकारी पैसा कहां और किसकी जेब में खुर्द-बुर्द हुआ, इसका कोई अता-पता नहीं है। कुछ पैसा बैंक ने वापस जरूर किया है, लेकिन वो पैसा भी बैंक का अपना नहीं था, बल्कि वो देश की आम जनता और शेयरधारकों की गाढ़ी कमाई का पैसा था।”*
नीरज शर्मा ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब पंचकूला नगर निगम का करीब 150 से 200 करोड़ रुपया का घोटाला हुआ है ऐसा ही घोटाला **आईडीएफसी (IDFC), एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (AU Small Finance Bank)** और **कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank)** में हुआ, तो सरकार ने केवल दो बैंकों (IDFC और AU Small Finance) के मामले की जांच तो सीबीआई को सौंप दी, लेकिन कोटक महिंद्रा बैंक की जांच को जानबूझकर सीबीआई के दायरे से बाहर क्यों रखा गया है?
उन्होंने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि जब घोटाले का स्वरूप (Nature) एक जैसा है, तो कोटक महिंद्रा बैंक की जांच सीबीआई से क्यों नहीं कराई जा रही? इस मामले में भाजपा के पूर्व मेयर कुलभूषण अग्रवाल और सन्नी गर्ग की क्या भूमिका है, यह जनता के सामने स्पष्ट होना चाहिए। पूर्व विधायक ने तंज कसते हुए कहा कि आज भाजपा नेताओं के बच्चे ही अंडरग्राउंड नजर आ रहे हैं, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि दाल में कुछ काला है।
नीरज शर्मा ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि प्रदेश और देश की जनता सब कुछ देख रही है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे घोटाले की निष्पक्ष और पूरी जांच सीबीआई को सौंपी जाए ताकि जनता की एक-एक पाई का हिसाब हो सके और भ्रष्टाचारियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जा सके।

