फरीदाबाद। श्री विजय रामलीला कमेटी के ऐतिहासिक मंच पर बीती रात रामायण के दो अत्यंत भावपूर्ण और महत्वपूर्ण प्रसंगों का सजीव मंचन किया गया। पहले प्रसंग में प्रभु श्रीराम और माता शबरी का मिलन दिखाया गया, जिसने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इसके बाद श्रीराम और हनुमान की भेंट, सुग्रीव से मित्रता तथा बाली वध के प्रसंगों का प्रभावशाली मंचन हुआ।
रामायण के अनुसार, मुनि मतंग के वचनों पर विश्वास करते हुए माता शबरी वर्षों से प्रभु श्रीराम के आगमन की प्रतीक्षा कर रही थीं। आखिरकार प्रभु श्रीराम अपने छोटे भाई लक्ष्मण के साथ शबरी की कुटिया में पहुंचे और उन्हें दर्शन दिए। भक्ति और प्रेम से अभिभूत शबरी ने प्रभु को बेर अर्पित किए। भगवान श्रीराम ने उनकी अनन्य भक्ति और निश्छल प्रेम को स्वीकार करते हुए बेर खाए। इस दृश्य ने दर्शकों को भक्ति की सच्ची भावना का संदेश दिया।
माता शबरी की भूमिका में प्रिंस मनोचा और प्रभु श्रीराम की भूमिका में निशांत ने अपने सशक्त अभिनय से इस प्रसंग को जीवंत बना दिया। दोनों कलाकारों की प्रस्तुति ने दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।
इसके पश्चात मंच पर प्रभु श्रीराम और हनुमान जी का भव्य मिलन दिखाया गया। हनुमान जी की भूमिका में कमेटी के मंच संचालक वैभव लडोइया ने प्रभावशाली अभिनय किया। इस रामलीला में हनुमान जी का यह पहला प्रवेश था। उनके आगमन और प्रभु श्रीराम के साथ मिलन के दृश्य ने दर्शकों में विशेष उत्साह भर दिया।
आगे की कथा में हनुमान जी ने प्रभु श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता करवाई। सुग्रीव की भूमिका में अंकित कुमार ने शानदार अभिनय किया, जबकि बाली के किरदार में आशीष भाटिया ने अपने अभिनय से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद मंच पर बाली वध का दृश्य प्रस्तुत किया गया। कथा के अगले पड़ाव में हनुमान जी को माता सीता की खोज के लिए लंका रवाना होते दिखाया गया।
श्री विजय रामलीला कमेटी के मंच पर प्रस्तुत इन प्रसंगों ने दर्शकों को रामायण की भक्ति, मित्रता, त्याग और धर्म की महत्ता से रूबरू कराया। रामलीला के आगामी प्रसंग में आज लंका दहन का भव्य मंचन किया जाएगा, जिसे लेकर दर्शकों में खासा उत्साह है।

