फरीदाबाद। रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं, बल्कि विश्वास, समर्पण, आध्यात्मिक संरक्षण और आत्मीयता का पवित्र प्रतीक है। रक्षासूत्र मनुष्य को प्रेम और विश्वास की उस अदृश्य डोर से बांधता है, जो जीवनभर साथ रहती है। यह भावपूर्ण संदेश श्री सिद्धदाता आश्रम के अधिपति जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने रक्षाबंधन के अवसर पर दिया।
सूरजकुंड रोड स्थित श्री लक्ष्मीनारायण दिव्यधाम (श्री सिद्धदाता आश्रम) में ब्रह्माकुमारी केंद्र, सेक्टर-46 की संचालिका बीके मधु बहन ने स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज की कलाई पर विधि-विधानपूर्वक रक्षासूत्र बांधकर उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की मंगलकामना की।
इस अवसर पर भावुक बीके मधु बहन ने कहा कि स्वामी जी का स्नेहपूर्ण सान्निध्य अशांत मन को भी शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। उनकी कृपा से अनेक लोग आध्यात्मिकता के मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं।
रक्षासूत्र स्वीकार करते हुए महाराज जी ने कहा कि यह केवल धागा नहीं, बल्कि अटूट विश्वास और पवित्र संकल्प का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य का संबंध भी इसी विश्वास और समर्पण पर आधारित है। गुरु का आशीर्वाद शिष्य के जीवन में मंगल, आत्मबल और आध्यात्मिक संरक्षण का आधार बनता है।
इस अवसर पर पूर्व पुलिस अधिकारी आशा कुमारी ने भी श्री गुरु महाराज जी को रक्षासूत्र अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे आश्रम परिसर में श्रद्धा, स्नेह और आध्यात्मिक भावनाओं का वातावरण बना रहा।

