भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर रहा सूरजकुंड मेला

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-सूरजकुंड में महा स्टेज, चौपाल से नाट्यशाला तक बिखर रहे कला-संस्कृति के रंग
-38 वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला परिसर में बॉलीवुड से लेकर छोटे कलाकारों के लिए सजे हैं चार मंच
-मेला में प्रतिदिन छोटी चौपाल, बड़ी चौपाल, महा चौपाल और नाट्यशाला पर आयोजित हो रहे भव्य कार्यक्रम
– अब तक 13 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे मेला में

सूरजकुंड (फरीदाबाद) 20 फरवरी। सूरजकुंड में चल रहा 38 वां अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला पूरे शबाब पर है। मेला में आने वाले प्रत्येक पर्यटक को कलाकार, बुनकर, शिल्पकारों के साथ ही देशी विदेशी लजीज व्यंजनों का स्वाद चखने को मिल रहा है। मेला में अब तक 13 लाख से ज्यादा पर्यटक विजिट कर चुके हैं। इस बार मेला में कलाकारों के लिए एक अनोखा सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित किया गया है, जिसमें देश के विभिन्न कोनों से आए पर्यटक और संस्कृति प्रेमी अपनी-अपनी परंपराओं और कलाओं का अद्भुत संगम देखने के लिए जुटे हैं। परिसर में अलग अलग स्थानों पर बने चार प्रमुख मंच-महा स्टेज, बड़ी चौपाल, छोटी चौपाल और नाट्यशाला में चल रहे कार्यक्रम न केवल भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर रहे हैं बल्कि आधुनिकता और पारंपरिकता के बीच एक सेतु का कार्य भी कर रहे हैं। यह आयोजन पर्यटकों को विभिन्न कलात्मक शैलियों, लोक संगीत, नृत्य, हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजन और अनेक सांस्कृतिक अनुभवों का आनंद लेने का अवसर प्रदान करता है।
सूरजकुंड मेला परिसर में बनी छोटी चौपाल क्षेत्र में पारंपरिक ग्रामीण जीवन की झलक देखने को मिलती है। यहां स्थानीय कलाकारों द्वारा हस्तशिल्प, लोक नृत्य, संगीत और कथा वाचन के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। चौपाल में दर्शक न केवल अपने पूर्वजों की परंपराओं को आत्मसात कर रहे हैं बल्कि नए-नए प्रयोगों का भी लुत्फ उठा रहे हैं।
बड़ी चौपाल पर पारंपरिकता और आधुनिकता का अद्भुत मिश्रण देखने को मिल रहा है। यहां के आयोजन में विभिन्न रंगमंचीय प्रस्तुतियां, संवाद सत्र और कला प्रदर्शनी के माध्यम से संस्कृति के रंग बिखर रहे हैं। वहीं शाम होते ही दर्शकों का महा स्टेज की ओर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। महा स्टेज पर हर दिन रात के समय कला, नृत्य, संगीत और थिएटर से जुड़े कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
नाट्यशाला क्षेत्र उस आयोजन का केंद्र रहा है जहां विभिन्न नाटकों, मंचीय प्रस्तुतियों और संवादात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से भावनाओं का सजीव प्रदर्शन किया जा रहा है। नाट्यशाला में आयोजित नाटकों में भारतीय लोक कथाओं और आधुनिक विषयों का अनूठा संगम देखने को मिला। मंचीय प्रस्तुतियों में कलाकारों ने अपनी अदाकारी, संवाद और अभिनय कौशल से दर्शकों का मन मोह लिया। इन नाटकों में सामाजिक मुद्दों, मानवीय संवेदनाओं और जीवन की विविधताएं दर्शाई गई, जिससे दर्शक अलग-अलग देश व विदेशी कला व संस्कृति से सीधे तौर पर रूबरू हो रहे हैं।
पर्यटन निगम हरियाणा के एमडी डा. सुनील कुमार कहते हैं कि महाकुंभ स्वरूप शिल्प महाकुंभ मेला में कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सरकार के निर्देशानुसार कलाकारों, शिल्पकारों और पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। मेला में हर पर्यटक को विभिन्न देश व विदेशी कला और संस्कृति की जानकारी मिले, इसके लिए मेला परिसर में अलग अलग चार मंच बनाए गए हैं, जहां प्रतिदिन कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां देकर आगन्तुकों का भरपूर मनोरंजन किया जा रहा है।

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